लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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Donald-Trump-4अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप हैं। ट्रंप अपने दो-टूक और सपाट बयानों के लिए कुख्यात हो चुके हैं। अपने ताजा भाषण में उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अर्ध-अराजक राज्य है। उसमें अव्यवस्था है। वहां सरकार का पूरा नियंत्रण नहीं है। उसके पास जो परमाणु हथियार हैं, वे असली समस्या हैं। इस समस्या को हल करने में भारत की मदद जरुरी हो सकती है।

जब ट्रंप से पूछा गया कि यदि पाकिस्तान में पूर्ण अराजकता हो गई तो क्या वे वहां अमेरिकी फौजें भेजेंगे? उन्होंने कहा मैं अपनी रणनीति अभी से क्यों सबको बताऊं। दुश्मन को अंदाज लगाने दूंगा। इसका मतलब यह नहीं, ट्रंप ने कहा, कि मैं पाकिस्तान के बारे में अनजान हूं। मुझे उसके बारे में उतना ही पता है, जितना दूसरों को है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंध काफी अच्छे हैं। अमेरिका उसे आर्थिक सहायता देता रहा है और देता रहेगा। उसकी सहायता बंद करना तो बहुत ही बुरा होगा। हालांकि अमेरिका को पाकिस्तान ठगता रहा है। दोहरी चाल चलता रहा है।

इसमें शक नहीं कि ट्रंप ने जिस परमाणु खतरे की तरफ इशारा किया है, वह है जरुर लेकिन ट्रंप ने जिन शब्दों में उसका वर्णन किया है और उसका समाधान सुझाया है, उसे देखकर आप बहुत आसानी से डेविड ट्रंप को अमेरिका का राहुल गांधी कह सकते हैं। हमारे राहुल गांधी को भारतीय विदेश नीति की बारीकियों की जितनी समझ है, उससे भी कम समझ डेविड ट्रंप को अमेरिकी विदेश नीति की है। पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रों पर ही नहीं, पश्चिम एशिया, आईएसआईएस, विदेशी कर्मचारियों, अमेरिका के विदेश व्यापार, विदेशों में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति, विदेशी सहायता, संयुक्त राष्ट्र संघ, उत्तरी कोरिया, चीन, रुस, यूरोप आदि के बारे में भी ट्रंप परस्पर विरोधी बातें बोलते रहे हैं और अपना अनाड़ीपन उजागर करते रहे हैं।

परमाणु खतरे के बावजूद उन्होंने पाकिस्तान को मदद देते रहने की बात कही है लेकिन कुछ दिन पहले एक भेंटवार्ता में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान उत्तरी कोरिया की तरह है। जब तक वह अपने परमाणु हथियार खत्म न करे, उसकी मदद बंद कर देनी चाहिए। ट्रंप को उनके जरखरीद सलाहकार जो भी भाषण लिखकर दे देते हैं, उसे वे टेलीप्राम्पटर पर पढ़कर सुना देते हैं। जब वे खुद बोलते हैं तो उनकी अंग्रेजी माशाअल्लाह होती है। उसका सिर पैर जोड़ना भी मुश्किल हो जाता है। इसीलिए ट्रंप की किसी बात से बहुत गद्गद् हो जाना ठीक नहीं है।

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