लेखक परिचय

अरविंद जयतिलक

अरविंद जयतिलक

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में समसामयिक मुद्दों पर इनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं।

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-अरविंद जयतिलक- terrorism
दिल्ली व राजस्थान की पुलिस समेत सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां बधाई की हकदार हैं कि उन्होंने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के सरगना तहसीन अख्तर उर्फ मोनू समेत पांच आतंकियों जियाउर रहमान उर्फ वकास, मुहम्मद महरुफ, मुहम्मद वकार अजहर उर्फ हनीफ, साकिब अंसारी उर्फ खालिद एवं बरकत को गिरफ्तार कर, उस साजिश को बेनकाब कर दिया है जो चुनाव के दरम्यान विस्फोट कर देश के लोकप्रिय नेताओं की हत्या एवं सांप्रदायिक तनाव पैदा करने का बीड़ा उठा रखे थे। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की वजह से ही देश को पुनः 1991 जैसी उस भयावह त्रासदी से दो-चार नहीं होना पड़ा, जब आतंकियों ने आमचुनाव के दौरान ही युवा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मघाती हमले में जान ले ली। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी भी कुछ इसी तरह की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार आतंकियों में से एक पाकिस्तानी आतंकी जियाउर रहमान उर्फ वकास ने स्वीकारा भी है कि उसके निशाने पर मुख्य रुप से भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी थे और वाराणसी में उनके नामांकन के दौरान हमले की योजना थी। आतंकियों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक की बरामदगी रेखांकित करती है कि उनका मकसद चुनाव को पूरी तरह रक्तरंजित बना देश का माहौल विशाक्त करना था। गिरफ्तार आतंकियों में वकास और तहसीन पर खुफिया एजेंसी (एनआइए) ने दस लाख रुपए इनाम घोषित कर रखा था। तहसीन और वकास की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद तहसीन इंडियन मुजाहिदीन का चीफ बना और उसके इशारे पर नरेंद्र मोदी की पटना की हुंकार रैली में विस्फोट किया गया। दूसरी ओर वकास यासीन भटकल के भाई रियाज भटकल का राजदार है और उसके कहने पर ही उसने काठमांडु में आइएम मॉड्यूल तैयार करने और भारत के विभिन्न षहरों को निषाना बनाने की जिम्मेदारी ली। वकास और तहसीन पर एनआइए की नजर 2010 में पड़ी जब दिल्ली के जामा मस्जिद, वाराणसी, मुंबई, पुणे एवं हैदराबाद बम विस्फोटों में उसकी कारगुजारी उजागर हुई। इसके अलावा इन दोनों को बोधगया के महाबोधि मंदिर और पटना में मोदी की रैली के दौरान हुए बम धमाकों का भी सूत्रधार माना जाता है। अबु जुंदाल, अब्दुल करीम टुंडा और यासीन भटकल के बाद अब वकास और तहसीन की गिरफ्तारी भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ एक बड़ी उपलब्धि है। इससे इंडियन मुजाहिदीन के ढांचे को तोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही उन देषद्रोहियों का भी चेहरा सामने आएगा जो इन्हें शरण और आर्थिक मदद पहुंचा रहे थे। इसके अलावा वकास की गिरफ्तारी के बरक्स पाकिस्तान को घेरना भी आसान होगा। इसलिए कि पाकिस्तान के नौशेरा स्थित लष्कर के शिविर में वकास के आतंकी ट्रेनिंग लेने और वजीरिस्तान के कबीलाई क्षेत्र में हथियार व बम बनाने का प्रशिक्षण हासिल करने की सच्चाई दुनिया के सामने उजागर हो चुकी है। लेकिन पाकिस्तान वकास को अपना नागरिक मानेगा इसमें संदेह है। इसलिए कि मुंबई आतंकी हमले के गुनाहगार और मौत के फंदे पर लटक चुके अजमल कसाब के मामले में उसका झुठ पकड़ा जा चुका है। पहले वह कसाब को अपना नागरिक मानने को तैयार ही नहीं था। लेकिन जब भारतीय खुफिया एजेंसियों ने ढे़रों साक्ष्य पेष किए तब जाकर वह स्वीकारा कि कसाब उसका नागरिक है। इसी तरह वह दाऊद इब्राहिम के मामले में भी झूठ बोल रहा है। पिछले वर्श पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विशेष दूत शहरयार खान ने लंदन स्थित इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में खुलासा किया कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है और उसे ढुंढकर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन चौबीस घंटे बाद ही वे अपने बयान से पलट गए। पिछले वर्श अगस्त माह में गिरफ्तार इंडियन मुजाहिदीन के सरगना यासीन भटकल ने स्वीकार किया कि इंडियन मुजाहिदीन का कार्यालय कराची में है और वह 2009 में करांची में आइएसआइ के बड़े अफसरों से मिला। लेकिन इसके बावजूद भी भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने में नाकाम रहा। जबकि यह आइने की तरह साफ है कि इंडियन मुजाहिदीन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ की ही पैदाइष है और उसने ही 2005-06 में प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्यों से इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना की और कराची प्रोजेक्ट को जन्म दिया। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि रियाज व इकबाल भटकल के अलावा आमिर रजा खान, अब्दुस सुभान कुरैषी, मुफ्ती सुफियान, अबू अयमान और मोहसिन चौधरी जैसे खूंखार आतंकी आइएसआइ की शरण में हैं। सच तो यह है कि भारत में आतंकवाद के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ही जिम्मेदार है। गत वर्श 16 अगस्त को गिरफ्तार लष्कर आतंकी अब्दुल करीम टुंडा जिसकी संलिप्तता 1993 में मुंबई और 1997 में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में हुए बम धमाकों में रही है, ने स्वीकार किया कि भारत में आतंकी घटनाओं के लिए पूर्णतः आइएसआइ ही जिम्मेदार है। उसने कहा कि उसके ही इशारे पर वह भटके हुए नौजवानों को बम बनाने की ट्रेनिंग और मदरसों में भारत के खिलाफ भड़काने की स्पीच देता था। उसने यह भी कबूला कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में आइएसआइ के संरक्षण में कराची में है और वह शिपिंग इंडस्ट्री, एयरलाइंस सेक्टर, गारमेंट फैक्ट्री व रीयल एस्टेट के धंधे से जुड़ा है। टुंडा की मानें तो उसने ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लष्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद से मिलवाया था। लश्कर आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी से पहले मुंबई बम अटैक के हैंडलर अबू जुंदाल भी कह चुका है कि वह 26/11 आतंकी हमले के समय खुद पाकिस्तान स्थित कंट्रोल रूम से कसाब समेत 10 आतंकियों को निर्देश देने का काम किया। कंट्रोल रुम में उसके साथ लश्कर आतंकी जकीउर रहमान लखवी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का एक आला अधिकारी मौजूद था। लेकिन पाकिस्तान इसे मानने को तैयार नहीं है। वकास की गिरफ्तारी को भी शायद ही वह तवज्जो दे। यह कोई नई बात नहीं होगी। इसलिए कि यह उसकी फितरत है। कई बार भरोसा देने के बाद भी उसने मुंबई हमले के गुनाहगारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की। सच तो यह है वह भारत के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को बंद करने वाला नहीं। भारत को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। इसके लिए उसे सबसे पहले इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़़नी होगी। आज यह देश में सबसे ताकतवर आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ही है। देष के विभिन्न राज्यों में उसके स्लीपर सेल मौजूद हैं। मौजूदा दरभंगा मॉडल उसी की उपज है, जिसके बूते वह बिहार और झारखंड में आतंकी गविविधियों को अंजाम दे रहा है। याद होगा पिछले वर्श इंडियन मुजाहिदीन से संबंध रखने के आरोप में जिन 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई उनमें 12 दरभंगा और उसके आसपास के ही थे। यह भी खुलासा हो चुका है कि आइएसआइ के इषारे पर इंडियन मुजाहिदीन ने बिहार के भागलपुर, दरभंगा, बांका और पूर्णिया जैसे कुछ षहरों से नौजवानों को केरल में ले जाकर आतंकी प्रषिक्षण दिया था। इसके अलावा खबर यह भी है कि इंडियन मुजाहिदीन देष के अन्य छोटे-बड़े शहरों व कस्बों में भी अपना नेटवर्क मजबूत कर रहा है। गत वर्ष पहले झारखण्ड राज्य के हजारी बाग में कष्मीरी मूल का लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी पकड़ा गया था। इसी तरह बिहार, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के दूरदराज क्षेत्रों से भी इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी पकड़े जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि अब उसके निशाने पर शहर ही नहीं कस्बे और गांव भी है। यासीन भटकल का आजमगढ़ के संजरपुर गांव से रिश्ता उजागर हो चुका है। गौरतलब यह भी कि वकास के सहयोगी के तौर पर राजस्थान से जिन तीन आतंकियों को पकड़ा गया है वे जयपुर और जोधपुर के हैं। यह रेखांकित करता है कि इंडियन मुजाहिदीन अब बिहार, झारखंड, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश राज्यों से बाहर निकल राजस्थान जैसे राज्यों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। सर्वाधिक चिंता का विशय यह है कि इंडियन मुजाहिदीन पढ़े-लिखे नौजवानों को आतंकी गतिविधियों में शामिल कर रहा है। अधिकांश गिरफ्तार आतंकी कम्प्यूटर एवं इंजीनियरिंग के छात्र हैं। यह बेहद खतरनाक है। भारत को इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ने के लिए खुफिया एजेंसियों को सतर्क करना होगा और यह भी ध्यान देना होगा कि तहसीन और वकास जैसे कई खूखांर आतंकी अभी भी पकड़ से बाहर हैं और वे चुनावों को लहूलुहान कर सकते हैं।

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