लेखक परिचय

अजीत कुमार सिंह

अजीत कुमार सिंह

लेखक अजीत कुमार सिंह, झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले, भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर लिंग में से एक, बाबा की नगरी बैद्यनाथधाम, देवघर के रहने वाले हैं। इनकी स्नातक तक शिक्षा-दीक्षा यहीं पर हुई, दिल्ली से इन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया। छात्रजीवन से ही लेखन में विशेष रूचि रहने के कारण समसामयिक मुद्दों पर विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि में नियमित लेख प्रकाशित होते रहते हैं। देवघर और रांची में विभिन्न समाचार पत्र से जुड़कर समाचार संकलन आदि का काम किया। वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का मुखपत्र "राष्ट्रीय छात्रशक्ति" मासिक पत्रिका में बतौर सहायक-संपादक कार्यरत हैं। संपर्क सूत्र- 8745028927/882928265

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रांत मंत्री, राष्ट्रीय मंत्री और अब राष्ट्रीय महामंत्री के लिए पुनर्निर्वाचित श्री विनय बिदरे मूलतः कर्नाटक प्रांत के तुमकुर जिला के बिदरे गांव के हैं। वर्ष 1998 से वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (अभाविप) के संपर्क में आये। अपने शैक्षणिक जीवन में इन्होंने कई आंदोलनों का सफल नेतृत्व भी किया। इसके अलावा विनय बिदरे 2014 में भारत सरकार के युवा व खेल मंत्रालय द्वारा चीन भेजे गये प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। वर्तमान में कर्नाटक, तेलगांना और आंध्र प्रदेश के क्षेत्रीय सहसंगठन मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।  विद्यार्थी परिषद् के 62 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में पुनर्निर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री विनय बिदरे से प्रवक्ता डॉट कॉम के लिए अजीत कुमार सिंह ने बात की, हर मुद्दे पर इन्होंने बेबाकी अपनी राय रखी। प्रस्तुत है बातचीत के अंश…

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के  राष्ट्रीय महामंत्री पुनर्निवाचित होने पर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

विद्यार्थी परिषद् ने मुझ जैसे समान्य कार्यकर्ता पर पुनः विश्वास कर महामंत्री का दायित्व सौंपा है, इसके लिए मैं परिषद् का आभारी हूं। विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन का महामंत्री के रूप में दायित्व निभाना गौरव की बात है। हांलाकि अभाविप के द्वारा कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने के लिए समय-समय पर नये दायित्व का दिये जाते हैं ताकि कार्यकर्ता का पूर्ण विकास हो। आने वाले समय में विद्यार्थी परिषद् के द्वारा बहुत से कार्य किये जाने हैं, 31 लाख सदस्यों के साथ समाज के समस्त युवा-वर्ग  में अपने विचारों को स्थापित करना है।

देश भर में हुए छात्रसंघ चुनाव में लगभग महाविद्यालय/विश्वविद्यालय में विद्यार्थी परिषद् की जीत हुई है, खासकर केरल, पूर्वोतर और जनजातिय बहुल झारखंड में..। इस पूरे परिदृश्य के बारे में आपकी  क्या राय है?

यह जीत विद्यार्थी परिषद् के प्रति छात्रों के समर्थन को दर्शाता है, अभाविप शुरू से ही परिसर में छात्रों की समस्या के समाधान लेकर संघर्ष करती रही है, उसी का परिणाम है कि आज पूरे देश में विद्यार्थी परिषद् की जीत हुई है। केरल में वामपंथ की सरकार है, इसके बावजूद वहां पर विद्यार्थी परिषद् की जीत हुई है। चाहे वो आईआईटी का कॉलेज हो, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय हो या कालीकट विश्वविद्यालय हर जगह पर अभाविप ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। झारखंड के इतिहास में पहली बार वहां के तीन विश्वविद्यालय में जनजाति छात्र, छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं, इससे ज्यादा गौरव की बात क्या हो सकती है। अगर पूर्वोत्तर की बात करें तो असम, त्रिपुरा, मणिपुर सहित अन्य सभी जगहों पर जहां-जहां छात्रसंघ चुनाव हुआ है, हर जगह पर विद्यार्थी परिषद् की जीत हुई है। यह जीत छात्रों के प्रति विद्यार्थी परिषद् के समर्पण को दर्शाता है।

पिछले वर्ष अभाविप के द्वारा  देश भर में सामाजिक अनुभूति कार्यक्रम चलाया गया, इस कार्यक्रम पीछे परिषद् का  क्या उद्देश्य है?

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के द्वारा बाबा साहेब भीम राव अंबेडर की 125 जयंती पर देश भर में सामाजिक अनुभूति कार्यक्रम चलाया गया,ताकि परिषद् के कार्यकर्ता अपने देश वास्तविक हालात को जान सके, उन्हें पता चले कि आज भी देश के लोंगो के बीच कितनी समस्याएं मौजूद है और वे कैसे अपना गुजर-बसर करते हैं। इस तरह के अनोखे कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भावना का विकास करना अभाविप का मूल उद्देश्य है। आने वाले तीन-चार सालों में अभाविप के द्वारा इस तरह के और कार्यक्रम चलाये जायेगें जिससे युवाओं में समाज के प्रति करूणा का भाव विकसित हो।

सामाजिक अनुभूति सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त समस्याओं की जानकारी मिली होगी, कोई ऐसी जानकारी जिससे आपका हृदय द्रवित हो गया हो?  

जब हमारे कार्यकर्ता राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में सर्वेक्षण के लिए गया तो पता चला कि वहां कि महिलाओं को दो-बाल्टी पानी लाने में ही पूरा दिन बीत जाता है। आजादी के इतने साल बाद भी वहां पर पानी की सुविधा नहीं है। इसी तरह देश के कई भागों में आज भी सामाजिक भेदभाव की जानकारी मिली,जो कि चिंता का विषय है। देश के कई भागों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

बीते साल में देश के कई शैक्षणिक संस्थानों में देश विरोधी कार्यक्रम आयोजित किये गये, यहां तक कि देशविरोधी नारे भी लगाये गये। उक्त घटना के बाद राष्ट्रवाद को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई, अभाविप के अनुसार राष्ट्रवाद का मूल स्वरूप क्या है? विस्तार से बतायें..।

बीते नौ फरवरी को देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जिस तरह के देश विरोधी नारे लगाये गए, यह भारतीय इतिहास के लिए काला दिन है। भारत की मिट्टी में पैदा हुए, यहां पे पले-बढ़े, यहां का अन्न खाते हैं, उनकी हर सांस में भारत की वायु प्रवाहित होती है और इस देश की बर्बादी के नारे लगाते हैं, देश के टुकड़े होने की बात करते हैं, कितना शर्म की बात है। हमारे देश के अंदर कुछ लोग हैं जो खाते तो हमारे देश के हैं और गुणगान की किसी और देश का करते हैं। खासकर, वामपंथी विचारधारा के लोग, ये वही लोग हैं जिन्होंने भारत-चीन युद्ध के समय चीन के समर्थन अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी। वामपंथ आजतक मानसिक रूप से इस देश से अपने-आप को जोड़ नहीं पाया। इन वामपंथियों का पोल खोलने के लिए आने वाले वर्षों में देश भर के शैक्षणिक संस्थानो बौद्धिक चर्चा का आयोजन  करने वाले हैं। इन वामपंथी, देशविरोधी तत्वों को देश से उखाड़ फेकनें के लिए विद्यार्थी परिषद् ने बीते साल में देश भर के छात्रों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। राष्ट्र के प्रति गौरव का भाव हो, राष्ट्र के प्रति प्रेम, लगाव,यहां की संस्कृति का सम्मान ही सच्चा राष्ट्रवाद है। राष्ट्रवाद पर बहस.. पूरी तरह से बकवास है। किसी भी देश के नागरिक को अपने देश के प्रति श्रद्धा होना, बहस का विषय हो सकता है क्या..?

आपके अनुसार नोटबंदी से आर्थिक भ्रष्टाचार में कितनी कमी आयेगी?

अभाविप हमेशा से ही भ्रष्टाचार के विरूद्ध रहा है। चाहे वो आर्थिक भ्रष्टाचार और या राजनीतिक…हर मुद्दे पर अभाविप की स्पष्ट राय है कि भ्रष्टाचार को यह देश कभी सहन नहीं करेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ परिषद् के द्वारा पहले भी ‘यूथ अंगेंस्ट क्रप्शन’ अभियान चलाया जा चुका है। 2003 में ही हमने सरकार से बड़े नोटो के प्रचलन पर रोक की मांग  की थी। सरकार के द्वारा 500 और 1000  के नोटों पर प्रतिबंध लगाने से देश की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आयेगी। कालाधन देश की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रही है, नोटबंदी कालाधन को रोकने की दिशा में बड़ा कदम है।

नई शिक्षा नीति आने वाली है, इसमें परिषद् किस प्रकार की बदलाव चाहती हैं?

सरकार नई शिक्षा नीति लाने वाली है, विद्यार्थी परिषद् सरकार से यह मांग  करती है कि वो एक ऐसी शिक्षा नीति को लेकर आये जो सस्ती, सुलभ तथा रोजगार के साथ-साथ युवाओं में चरित्र का निर्माण करे। शिक्षा के व्यापारीकरण को रोका जाय। 30 सालों बाद किसी सरकार के द्वारा शिक्षा में सुधार की बात की गई है तो स्पष्ट है कि देश की शिक्षा को लेकर सरकार में कहीं न कहीं चिंता है। बीते दिनों अभाविप का एक शिष्टमंडल केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री से मिलकर अपनी मांगों से उन्हें अवगत करा दिया था।

 

 

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