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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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रँग वर्ण और सम्प्रदाय का, भेदभाव ना हो आपसी I
कर्तव्यपरायण प्रशासक हों, राजधर्म की हो वापसी II
अटूट अलौकिक ऐसे ग्रह पर, अपनी भी एक अदभुत छवि हो
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
तमिल तेलुगू और केरल में, रिमझिम रिमझिम सी वर्षा हो I
कन्नड़ गोवा महाराष्ट्र में, मलयपवन मय मधु हर्षा हो II
बंग से लेकर नागाभूमि, और दार्जिलिंग में अमनचैन हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
सिक्किम और आसामी धरती, वर्णित नहीं करने में आतीं I
अरुणाचल और मेघालय से, म्यम्मार तक सब मुस्करातीं II
हिमाचल कश्मीर से लेकर, जम्मू तक का भव्य मुकुट हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
पंचनदी से हरयाणा तक, बृजभूमि में हो सवेरा I
पगड़ी राजस्थानी पहनूँ, गुजरात में करूँ बसेरा II
सारे यमुना-गंगा तल पर श्वेत दुग्ध सरित प्रवाह हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
मगधराज्य से भुवनेश्वर तक, गायें गाथा मिलकर सारे I
मध्यराज्य की उज्जैयनि ने, दिये सारे कष्ट निवारे II
अविभाज्य इकाई हो राष्ट्र की, सोचो सबको बड़ा गर्व हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
भूखा-नंगा रहे कोई नहीं, सर पर सबके अपनी छत हो I
बाल-बालिके शिक्षण-पथ पर, बृद्धों की सेवा की लत हो II
विकासकार्य संयम से करने, हेतु राष्ट्र की मध्यम गति हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
रंक धनी सब हर्षित होकर, बोलें एकदिन एक ही स्वर में I
भ्रष्टाचार मिटे ‘गज’ भू से, ध्वनि गूँज उठे अम्बर में II
सत्य निष्कपट अहिंसात्मक नव-पीढ़ी का पुनर्गठन हो I
विश्व-गुरु अति प्रेरणात्मक, ऐसा अपना भारतवर्ष हो II
–गजराज सिंह

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2 Comments on "“ऐसा अपना भारतवर्ष हो”"

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Insaan
Guest

रंग वर्ण और संप्रदाय का, भेदभाव ना हो आपसी I
कर्तव्यपरायण प्रशासक हों, राजधर्म की हो वापसी II
“ऐसा अपना भारतवर्ष हो|” अति सुंदर! कविराज गजराज सिंह जी को मेरा साधुवाद|

बी एन गोयल
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बी एन गोयल

सुन्दर -राष्ट्र गीत के समान – समवेत स्वर में गाना चाहिए

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