”छिनालवाद” को जन्म देने वाली ये साहित्यिक विभूतियाँ

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-गिरीश पंकज साहित्य में इन दिनों ” छिनालवाद” का सहसा नव-उदय हुआ है. इसके आविष्कर्ता है वर्धा के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति विभूतिनारायण राय. यह ”छिनालवाद” इस वक्त सुर्ख़ियों में है और लम्बे समय तक रहेगा. साहित्य में चर्चित बने रहने के लिये कुछ हथकंडे अपनाये जाते हैं, ”नवछिनालवाद” इसी हथकंडे की उपज है. ”नया… Read more »

हंगामा है क्यूं बरपा…

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-प्रेम जनमेजय साहित्य मे हंगामे न हो तो साहित्य किसी विधवा की मांग या फिर किसी राजनेता का सक्रिय राजनीति से दूर जैसा लगता है। अब किसी ने नशे में कुछ कह दिया है तो इतना हंगामा मचाने की क्या आवश्‍यकता है। पी कर हंगामा करना कोई बुरी बात है। अब पीकर हंगामा न हो… Read more »