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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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-अब्दुल नूर शिबली-
Political Leader

जिन-जिन लोगों को हिंदी फिल्में देखने का शौक़ है वह सब अमरीश पूरी, प्रेम चोपड़ा, गुलशन ग्रोवर, शक्ति कपूर, सदाशिव अमरापुरकर, प्राण और इसी प्रकार के दुसरे विलन को अच्छी तरह जानते हैं जो फिल्मों में गांव वालों को या आम जनता को धमकी देते रहते हैं कि यदि तुमने हमारा काम नहीं किया तो हम तुम्हें उठवा लेंगे, तुम्हारे घर वालों को उठवालेंगे, या फिर यह कि तुम्हारी ज़मीन छीन लेंगे। यह सब फ़िल्मी गुंडे हैं और ऐसी हरकतें सिर्फ फिल्मों में करते हैं। मगर अफसोस की बात यह है कि हमारे प्यारे देश भारत में जिन नेताओं को जनता की रक्षा के लिए चुना जाता है वही आये दिन जनता को और अपनर विरोधियों को धमकी देते रहते हैं। प्रवीण तोगड़िया, अकबरुद्दीन ओवैसी, अमित शाह, इमरान मसूद, वसुंधरा राजे सिंधिया, गिरिराज सिंह और अजित पवार जैसे लोग इन दिनों किसी अच्छे काम के लिए मशहूर नहीं हुए हैं बल्कि इन्होंने अपने भाषणों के दौरान कुछ ऐसी बातें कहीं हैं जिनसे ऐसा लगता है कि वह या तो वोटरो, किसी खास धर्म के मानने वालों को यह फिर अपने राजनितिक विरोधियों को धमका रहे हैं। कोई किसी को टुकड़े टुकड़े करने की धमकी दे रहा है तो कोई चुनाव बाद कौन किसके टुकड़े करता है ऐसा कहकर धमका रहा है। कोई मोदी विरोधियों को भारत से निकल जाने की धमकी दे रहा है तो किसी को यह पसंद नहीं है कि मुस्लिम हिन्दुओं के मोहल्ले में बिज़नेस करें। अगर कोई मुस्लमान हिन्दू मोहल्ले में बिज़नेस करने की हिम्मत करता है तो उसे प्रवीण तोगड़िया जैसे लोग धमकी देते हैं और अपने गुंडों को उस मुसलमान का घर लूट लेने की बात कहते हैं।

अफ़सोस इस बात का भी है कि वरुण गांधी और राज ठाकरे जैसे लोग किसी को धमकी दें तो बात समझ में आती है कि इन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नेता भी ऐसा करते हैं। तीन अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने शिक्षा मित्रों को कथित रूप से धमकी दी कि वे एसपी को वोट करें नहीं तो उन्हें स्थायी करने का फैसला वापस ले लिया जाएगा।

ऐसा नहीं है कि भारत की राजनीति में अचानक इतनी गिरावट आ गयी है पहले भी लोग नेता लोग गलत भाषा का प्रयोग करते रहे हैं, एक दूसरे की निजी ज़िन्दगी पर हमले होते रहे हैं अलबत्ता इस बार यह देखने को मिल रहा है की नेता जी हज़ारों की भीड़ के सामने एक दूसरे को देख लेने की धमकी दे रहे हैं। राजनितिक पार्टियों में कोई भी पार्टी ऐसी नहीं हैं फ़िलहाल आम आदमी पार्टी को छोड़कर जो यह कहे कि उसके एक भी नेता ने किसी को धमकी नहीं दी। कोई कोई नेता तो ऐसा है जिसने बदतमीज़ी की हद ही पार कर दी है। इसमें इमरान मसूद, अमित शाह, अजित पवार और गिरिराज जैसों का नाम लिया जा सकता है, जहां इमरान मसूद ने मोदी को टुकड़े-टुकड़े कर देने की धमकी दी, वहीँ गिरिराज ने तो यहां तक कह दिया की जो लोग मोदी को पसंद नहीं करते वह पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हो जाएं।

हालांकि इन सभी मामलों में चुनाव आयोग ने भाषण की सीडी मंगवाई और थोड़ा बहुत एक्शन भी लिया मगर चूंकि इस तरह की धमकी देने वालों के खिलाफ कभी उचित कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए ऐसे नेता आये दिन जनता को या अपने विरोधियों को धमकी देते रहते हैं। अजित पवार पहले भी कई बार गलत भाषा का प्रयोग कर चुके हैं, अगर पहले ही उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो गयी होती तो तो वह इस बार जनता जो वोट नहीं देने की स्थिति में पानी रोक देने की धमकी नहीं देते।

अजित पवार ने लोगों को धमकी देते हुए कहा, कल वोटिंग है यदि लोगों ने सुप्रिया के पक्ष में वोट नहीं किया तो हम गांव की पानी की आपूर्ति काट देंगे। मेरी बहन को बारामती से बहुत वोट मिलते हैं. इसकी हार जीत पर तुम लोगों के वोटों से कोई अंतर नहीं पड़ेगा और सुप्रिया को तो हम बाहर से जितवा ही देंगे लेकिन मैं वोटिंग मशीन से इस बात का पता लगवा लूंगा कि तुम लोगों ने किसके पक्ष में वोट डाला है। अजित पवार कितने संजीदा राजनेता हैं इसका अंदाजा आप उनके पहले के बयान से लगा सकते हैं। एक बार अजित पवार ने कहा था कोई किसान डैम से पानी छोड़ने की मांग पर बल देने के लिए भूख हड़ताल पर बैठा है हम पानी लोाएं कहां से? भूख हड़ताल करने से पानी नहीं मिलेगा, पानी पानी किया करते हो। ज़रा गौर कीजिये इस घटिया बयान के बाद यदि पवार के विरुद्ध कोई सख़्त कार्रवाई की गयी होती तो आज वह वोटरों को धमकी देते? यही नहीं पवार ने यह भी कहा, महारष्ट्र में बिजली की कमी है। बिजली चली जाने के बाद लोगों के पास बच्चा पैदा करने के सिवाय और कोई काम ही नहीं रहता।

सवाल यह है कि आखिर नेता इस हद तक क्यों गिरते जा रहे हैं। क्या उनका सिर्फ एक ही मक़सद होता है सत्ता पाना और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। राजनीती पर नज़र रखने वाले कहते हैं जब राजनितिक लाभ के लिए नेता लोग दंगा तक करवा देते हैं, सैकड़ों की जानें चली जाती हैं, हज़ारों बेघर हो जाते हैं और यह सब सिर्फ इसलिए कराया जाता है कि इस से राजनितिक लाभ उठाया जा सके। जब लाश पर राजनीति कीजै सकती है तो फिर एक दूसरे को गाली गलौज देने और फिर किसी को धमकाने में इन नेताओं को शर्म क्यों महसूस हो? ग्रीराज सिंह का मामला ही देख लीजिये। भाजपा ने उनके ब्यान से पल्ला झाड़ लिया है फिर भी वह अपने बयान पर क़ायम हैं और कहते हैं उन्हों ने कुछ गलत नहीं किया। अगर जनता को लगता है कि नेताओं में ह्रदय परिवर्तन होगा तो वह गलत सोच रहे हैं। जनता ही चाहे तो ऐसे धमकी देने वाले नेताओं को उनकी औक़ात बता सकती है। गलती जनता की भी है. जब भी कोई नेता किसी को धमकी देता है तो सभा में मौजूद लोग खूब तालियां बजाते हैं उन्हें यह अंदाज़ा नहीं लगता कि आज जो नेता अपने लाभ के लिए किस दूसरे को धमकी दे रहा है तो कल उसे भी धमकी दे सकता है। जनता में सुधार के बिना नेताओं के सुधरने की उम्मीद नहीं की जा सकती। नेता लोग इन दिनों जैसी धमकी वाली राजनीति कर रहे हैं, उस से यह तय करना कठिन हो रहा है कि यह नेता हैं या गुंडे?

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1 Comment on "यह नेता हैं या गुंडे ?"

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narendrasinh
Guest

ye neta nahi hai shakuni ke parivar se hai jo anap sanap bolte rehte hai taki jarurat mand bhay se vote kare or unka maksad pura ho magar abki bar iasa nahi hoga janta jag gai hai ———-

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