लेखक परिचय

शैलेन्‍द्र कुमार

शैलेन्‍द्र कुमार

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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आजकल स्वामी रामदेव देशभर में चर्चा का विषय बने हुए है। जहाँ कई साईंटे ऐसी है जो इस विषय पर स्वामी रामदेव कि आलोचना में कई लेख निकाल चुकी है, वही कुछ साईंटे ऐसी भी है जिन्होंने उनके पक्ष में भी लेख प्रकाशित किये है। विश्व में कोई भी व्यक्तित्व शत प्रतिशत स्वीकार्य नहीं है विरोध किसी भी कार्य का पहला चरण है, जिन विशिष्ट व्यक्तियों का मैंने नीचे जिक्र किया है उन सभी का प्यार और समर�¥ �थन स्वामी रामदेव को हासिल है, हालाँकि ये सूची काफी लम्बी है लेकिन हो सकता है कुछ लोगो को ये भी छोटी लगे, मैं कुछ सम्मानित व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम देना चाहता हूँ जैसे योगपितामह श्री बी के एस अयंगर जी, श्री श्री रविशंकर, सद्गुरु जग्गी वासुदेव, महामंडलेश्वर श्री सत्यमित्रानंद जी,महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंद गिरिजी, श्री रमेश भाई ओझा जी, सुधांशु जी महाराज, श्री शंकराचार्य जी à ��ांची काम कोटि पीठ, प्रणव पंड्या गायत्री परिवार, ब्रह्माकुमारी, किरण बेदी, अन्ना हजारे, गोविन्दाचार्य, अग्निवेश, राम जेठमलानी, कल्बे जव्वाद, अरविन्द केजरीवाल, विश्वबंधु गुप्ता, कुप श्री सुदर्शन, मोहन भागवत, स्वामी चिदानंद मुनि जी महाराज, सुब्रमण्यम स्वामी, वेद प्रताप वैदिक, आर्क बिशप विन्सेंट कांसेसो, महमूद ए मदनी, जे ऍम लिंगदोह, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, मुफ्ती शमूम काजमी, मल्लà ��का साराभाई, अरुण भाटिया, सुनीता गोदरा, आल इंडिया बैंक इम्प्लायिस फेडरेशन और सबसे बढ़कर अखिल भारतीय अखाडा परिषद् और न जाने कितने और लोग और संस्थाए, अब अगर उनके आलोचकों को ये भी काम लगता है तो कुछ और लोगो के नाम भी मैं उपलब्ध करा सकता हूँ। अगर ये आलोचक इन लोगो से भी ज्यादा विद्वान और समझदार है, तो कृपया अपना नाम और पता बताये सबसे पहले तो उनके चरण ही छुने चाहिए अगर नहीं तो इन लोगो के वात ्सल्य का कारण जानना चाहिए कि क्यों स्वामी रामदेव इन्हें इतने प्रिय है।

आलोचकों की केवल तीन शंकाए है जो जानकारी के अभाव के कारण है।

पहली – स्वामी रामदेव की संपत्ति घोषित नहीं है और उनकी बहुत सारी संपत्ति विदेशों में भी है।

उत्तर – स्वामी रामदेव के नाम कोई भी संपत्ति या बैंक अकाउंट नहीं है जो भी है वो ट्रस्ट का है जो पूर्णतः घोषित है, और सरकार द्वारा इसका प्रतिवर्ष आडिट भी किया जाता है। इसके लिए आप पतंजलि योगपीठ से पत्राचार कर सकते है और २५ मार्च को तमाम टी वी चैनलों पर भी उन्होंने इसकी घोषणा कर दी थी। जहाँ तक विदेशो में संपत्ति का सवाल है ये गोपनीय नहीं है जो भी व्यक्ति प्रातः ५ से साढ़े ७ तक आस्था चै�¤ �ल देखता है। वो इस बात को जानता है और ये भी जानता है कि स्वामी जी को ये संपत्ति किसने और कब दान में दी और इसका भारत के कर एवं कानून व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है। ये उन देशो में वहा के भक्तो द्वारा दिया गया दान है जिसे उन देशो कि सरकारों द्वारा ही देखा जाना है अगर भारत सरकार को इसमे कोई शंका है तो वो उन सभी देशो के नाम जानती है आवश्यक कार्यवाही कर सकती है।

दूसरी – स्वामी रामदेव कोई बड़े विद्वान व्यक्ति नहीं है और योग के कोई खास जानकर नहीं है वो आम साधारण लोगो को बहका कर उन्हें लूट रहे है।

उत्तर – स्वामी रामदेव हमेशा इस बात को स्वीकार करते है कि वो कोई विद्वान व्यक्ति नहीं है बल्कि गाँव के किसान के घर पैदा हुए कम पढ़े लिखे व्यक्ति है और मोटी बात समझते है और मोटी बात ही बोलते है। योग और आयुर्वेद पर भी उनका ज्ञान वृहद् नहीं है लेकिन जो बोलते है वो तथ्यात्मक है और तार्किक एवं वैज्ञानिक भी वो एम्स, दिल्ली में भी एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में व्याख्यान दे चुके है(ऐसे सेà ��िनारों के सूची बहुत लम्बी है उन्हें यहाँ दे पाना संभव नहीं है) और सबसे बड़ी बात देश के मूर्धन्य योगगुरुओं का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है, जिनका जिक्र लेख में ऊपर किया जा चुका है। जहा तक आम साधारण लोगो को बहका कर उन्हें लूटने कि बात है तो ऊपर दी गयी विद्वानों सूची से ये जाना जा सकता है कि बहकने वाले केवल आम साधारण लोग नहीं है वो बार बार कहते है कि मुझे समर्थ लोगो से ज्यादा से ज्यादा द ान कि आवश्यकता है जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोगो का भला किया जा सके जैसे पतंजलि योगपीठ के देश में ७०० से भी ज्यादा चिकित्सालय है जहाँ निशुल्क चिकित्सीय परामर्श प्राप्त किया जा सकता है और ८०० से ज्यादा आरोग्य केंद्र है जहाँ से रोगी शुद्ध दवाए और अन्य उत्पाद बाज़ार से कम मूल्य पर खरीद सकता है ( ये याद रक्खे कि आयुर्वेद कि ज्यादातर दवाएं दुर्लभ जड़ी बूटियों से बनती है जिनका उत्पादन �¤ �हुत कम है स्वामी रामदेव के प्रयासों से इस क्षेत्र में किसानों के लिए सम्भावनाये बढ़ी है जिससे भविष्य में आयुर्वेदिक दवाओं के दाम कम हो सकते है और नए रोजगार सृजित हो सकते है )। हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में स्थित संत रविदास लंगर में रोज ५ हज़ार लोगो को निशुल्क भोजन कराया जाता है। हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में ४०० कमरों कि निशुल्क आवास व्यवस्था (महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला) भी कि गयी है। योग पर वैज्ञानिक परीक्षण करने के लिए और आधुनिक चिकित्सीय विज्ञान में मान्यता दिलाने के लिए उस पर शोध कि आवश्यकता है जिसके लिए धन कि जरूरत है। पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट दो अलग अलग ट्रस्ट है और इनमे दिये जाने वाले दान का प्रयोग भी अलग अलग क्षेत्र में होता है।

तीसरी – स्वामी रामदेव की राजनीतिक महत्वाकांक्षा है ।

उत्तर – इसका जवाब समय ही दे सकता है फिलहाल उनके राजनीतिक हस्तक्षेप से जनता को उम्मीदे है वो पहले भी कह चुके है कि वो सन्यासी है और सन्यासी ही रहेंगे वो कोई राजनीतिक पद नहीं लेंगे लेकिन शीर्ष राजनीतिक पदों पर योग्य लोगो को ही बैठने देंगे अगर आजका राजनीतिक नेतृत्व चाहे वो किसी भी पार्टी का हो उनकी ९ सूत्रीय मांगो को पूरा करता है या पूरा करने का वचन देता है तो वो उसका समर्थन करेंगे और अपनी तरफ से कोई राजनीतिक विकल्प नहीं खड़ा करेंगे, अगर किसी राजनीतिक दल को उनकी मांगे गलत लगती है तो उनसे संवाद कर सकता है वो अपने घोषणापत्र में बदलाव करने को तैयार है। जहाँ आज देश के नामी वकील (सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, वीरप्पा मोइली, हंसराज भरद्वाज, मनीष तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी, रविशंकर प्रसाद, जयंती नटराजन………) और किसान (मुलायम सिंह, चौधरी अजित सिंह, ओमप्रकाश चौटाला , भूपिà ��दर सिंह हुड्डा…………) और ग्वाले (लालू प्रसाद……………….) और शिक्षक (मायावती…………..) और अभिनेता (हेमामालिनी, गोविंदा, राजबब्बर, जयाप्रदा, शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना………..) और कुछ राष्ट्र द्रोही(महबूबा मुफ्ती, सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाईज उमर फारूख…………..) और कुछ धार्मिक नेता और संत ( स्वामी चिन्मयानन्द, सतपाल महाराज, योगी आदित्यनाथ, उमा भारती……………) औà �° खिलाडी( अज़हरुद्दीन, कीर्ति आज़ाद, नवजोत सिद्धू……………….) और पत्रकार (कुलदीप नय्यर, बलबीर पुंज, चन्दन मित्रा, राजीव शुक्ला………..) और अपराधी( मुख़्तार अंसारी, शहाबुद्दीन, धनञ्जय सिंह, अरुण गवली ………….) तमाम डॉक्टर, इंजीनियर, रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड जज इन सभी के पेशे पर कोई सवाल नहीं ये सभी नेता बन सकते है चुनाव लड़ सकते है लेकिन अगर स्वामी रामदेव इनके चरित्र पर सव�¤ �ल उठाते है और साथ ही ये वचन भी देते है कि वो कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे उस पर न जाने कितने सवाल ।

स्वामी रामदेव के भारत स्वाभिमान संगठन के ९ उद्देश्य उल्लिखित है –

१. स्वदेशी चिकित्सा व्यवस्था

२. स्वदेशी शिक्षा व्यवस्था

३. स्वदेशी अर्थ व्यवस्था

४. स्वदेशी कानून एवं कर व्यवस्था

५. भारतीय संस्कृति की रक्षा

६. भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी, महगाई, एवं भूखमुक्त वैभवशाली भारत का निर्माण

७. ग्रामीण स्वावलंबन

८. पर्यावरण की रक्षा एवं स्वच्क्षता

९. नियंत्रित जनसँख्या

इन उद्देश्यों को पूरा करने के कुछ उपाय देश की कुछ सम्मानित हस्तियों और विशेषज्ञों द्वारा सुझाया गया है ये आन्दोलन इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जा रहा है देश के सभी सम्मानित नागरिको से अनुरोध है कि वो सभी भारत स्वाभिमान कार्यक्रम के निम्नलिखित संगठनों में से किसी में भी शामिल होकर इस आन्दोलन को समर्थन दे, अगर कोई शंका हो तो पहले उसका पुर्णतः निराकरण करे आज देश को आपकी जरूरत है ।

भारत स्वाभिमान कार्यक्रम के संगठन –

* युवा संग़ठन

* शिक्षक संग़ठन

* चिकित्सक संग़ठन

* वित्तीय व्यवसायी संग़ठन

* अधिवक्ता एवं पूर्व न्यायधीशों का न्यायविद् संग़ठन

* किसान संग़ठन

* उद्योग एवं वाणिज्य संग़ठन

* पूर्व – सैनिक संग़ठन

* कर्मचारी संग़ठन

* अधिकारी संग़ठन

* विज्ञान एवं तकनीकी संग़ठन

* कला-संस्कृति संग़ठन

* मीडिया संग़ठन

* वरिष्ठ नागरिक संग़ठन

जय हिंद, जय भारत।

 

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23 Comments on "स्वामी रामदेव- तीन भ्रम और उनकी वास्तविकता"

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ANIMESH JAIN
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राजनीती के तरफ बढ़ाते झुकाव ने बाबा रामदेव को विवादित कर दिया है मेरी समझ में तो यही नहीं आता की बाबा क्या हैं संत हैं, योगगुरु हैं, व्यापारी हैं , राजनीतिज्ञ हैं, समाजसेवक हैं या कुछ और हैं. यदि संत हैं तो संतो के जैसा कार्य (ज्ञान ध्यान और तप में लीं न रहना संत का काम है ) नहीं करते, यदि योग गुरु हैं तो दवाओं का व्यापर नहीं करते, व्यापारी हैं तो राजनीती नहीं करते , और समाज सेवक हैं तो किशी दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप नहीं करते मेरी दृष्टी में बाबा रामदेव अपनी लोकप्रियता को भुनाने… Read more »
Gaurav Agarwal
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मैं साजिद जी की इस बात से सहमत हूँ कि भाजपा भी दूध की धुली नहीं है।

अब भ्रष्‍टाचार को लेकर राजनीतिक दलों में ‘कौन ‘ ज्‍यादा वाली प्रतिस्‍पर्धा है।

बाबा एक समर्थ, सशक्‍त एवं योग्‍य विकल्‍प हैं।

मैं इनकी सफलता के प्रति बेहद आशान्वित हूँ।

भगवान हमें अपनी वर्तमान राष्‍ट्रीय पार्टियों के चरित्र से बचाए। पर यह बचाव राष्‍ट्रीय चरित्र के निर्मा णके बिना संभव नहीं। अत: चरित्र पर बल देने वाले प्रत्‍येक प्रेरक स्रोत का सम्‍मान एवं सहयोग होना चाहिए न कि भ्रष्‍टाचार पर बेबसी या किनारा काटने वाले लोगों के प्रति सहानुभूति का प्रदर्शन होना चाहिए।

SAJID
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दोस्तों, मुझे लगता है कि मेरी बात को अन्यथा लिया गया है! मै एक चीज़ स्पष्ट कर देना चाहता हू कि मै कांग्रेस या किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं कर रहा हू, और न ही मैंने आज तक किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन किया है! मै तो सिर्फ यह बताना चाहता हू कि जब बाबा ने सारे भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध अभियान चलाया है तो किसी भ्रष्टाचारी पार्टी का समर्थन करने क्या औचित्य है! उन्होंने अगर भा ज पा के अलावा किसी और राजनीतिक पार्टी को चंदा दिया होता तो मै तब भी उसके विरोध में ही होता!… Read more »
शैलेन्‍द्र कुमार
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साजिद भाई चंदा बीजेपी को ही नहीं कांग्रेस को भी दिया गया था देखे लिंक http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=40&edition=2011-03-11&pageno=15 किसी पार्टी को चंदा देने से कोई किसी पार्टी का सदस्य नहीं हो जाता राजनीतिक दलों को चेक से दिया जाने वाला चंदा अवैध नहीं है लेकिन चंदा देने वाला अगर चंदा देने के पीछे कोई लाभ पाना चाहता है तो ये अवश्य अवैध है, एक ईमानदार चंदा देने वाला हमेशा ये अपेक्षा करता है की उसके द्वारा दिए गए चंदे का सदुपयोग किया जायेगा केवल चंदा देने को विवाद का विषय कैसे बनाया जा सकता है ऐसे तो हम सभी इन्ही राजनीतिक दलों… Read more »
ajit bhosle
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आपने लिंक दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आप पढ़े लिखे एवं काफी समझदार मालूम होते हैं पर एक बात फिर भी कहूंगा चेक से वो ही पैसा दे सकता है जिसके पास वैध तरीके से कमाया हुआ पैसा हो,में एक व्यापारी हूँ यह बात अच्छी तरह जानता हूँ, | भले ही बाबा की महत्वाकंशाये राजनितिक हो लेकिन उन्होंने इसे पाने के लिए कभी भी धार्मिक मार्ग से की कोशिश नहीं की, आज कम से कम बड़े भ्रष्टाचारी सकते में तो हैं, पहले तो बिंदास घूम रहे थे बाबा भले ही राजनीति में सफल हो या ना हो लेकिन अब… Read more »
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