लेखक परिचय

अरुण कान्त शुक्ला

अरुण कान्त शुक्ला

भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत्त। ट्रेड यूनियन में तीन दशक से अधिक कार्य करता रहा। अध्ययन व लेखन में रुचि। रायपुर से प्रकाशित स्थानीय दैनिक अख़बारों में नियमित लेखन। सामाजिक कार्यों में रुचि। सामाजिक एवं नागरिक संस्थाओं में कार्यरत। जागरण जंक्शन में दबंग आवाज़ के नाम से अपना स्वयं का ब्लॉग। कार्ल मार्क्स से प्रभावित। प्रिय कोट " नदी के बहाव के साथ तो शव भी दूर तक तेज़ी के साथ बह जाता है , इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि शव एक अच्छा तैराक है।"

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kedarईश्वर ने रजनीकान्त को बर्खास्त कर दिया है| अब रजनीकांत वो सारे कार्य नहीं कर पायेगा, जो ईश्वर भी नहीं कर पाता था| केदार बाबा से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बता गया है की ईश्वर से भी नहीं बन पाने वाले कार्यों को करने के लिए अब भगवान जपो आन्दोलन के प्रचारमंत्री और गुजरात में धर्मराज स्थापित करने वाले अलोकिक लोकतांत्रिक नेता सर्व शक्तिमान, सर्वज्ञानी और सर्वत्र उपस्थित नरेंद्र को रजनी कान्त के कार्यों का भार सौंपा गया है| विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कार्यभार संभालते ही अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए अपने कन्धों पर बिठाकर 15000 लोगों को केदारनाथ से बाहर निकाला| सभी जमीनी रास्ते बंद होने के कारण उन्हें हवाई मार्ग से ये कार्य करना पड़ा| बताया जाता है की उनके हाथ में एक दूरबीन थी, जिसका प्रयोग करते हुए उन्होंने केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया| विज्ञप्ति में बताया गया है कि जब ईश्वर को पता चला कि नरेन्द्र ने केवल गुजरातियों को बचाया है तो ईश्वर बहुत नाराज हुए और नरेंद्र को याद दिलाया की अब उनका स्तर राष्ट्रीय है और उन्हें संकीर्णवाद से बचना चाहिए| इस फटकार के बाद, नरेंद्र जी ने तुरंत केदारनाथ को बनाने की जिम्मेदारी खुद पर दिए जाने की मांग कर दी है|वे देश में घूम घूम कर मांग करने वाले हैं कि भारत पर शासन करने वाले अधर्मियों को हटाकर देश की बागडोर उन्हें सौंपी जाए ताकि वे देश में धर्म का शासन लागू कर सकें, जिससे ईश्वर कुपित होकर केदारनाथ जैसा तांडव पुनः न करे|

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37 Comments on "रजनी कान्त बर्खास्त : रजनी कान्त का कार्यभार नरेंद्र को सौंपा गया"

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आर. सिंह
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इंसान जी,पहले इंसान को समझिये. पता नहीं आप डलास गए हैं या नहीं,पर मैंने केवल वहां के मौसम के बारे में लिखा था, जो दिल्ली से बहुत मिलता जुलता था. वह मैदानी इलाका है अतः थोड़ी समानता तो हैं ही. रही बात कांग्रेस और कामनिस्ट समझे जाने की. तो जब मैं कांग्रेसियों की शिकायत करता हूँ ,तो वे मुझे बीजेपी वाले समझने लगते हैं.ऐसे यह सत्य भी है कि किसी पार्टी से मेरा थोडा नजदीकी नाता रहा है ,तो वह जनसंघ ही है, बादमें जनता पार्टी और फिर बीजेपी,पर न जन संघ आर्थिक विचारों में अपने अर्थवेता पंडित दीन दयाल… Read more »
इंसान
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मैंने देश विदेश का भ्रमण किया है और हां ग्रीष्मकाल में डैलस में भी रहा हूँ| वहां के सामान्य जीवन में सभी प्रकार की उपलब्धियों—वातानुकूल भवन, वाहन, इतियादी—के होते मौसम की समानता का कोई महत्त्व नहीं रह जाता बल्कि स्वतंत्र भारत में इन संसाधनों के अभाव के कारण पैंसठ बर्षों से भारतीय राजनीति के क्षितिज पर विराजमान सत्तारूढ़ी कांग्रेस द्वारा उत्पन्न नागरिकों के भेढ़-बकरियों समान निष्क्रिय आत्मसमर्पण के वातावरण में समस्त भारत में अनैतिकता और भ्रष्टाचार अवश्य दृष्टिगोचर होते है| आपकी “जिंदगी इतने तूफानों से गुजरी है” कि आप शारीरिक और मानसिक स्तर पर धीमे हो चुके हैं| इस कारण… Read more »
अरुण कान्त शुक्ला
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अरुण कान्त शुक्ला

मेरे व्यंग लेख “रजनीकांत बर्खास्त:रजनीकांत का कार्यभार नरेंद्र को सौंपा गया” पर आये कमेंट्स का जबाब…”आपदा में मानव जीवन को मदद पहुंचाते समय भेदभाव मानवता के खिलाफ अपराध” शीर्षक में एक लेख के रूप में प्रवक्ता को भेज दिए हैं, जल्द ही आप सभी लोगों को उपलब्ध हो जाएगा|

Dr. Dhanakar Thakur
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“केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया,”- सही है तो ऐसा नही होना चाहिए था -बिना भेद भावके सेवा कार्य होना चाहिए -वैसे दुसरे मुख्यमंत्रीयों को भी ऐसा करना था . एक राज्य सर्कार सभी को रेस्क्यू नहीं कर सकती – हमारी सेना ने अंतिम तक को निकला – उन्हें बधाई –

Dr. Dhanakar Thakur
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“केवल गुजरातियों को चिन्हित किया और उन्हें ही बचाया,”- sahee hai to aisaa nahe ehona chahiue thaa -bina abhedbhavke sewakary hona chahiye

आर. सिंह
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श्री विजय दास जी , आपके प्रोफाइल में लिखा है कि आप भागलपुर के टी. एन. बी. कालेज में एसोसियट प्रोफ़ेसर है. इसके साथ ही आप आर.एस. एस. के स्वयं सेवक भी हैं(शायद). मैं मानता हूँ कि शुक्ल जी के व्यंग से आप बहुत आहत हुए हैं,पर इसका मतलब यह तो नहीं कि आप अपना संस्कार भूल कर बाजारूपण पर उतर आएँ. आर. एस.एस के के साथ कुछ मित्रों की वजह से मेरा बहुत नज़दीकी संबंध रहा है. मैं उनके ग्यान और उनके तर्क का कायल .रहा हूँ. उनलोगों को अपने कट्टर विरोधियों को भी तर्क के बल पर परास्त… Read more »
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