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नितिन चौधरी

भारत अपनी आजादी की 63वीं वर्षगाठ मना रहा है और लोकतंत्र का तमगा पहने पूरी दुनियां को अपनी ओर रिझा रहा है पर यह कहावत भी सत्य है कि ”शेर की खाल को पहन कर गध्दा शेर नहीं बन जाता है।” आज से एक पखवाड़े पहले 8 अप्रैल को अन्ना हजारे का अनशन ऐसे चमका जैसे कैमरे की फ्लैश लाईट और फिर ओझिल हो गया। अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों को गलत ठहराने और उन्हें बदनाम करने हेतु गैर-राजनीतिक एवं राजनीतिक स्तर पर जैसी गंदी हरक तें की जा रही है, उसे देखकर तो लगता है कि भ्रष्टाचार विरोधी प्रक्रिया को दबाने वाली ताकतें कितनी जबरदस्त है।

 

जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आमरण अनशन आरंभ हुआ तो इसकी सराहना राजनेताओं से लेकर उद्यमियों तक ने की है पर अब क्या हो गया? उन्हें जो अन्ना को गलत ठहराने लगे कभी अन्ना के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करने की बात आती है तो कभी आमरण अनशन अन्ना की लोकप्रसिध्दि का षड़्यंत्र बताया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी की कर्ताधर्ता सोनिया गांधी व डॉ.मनमोहन सिंह ने पत्र लिखकर अन्ना को यदि सच्चा समर्थन दिया है तो उनके हीं कांग्रेसी नेता लोकपाल विधेयक को लागू करने से क्यों कतरा रहे हैं? यदि सोनियां गांधी सच में लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं तो वह अपने कांग्रेसी नेताओं पर लगाम क्यों नहीं लगा रही?

 

लोकपाल विधेयक बनने से पूर्व हीं जनता की जहन में संदेह उत्पन्न करने के लिए कभी सी.डी. सार्वजनिक की जा रही है तो कभी नरेंद्र मोदी का बयान सामने आ रहा है, कभी बाबा रामदेव को बीच में लाया जा रहा है तथा कभी कपिल सिब्बल इसे अप्रभावी बता रहे हैं। ऐसे अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं जिससे अन्ना हजारे का अनशन धूमिल हो रहा है। यदि राजनेताओं और भ्रष्टाचारियों की यही चाल है कि बाहर से तो समर्थन दें और अंदर से लोकपाल विधेयक को रोका जाए तो इसकी तुलना हम ”शेर की खाल पहने गधे” से कर सकते हैं। फिर एक अन्ना गांधीवाद को पूरा करने में असफल हो जाएगा?

 

42 वर्षों से अटकी हुई लोकपाल बिल को यदि अन्ना ने मात्र चार दिनों में प्रक्रिया में लाया है तो अपने आप में यह एक बड़ा ऐतिहासिक उपलब्धि है। यदि अन्ना ने जंतर-मंतर पर बैठे हुए ही पूरे देश की जनता को एक मुद्दे के समर्थन में खड़ा किया है तो इस मशाल को ऐसे हीं न बुझने दिया जाए। भ्रष्ट राजनेताओं को यदि एक अन्ना रात को न सोने पर मजबूर कर सकता है तो वह समय अब आ गया है कि देश के हर घर से एक अन्ना समाने आए और लोकपाल बिल को लागू करने पर सरकार को मजबूर कर दे, वरना यह भ्रष्टाचारी व सरकारी तंत्र हमें ऐसे ही और न जाने कितने वर्षों तक शेर की खाल ओढ़े डराती रहेगी।

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