लेखक परिचय

डॉ. राजेश कपूर

डॉ. राजेश कपूर

लेखक पारम्‍परिक चिकित्‍सक हैं और समसामयिक मुद्दों पर टिप्‍पणी करते रहते हैं। अनेक असाध्य रोगों के सरल स्वदेशी समाधान, अनेक जड़ी-बूटियों पर शोध और प्रयोग, प्रान्त व राष्ट्रिय स्तर पर पत्र पठन-प्रकाशन व वार्ताएं (आयुर्वेद और जैविक खेती), आपात काल में नौ मास की जेल यात्रा, 'गवाक्ष भारती' मासिक का सम्पादन-प्रकाशन, आजकल स्वाध्याय व लेखनएवं चिकित्सालय का संचालन. रूचि के विशेष विषय: पारंपरिक चिकित्सा, जैविक खेती, हमारा सही गौरवशाली अतीत, भारत विरोधी छद्म आक्रमण.

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feverअनुभव के मोती
जुकाम और फ्लू के कारण लगभग सभी को कभी न कभी परेशानि भुगतनी पड़ती है. कहा जाता है की इन्हें ठीक होने में ५-७ दिन तो लग ही जाते हैं. पर देसी उपायों से केवल एक दिन में भी इनसे छुटकारा पाया जा सकता है.

  •  जुकाम कोने पर दही को फेंट कर उसे देसी घी में तड़क लें. जीरा, काली मिर्च, नमक, हल्दी, , प्याज, लहसुन, मोटी इलायची आदि दाल कर इसे गर्म करके या पका करके उतार लें. अब इसे पी कर सो जाएँ. आप २-४ घंटे में ठीक हो जायेंगे. १-२ दिन खान-पान में परहेज रखें. ठंडा पानी भी न पीयें.
  •  दूसरा यह प्रयोग है कि शुद्ध घी में आटे व बेसन की लपसी ( मीठा- पतला हलवा जैसा ) बना कर पीए और सो जाए. इसमें बादाम, छुहारे आदि डाल सकते हैं. इससे भी एक बार में ही ठीक हो जाते हैं. एक समय में पर ऊपर के दोनों में से केवल एक ही प्रयोग करें. जरुरत हो तो किसी एक ही प्रयोग को दोहरा सकते हैं.
  • पर ध्यान रखने की बात यह है कि यदि फ्लू में इस प्रयोग को करेंगे तो रोग बहुत अधिक बढ जाएगा. पिछले कल मेरी पत्नी नें फ्लू को जुकाम समझ कर लपसी पी ली. रोग और अधिक बढ गया. तब उसे बीज निकाल कर ४-५ मुनक्का और २ कली लहसुन के गुनगुने पानी के साथ दिए. प्रातः तक वह स्वस्थ होकर रसोई संभालने लगी, जबकि हमें लग रहा था कि वह ३ दिन तो बिस्तर से न उठ सकेगी.
  • बस एक दिन परहेज और करना पडा. बस चिकनाई और ठंडा पानी नहीं दिया.
  • फ्लू के इलावा न्युमुनिया में भी इस लहसुन-मुनक्का के प्रयोग को तुरंत आजमाना चाहिए. लाभ होने के बाद दिन भर में २-३ बार कम मात्रा में दें.
  • फ्लू में शरीर में खूब दर्दें होती हैं और शरीर बहुत ठंडा होने लगता है. बाद में काफी ज्वर हो जाता है. अतः जब शरीर ठंडा होने लगे, टूटन अधिक हो, ज्वर हो तो दही या लपसी का प्रयोग करने की भूल न करें. हाँ, दोनों रोगों में अमृतधारा की १-२ बूंदें दिन में ३-४ बार चीनी या पानी में देते रहें.

-डा. राजेश कपूर.

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22 Comments on "स्वास्थ्य : अनुभव के मोती"

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अनिरूद्ध कुमार यादव
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अनिरूद्ध कुमार यादव

परम आदरणीय डा०कपूर जी नमस्ते आप की दी हुई जानकांरी बहुत गुणकारी लगी आशा करता हु आगे भी मार्ग दर्सन करते रहेगे # वन्दे मातरम्

ashokgautam
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kapoor ji! namskar!
desh ke jukham ka ilaaz bhi batain.jayda biger gaya too?

डॉ. राजेश कपूर
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गौतम जी आपकी चिंता उचित है, वैसे देश के जुकाम के और बिगड़ने को और बचा क्या है, निकृष्टतम हालत तो बन चुके हैं, इससे अधिक और क्या होगा, लुटेरे और जघन्य अपराधी संविधान के रखवाले बने बैठे हैं. अब तो एक ही आशा की किरण बची नज़र आती है ”नमो-नमो” वक्त ही बतलायेगा की ये किरण सूरज बन कर कब उगती है, कसौटी पर कितनी खरी उतरती है.

अशोक
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डा. राजेश कपूर जी–बहुत बहुत धन्यवाद.
सविनय अनुरोध त्रिफला का प्रयोग भी जरूर बताये | धन्यवाद |

डॉ. राजेश कपूर
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आपके अनुरोध के अनुसार इस प्रयोग का वर्णन २० अक्टूबर को यात्रा से लौट कर कर सकूंगा,,आशा है बुरा नहीं मानेंगे.

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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डॉ. राजेश कपूर जी आपने बहुत ही उपयोगी जानकारी प्रस्तुत की है! सबसे महत्व की बात ये है कि इन दिनों एलोपैथिक दवाओं के उपयोग ने जुकाम, फ्ल्यू, न्यूमोनिया जैसी तकलीफों को लोगों के लिए मुसीबत बना दिया है। ऐसे में इस प्रकार की जानकारी समाज के लिए बहु-उपयोगी है! मेरा उन सभी महानुभावों से निवेदन है, जो परम्परागत चिकित्सा के बारे में व्यावहारिक ज्ञान रखते हैं, कृपया वे सभी अंतरजाल के मार्फ़त अपने अनुभवों को बाँटने का कष्ट करें। ये सच्ची समाज सेवा होगी।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

डॉ. राजेश कपूर
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डा. मीणा जी इस इस प्रोत्साहन और सुझाव हेतु धन्यवाद. हमारे वनवासियों के पास ऐसी बहुत सी मूल्यवान जानकारी है. उसे भी प्रकाश में लाने के प्रयास होने चाहियें. एक बड़ी समस्या यह है की सरकारी स्तर पर इस पारंपरिक ज्ञान और इसके ज्ञाताओं को निर्मूल करने के क्रमिक और योजनाबद्ध प्रयास अंग्रेजों के समय से ही चल रहे हैं. उनके जाने के बाद भी भारत की सरकार उन्ही घातक नीतियों को बढ़ावा दे रही है. तभी तो एलोपैथी के लिए 93% बजट और शेष सभी (यूनानी, सिद्धा, आयुर्वेद, होम्योपैथी) के लिए केवल ७% बजट. झोलाछाप कह कर हमारे गुनियों… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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फ्लू और जुकाम के लिए एक और उत्तम प्रयोग है. अमृतधारा की २-२ बूंदें दिन में ३-४ बार आधा चम्मच चीनी / शक्कर में या २-४ चम्मच पानी में लें. तुरंत लाभ होगा. अमृतधारा को रुमाल पर लगा कर सूंघते भी रहें. परिणाम देख कर आप हैरान और प्रसन्न हो जायेंगे. परहेज़ / सावधानियां उपरोक्त लेख में दिए अनुसार रखें.

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