लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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modi ji
मोदी की हर काम में दिखता है भारत
सुरेश हिन्दुस्थानी
विजयादशमी के पावन अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी को फिर से जिंदा कर दिया। मोदी की वाणी में एक संचेतना है, एक स्पंदन है, जो देश की हर धड़कन की जानकारी रखती है। मोदी के बोलने से ऐसा लगता है कि यह वास्तव में भारत के प्रधानमंत्री की आवाज है, इसके पीछे का कारण यही है कि मोदी भारत के आम आदमी की भाषा बोलते हैं। इससे पहले के प्रधानमंत्री विशेषकर कांग्रेस के प्रधानमंत्री ने हमेशा ही अंग्रेजी भाषा को प्रधानता प्रदान करते हुए अपने भाषण दिये। हम जानते हैं कि भारत का मजदूर वर्ग या निरक्षर व्यक्ति मात्र इसी कारण से सरकार की योजनाओं से वंचित रह जाता था। वर्तमान में नरेंद्र मोदी के कार्य में एक दिशा का बोध है, भारत को उच्चतम शिखर पर ले जाने का एक सपना स्पष्ट परिलक्षित होता दिखाई देने लगा है। हम जानते हैं कि भारत के अंतिम छोर पर रहने वाले आम व्यक्ति से सरोकार स्थापित रखने वाले दूरदर्शन और आकाशवाणी को प्रधानमंत्री मोदी ने जो सार्थकता प्रदान की है, वह विदेशी धारा से अनुप्राणित अन्य चैनलों के लिए एक संदेश है।
कहा जाता है कि सच्चा भारत गांवों में निवास करता है, गाँव ही भारत की आत्मा है, गाँव का विकास ही भारत के जीवन का आधार है। अगर आत्मा का चैतन्य स्वरूप प्रदूषित हो गया तो समझो भारत की मूल आत्मा ही समाप्त हो गई। आधुनिकता के नाम पर हमारे देश में जिस प्रकार से पश्चिम का अंधानुकरण किया जा रहा है, उससे हम उस भारत को विनाश के कगार पर ले जाने का स्वयं ही रास्ता तैयार कर रहे हैं। जो भारत कभी विश्व का मार्गदर्शन करता था उस भारत के अंदर आज भी विश्व को दिशा प्रदान करने वाला ज्ञान है, आवश्यकता है उसे पहचानने की। संभवतः प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को समझा है शायद इसीलिए ही उन्होने भारत की आत्मा से आकाशवाणी के माध्यम से बात की है। मोदी की वाणी इतनी सहज है कि वह सीधे गले तक उतरती है, क्योंकि वह अत्यंत सरलता से अपनी बात कहते हैं, कोई राजनीति नहीं, कोई लागलपेट नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी के माध्यम से देश में अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति से सीधे बात की है, हालांकि इससे पहले भी सरकारों के माध्यम से ऐसे प्रयास किए गए लेकिन उनके संदेश इतने गहरे तक कभी भी नहीं गए। इस कारण सरकार की सोच और योजनाओं का व्यापक परिणाम देश में दिखाई नहीं दिया। हर व्यक्ति अपने शहर के हर कार्य के लिए शासन और प्रशासन की ओर ताकता रहता था, जनता द्वारा फैलाई गई गंदगी के लिए भी हम सरकार और स्थानीय प्रशासन को ही दोषी ठहरा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। वास्तव में यह एक ऐसा संकुचित सोच है जिससे देश में राष्ट्रीय भाव समाप्त सा होता जा रहा है। प्राधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की परिणति क्या होगी यह तो हम नहीं कह सकते, लेकिन इसके पीछे जो निहितार्थ हैं वह सच में ही देश को आगे ले जाने का का सामर्थ्य पैदा करते हैं। स्वच्छ भारत अभियान से देश भर में यह संदेश तो गया ही है कि हर व्यक्ति इस बात का अनुभाव करे कि यह देश मेरा अपना है, केवल सरकार का नहीं, इसके अलावा देश के लिए छोटे बड़े सभी व्यक्तियों को काम करना चाहिए। कहते हैं कि देश हमें जीवन जीने की आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करता है, यहाँ तक कि हम भोजन पानी भी इसी भूमि से प्राप्त करते है, तब हमारा भी कर्तव्य बन जाता है कि हम भी देश के लिए कुछ करें। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से चाहे कुछ मिला या नहीं परंतु हर व्यक्ति के अंदर देश भाव का प्रकटीकरण हुआ है। जो आज के समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात विजयादशमी के दिन कही है, भारत में यह सबसे बड़ा त्यौहार है, कहते हैं विजयादशमी पर जो भी कार्य किए जाते हैं, वह सफल ही होते हैं। शायद प्रधानमंत्री ने इसीलिए ही अपने मन की बात कहने लिए इस दिन को चुना। मोदी ने विश्व गुरू भारत को जिस प्रकार से जगाने की कोशिश की है, उससे तो यही लगता है कि भारत आने वाले दिनों में उसी परम शिखर को प्राप्त करेगा, जो भारत के सांस्कृतिक इतिहास में दिखाई देता है। आज हमारा देश उस हनुमान की तरह दिखाई दे रहा है जिसे अपनी शक्ति का आभास नहीं था, लेकिन इतना तय है आज उस शक्ति को जगाने के लिए कोई जामबंत नहीं आयेगा। मोदी का संदेश है कि प्रत्येक भारतवासी को अपनी शक्ति को खुद ही जगाना है। सरकारें तो केवल पहल ही कर सकतीं हैं, उस पहल को अभियान का रूप देना तो जनता का कम है। जिस दिन भारत की जनता जागने का प्रयास भर आरंभ कर देगी, उस दिन से भारत का भाग्योदय होना शुरू हो जाएगा। और हमारा भारत देश उसी परम पद को प्राप्त करेगा जिसका वह वास्तविक हकदार है।
कहते हैं कि काम तो सभी करते हैं, बिना काम के कोई नहीं रहता, काम छोटा या बड़ा भी नहीं होता। लेकिन लीक पर चलते हुए काम करना केवल जीवन यापन करने के समान है, काम वहीं होता है जिससे प्रेरणा मिले, इसीलिए कुछ व्यक्ति उसी काम को कुछ अलग ढंग से करते हैं, यह अलग ढंग ही प्रेरक का काम करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यही किया है, उसी काम को अलग ढंग से करने की कोशिश की है। हम जानते हैं कि सरकार के मुखियाओं की विदेश यात्रा पहले भी होती रहीं हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं में जिस प्रकार का भारत दिखाई दिया, उसने उत्प्रेरण का कार्य किया और समस्त विश्व के सामने हमारा देश शक्ति एवं सामर्थ्य के साथ प्रस्तुत हुआ। पूर्व की सरकारों के मुखियाओं के लिए विदेश यात्राएं उनके और उनके परिवार के लिए विदेश घूमने का माध्यम भर हुआ करतीं थीं। लेकिन नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं में वास्तव में भारत ‘जाता’ था।

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