लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under व्यंग्य, साहित्‍य.


डॉ वेद व्यथित rahul
बच्चा जब थोड़ा सा बड़ा होने लगता है तो उस की माँ उसे स्कूल जाने से पहले थोड़ा सा अंग्रेज बनाने की तैयारी शुरू कर देती है। वह भारत के तथाकथित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की अपेक्षा के अनुसार ‘पार्ट ऑफ़ बॉडी ‘,फाइव फ्रूटस नेम आदि रटवाना शुरू कर देती है। फिर वह स्कूल जाने लगता है तो उसे इन के आलावा कुछ और भी सीखा दिया जाता है जैसे ‘व्हाट इस योर नेम ‘व्हाट इस योर फादर नेम आदि आदि।
इस के बाद उन के घर में कोई भी परिचित आता है तो उस के माँ बाप तुरंत बच्चों से व्हाट इस योर नेम व्हाट इस योर फादर नेम आदि मशीन की भांति सुनवाने लगते हैं पर कोई कोई मेहमान भी विपक्षी होते हाँ। बच्चा अभी गिनती ही सिख रहा होता है परन्तु वे उसे पहाड़े यानि टेबल सुनाने को कहने लगते हैं। तब उस की माँ को भी उस के पक्ष में आना पड़ता है कि अजी अभी तो यह नर्सरी में ही तो है।
इसे पहाड़े अभी याद नही करवाये गए हैं अभी तो इसे बस सूट बूट का प्रस्ताव ही तो रटवाया है। पर अभी तो इसे सूट बूट का प्रस्ताव भी पक्का याद नही है। इसे भी यह बीच बीच में भूल जाता है कभी तो यह सूट की कीमत दस लाख बता देता है और कभी पंद्रह लाख बताने लगता है। मास्टर जी ने भी इसे कई बार समझाया है कि गाय के प्रस्ताव में जैसे दो ही सींग लिखने होते हैं यदि तुम उस में गे के तीन सींग लिखोगे तो फेल हो जाओगे इसी तरह सूट बूट वाले प्रस्ताव में भी एक ही कीमत हर बार बताया करो। यदि हर बार अलग बताओगे तो लोग तुम्हारी हंंसी उड़ाएंगे परन्तु इस से बालक पर कोई असर नही पड़ा क्योंकि अभी तो वह बालक ही है और कोई ज्यादा हंसी उड़ाएगा तो अभी तो उस की माँ भी उस की हिमायत लेगी ही। वह आप से नाराज हो जाएगी और बोलेगी ‘ये लोघ बच्छे का हंसाई फ्लाई करते है। ये बहूत खरब आमदी है। ‘
अब इस के मास्टर जी से शिकयत हुई कि मास्टर जी बालक तो बिलकुल नही पढ़ रहा है बस सूट बूट की क्लास से आगे ही नही बढ़ रहा है। भला हम कब तक इसे सूट बूट वाली क्लास में ही बैठाये रहेंगे। इसे कुछ और भी तो रटवाइये। अब मास्टर जी ने सर खुजलाया और कोई नया आसान सा विषय सोचा जिस का प्रस्ताव इस बालक को आसानी से याद कर के बेधड़क हो कर जनता के सामने सुना दे।
इस के लिए मास्टर जी ने खेड़ी बड़ी को चुना कि यह सब से आसान विषय है इस में तो ज्यादा पढ़ाई लिखे की जरूरत नही पड़ेगी और भारत तो कृषि प्रधान देश भी है जिसे हम बरसों से किताबों में रटते आये हैं। परन्तु इस के लिए तो अब और भी मुसीबत खड़ी हो गई क्योंकि किसान की जमीन तो सब से कीमती होती है। परन्तु इस बालक को तो यह बात पता नही कब से समझाई जा रही है। इतना ही नही इस के तो खानदान में भी बरसों से हर रोज कीमती जमीन की चर्चा भी होती है परन्तु इस ने तो यह प्रस्ताव भी कभी ठीक से याद नही किया है पर हाँ इस की बड़ी बहन और जीजा जी बड़े हुशियार निकले उन्होंने इस प्रस्ताव को खूब रहा खूब लिखा और खूब ही समझा भी परन्तु बालक तो इस में भी फिस्सडी निकला बेशक बाप के नाम की कीमती जमीन पर भी इस के कारण मुसीबतें आने लगीं।
परन्तु मास्टर नही माने और उन्होंने इसे कीमती जमीन का प्रस्ताव रटवाना शुरू कर दिया परन्तु पड़ोसियों के बच्चे इस से ज्यादा तेज निकले उन्होंने अपने बच्चों को खूब अच्छी तरह जमीन का प्रस्ताव याद कर लिया और जब भी यह बालक जमीन का प्रस्ताव सुनना शुरू करता वे इस के घर ही जा कर इसे जोर जोर से कीमती जमीन का प्रस्ताव सुनना शुरू कर देते और इस बेचारे को चुप करवा देता वे जोर जोर से सुनते कि किसान की हड़पी गई कीमती जमीन की जांच होनी चाहिए और जिन्होंने यह जमीन हड़प ली है उन्हें जेल होनी चाहिए और किसानों को उन के द्वारा लूटी गई जमीन वापिस मिलनी चाहिए।
अब इस बालक की माँ को फिर से सोचना पड़ा कि यह तो इस प्रस्ताव में भी फेल हो गया मास्टर जी कुछ तो करो . मास्टर जी ने इसे फिर से नया प्रस्ताव रटवाना शुरू किया जिस का विषय था – काला धन परन्तु इस में बड़ा हिसाब लगाना था और कहीं यह बुद्धू अपने ही काले धन का बखान शुरू न कर दे इस दर से भी इस प्रस्ताव पर अधिक जोर नही दिया गया और इस का मन भी इस प्रस्ताव को रटने में नही लगा। परन्तु जब भी कोई इस से कुछ सुनने के लिए कहता है तो यह तुरंत सूटबूट वाला प्रस्ताव ही सुनाने लगता है बेशक इसे भी यह बीच बसिह में थोड़ा भूल जाता है। कभी सूट की कीमत दस लाख बता देता है और कभी पंद्रह लाख बता देता है। परन्तु वास्तव में तो उस की कीमत तपस्वी व्यक्ति द्वारा पहनने से करोड़ों हो गई और करोड़ों में बिक भी गया।
परन्तु इस का क्या करें अब तो इस के सगे संबंधियों को भी पता चल गया है कि यह तो हमेशा एक ही परसत्व सुनाता है। अब मास्टर जी भी चिंता में पड गए कि इसे और कौन सा नया प्रस्ताव सिखाएं क्योंकि इसे कुछ बी नया सिखाएंगे तो यह तो उस की भी भद्द पिटवाएगा।
इस लिए अब इसे और नए प्रस्ताव रटवाने के बजाय इस की पढ़ाई ही छुड़वा दी जाये और पढ़ाई छुड़वा कर इस की शादी ही करवा दी जाये। परन्तु माँ तो अपने बछड़े के दांत जानती है और मास्टर जी को भी पता है की यह कितने पानी में है कि यदि शादी के बाद लड़की ने इसे घर गृहस्थी पर प्रस्ताव सुनाने को कह दिया और यह बीच में उसे भी भूल गया तो बड़ी बेइज्जती होगी क्योंकि यह कहेगा कि मुझे तो देहली का ही पता है तुम यमुना क्यों पूछ रही हो यमुना में क्या डूबना है देखो मुझे सूट बूट का प्रस्ताव याद है जो मुझे मुश्किल से याद हुआ है बस वह ही सुन लो प्लीज।
डॉ वेद व्यथित

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz