लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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-लिमटी खरे

राजा ने राहुल को ढकेला पार्श्व में

कांग्रेस की राजमाता के सबसे करीबी बन चुके मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजा दिग्विजय सिंह ने राजमाता के इशारों को समझकर लालू प्रसाद यादव को ठिकाने लगा दिया है। इसके बाद उन्होंने अपने हिसाब से बिसात बिछाकर कांग्रेस के युवरारज राहुल गांधी को भी हासिए में ढकेल ही दिया है। बिहार के चुनावों के बाद जो परिदृश्य उभरकर सामने आया है, उसके बाद यह स्थिति बनी है कि राहुल गांधी भीड तो जुटाने में सझम हैं, पर वे भीड को वोट में तब्दील करने में सक्षम नही हैं। राहुल गांधी ने बिहार में कटिहार, अररिया, सुपौल, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, रामनगर, कुचायकोट, मांझी, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, शेखपुरा, नवादा, सासाराम और औरंगाबाद में या तो सभाएं ली या फिर रोड शो किए, किन्तु उन्होंने भीड़ तो जोडी पर भीड को वोट में वे तब्दील नहीं कर पाए। यही स्थिति मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चुनावों में पूर्व में निर्मित हुई थी। लोग यह कहने से भी नहीं चूक रहे हैं कि राहुल का आकर्षण तो है किन्तु वे प्रधानमंत्री बनने के काबिल नहीं हैं। बिहार मे सोलह सभाएं लेने के बाद भी आधी से कम सीटें लाना राहुल गांधी के लिए ऋणात्मक ही माना जा रहा है। कहते हैं न जहं जहं पैर पडे संतने के तहं तहं बेड़ा . . . .।

”गुरू शरण” की ‘शरण’

जब भी संकट आता है तो लोग अपने गुरू की शरण में जाते हैं। विदेशी राजनयिक मीरा शंकर पर भी संकट के बादल गहराने लगे हैं तो वे भी अपने गुरू की शरण में जाने के बजाए गुरूशरण की शरण में हैं। जी हां, गुरू शरण मतलब भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की अर्धांग्नी गुरूशरण कौर की शरण में। इस साल अक्टूबर में सेवानिवृत होने वाली अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर को दुनिया के चौधरी अमेरिका के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के चलते दो माह का सेवा विस्तार दे दिया गया था। दिसंबर में उनकी सेवा निवृति तय है। मीरा कुमार कुछ और माह की सेवा वृध्दि की कामना मन में संजोए सारे आकाओं को सिध्द करने की जुगत में हैं। मीरा अमेरिका में भारत की दूसरी महिला एम्बेसेडर हैं। पीएमओ के सूत्रों की मानें तो ओबामा की अर्धांग्नी मिशेल ने प्रधानमंत्री की पत्नि गुरूशरण से चर्चा के दौरान मीरा शंकर की तारीफ में कशीदे गढ़े थे, जिससे गुरूशरण कौर के मन में मीरा शंकर के प्रति सहानुभूति उपजना स्वाभाविक ही है। अब देखना यह है कि वजीरे आजम अपनी पत्नि की बात मानकर मीरा शंकर को सेवावृध्दि देते हैं या फिर . . .।

एन एच के उडे धुर्र, शिव हैं मौन

देश के हृदय प्रदेश में दूसरी बार पर्यटक भेजने वाली संस्थाएं अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसका कारण मध्य प्रदेश की यातायात पुलिस या परिवहन विभाग नहीं है। इसका कारण है भारत सरकार का भूतल परिहवन मंत्रालय विभाग। जी हां। यह सच हैं, मध्य प्रदेश के नेशनल हाईवे इन दिनों बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन सडकों पर चलने वाले वाहनों के टायर और उसके पटटे कमानी बुरी तरह टूट चुके हैं। फिर भी मजबूरी में वे इनको चला रहे हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, फिर भी वह केंद्र में कांग्रेसनीत सरकार के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने में अपने आप को अक्षम पा रही है। बार बार भाजपा द्वारा कांग्रेस की केंद्र सरकार और भूतल परिवहन मंत्रालय के खिलाफ कठोर कदम उठाने की घोषणा की जाती है, पर न जाने क्या करण बनते हैं कि मध्य प्रदेश भाजपा की धार बोथली हो जाती है। पहले प्रदेश भाजपा ने इस मामले में कमान संभाली फिर सरकारी तंत्र ने, नतीजा सिफर ही है। लगने लगा है कि मध्य प्रदेश की जनता वाकई बेवकूफ ही है।

पवार के लिए 2जी घोटाले से बड़ा है महाराष्ट्र का संकट

भले ही देश के लिए घोटाले सबसे बड़े संकट के तौर पर सामने आ रहे हों, किन्तु देश के कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के लिए करोड़ों अरबों रूपयों के टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले से कहीं बड़ा संकट बनकर सामने आ रहा है। कांग्रेस के तारणहार बने प्रणव मुखर्जी के 2जी घोटाले के बाद दिल्ली बुलावे के बाद भी शरद पवार मुंबई में ही बने रहे। आदर्श सोसायटी घोटाले के बाद एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल की स्थिति बहुत ही कमजोर हो चली है। बीते सप्ताह रोटीन चेकअप के लिए मुंबई आए शरद पवार ने वापस दिल्ली की ओर रूख नहीं किया, बल्कि वे लगातार ही मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के संपर्क में बने रहे। सूबे की सियासत में यह पहली मर्तबा हुआ जब एनसीपी के मंत्रियों की सूची खुद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अपने हाथों से सौंपी हो। शरद पवार की छटपटाहट शायद इसलिए थी क्योंकि वे अपनी पुत्री सांसद सुप्रीया सुले को राजनीति में आगे बढ़ाना चाह रहे हों, पर उनके भतीजे अजीत पवार इस पर ग्रहण लगा रहे थे। मंत्रियों की बैठक में सुप्रीया की उपस्थिति को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रही थीं, पर शरद पवार विचलित ही नजर आए।

युवराज की सल्तनत बदहाली की ओर

कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री और युवराज राहुल गांधी समूचे देश में युवाओं को आगे लाने का काम पूरे जतन से कर रहे हैं। युवराज राहुल गांधी समूचे देश में इतना खो गए हैं कि उन्हें अपनी खुद की सल्तनत (संसदीय क्षेत्र) का ही ख्याल नहीं है। राहुल गांधी की अमेठी के हाल बेहाल हैं। अमेठी संसदीय क्षेत्र में एक ओर जहां बिजली के हालात दयनीय हैं, लोगों को चोबीस में से बमुश्किल आठ से दस घंटे ही बिजली नसीब हो रही है। वहीं दूसरी ओर रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। प्रस्तावित उद्योगों के लिए जमीन नहीं है, जिन्हें जमीन मिल भी गई है, उनका काम ठप्प पड़ा हुआ है। मुंशीगंज स्थित राहुल के चाचा स्व.संजय गांधी के नाम से चल रहे अस्पताल जिसे मेडीकल कालेज के तौर पर संचालित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन साल पहले जमीन भी मुहैया करवा दी गई थी, वह भी अस्तित्व में नहीं आ सका है। बतौर सांसद पहले ही कार्यकाल में युवराज ने अमेठी को एजूकेशनल हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी, किन्तु आज तक वह योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी है। गांधी परिवार से जुड़े होने के कारण अमेठी सदा ही चर्चाओं में रहा है, किन्तु इसकी बदहाली अब तक दूर नहीं हो सकी है। अमेठी के लोग दुखी हैं, कि उनके जनादेश पर चुने गए नेताओं ने देश की तो फिकर की है, पर अपने मतदाताओं के आंसू पोंछने की जहमत किसी ने भी नहीं उठाई है।

ये तो होना ही था. . . .

महाराष्ट्र के मुंबई में हुए आदर्श आवास सोसायटी घोटाले जिसके चलते मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को अपने पद से हाथ धोना पड़ा था, के मामले में दस्तावेज गायब होने से मामला सनसनीखेज मोड पर पहुंच गया है। बताते हैं कि इसकी 10 नस्तियों में से महत्वपूर्ण कागजात गायब हैं। सवाल यह उठता है कि जब घोटाला सामने आया था, तभी सारे दस्तावेज सील क्यो नहीं किए गए। जाहिर है सरकार द्वारा भी दोषियों को अपने आप को बचाने के सारे मार्ग प्रशस्त किए गए होंगे। भाजपा के प्रवक्ता शहनवाज हुसैन का यह आरोप निराधार नहीं कहा जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा है कि चूंकि इस मामले में बड़े लोगों की संलिप्तता है, इसके चलते कागजात गायब हुए हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली इस 31माला इमारत को बनाने के पूर्व पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन न किया जाना उतना आश्चर्यजनक नहीं है, जितना कि इस इमारत के बनने के दौरान पर्यावरण्ा विभाग का मौन रहना। वैसे भी कोस्अल रेग्यूलेशन जोन के नियमों के अनुसार समुद्र तट के आसपास के इलाकों में किसी भी तरह के निर्माण के लिए विभाग की अनुमति अत्यावश्यक ही होती है, विभाग के सूत्रों का कहना है कि अगर इमारत बनाने की अनुमति मांगी भी गई होती तो महज नौ मंजिला इमारत की ही अनुमति दी जाती।

साक्षी के निशाने पर राजमाता युवराज

कांग्रेस के सारे कार्यकर्ता अपनी राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी के खिलाफ एक शब्द भी सुनना पसंद नहीं करते हैं। कांग्रेसी जानते हैं कि नेहरू गांधी परिवार की बैसाखी के बिना उनकी वेतरण्ाी पर हाने से रही। जब भी किसी कांग्रेसी ने नेहरू गांधी परिवार को कोसा है, उसे कांग्रेस से बाहर का रास्ता ही दिखाया गया है। हाल ही में कांग्रेस के सांसद जगमोहन रेड्डी ने सोनिया और राहुल के खिलाफ परोक्ष तौर पर मोर्चा खोला हुआ है। रेड्डी पर आरोप है कि खुद को आंध्र का मुख्यमंत्री न बनाए जाने से आहत रेड्डी ने अपने स्वामित्व वाले साक्षी चेनल पर कांग्रेस की कलई खोलना आरंभ कर दिया है। पहले प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पर आक्रमक तेवर अपना चुका साक्षी अब बिहार चुनाव के परिणामों के बाद राहुल गांधी के प्रति काफी हद तक संवेदनशील हो उठा है। राहुल गांधी को युवाओं का प्रेरणास्त्रोत बताने की बखिया उधेडते हुए चेनल का कहना है कि कहीं एसा न हो राहुल की अगुआई में समूचे देश में कांग्रेस के हाथों से युवाओं का वोट बैंक ही फिसल जाए।

‘विकीलीक्स’, भारत की चिरौरी करता दुनिया का चौधरी

अमेरिका को दुनिया का चौधरी माना जाता है। कहा जाता है कि अमेरिका द्वारा समूची दुनिया को अपनी शर्तों पर नचाया जाता है, किन्तु एक वेब साईट के कारण अमेरिका अब भारत की चिरौरी करता नजर आ रहा है। विकीलीक्स नामक यह वेब साईट जो किसी भी देश, संस्था, कंपनी आदि के गोपनीय दस्तावेजों का खुलासा करती है, की नींव 2006 में रखी गई थी। अब तक लाखों दस्तावेजों को सार्वजनिक कर चुकी यह वेब साईट लोगों में काफी हद तक लोकप्रिय हो चुकी है। इसने घोषणा की है कि जल्द ही यह अमेरिका के 30 लाख गोपनीय संदेश को सार्वजनिक करेगी। इस घोषणा से अमेरिका की हालत पतली नजर आ रही है। अमेरिका को भय है कि इसके सार्वजनिक होने से कहीं अमेरिका और भारत के रिश्ते न बिगड़ जाएं। अमेरिका का विदेश विभाग इन दिनों भारत के सतत संपर्क में है। अगर इस वेब साईट ने गोपनीय दस्तावेजों, राजनयिकों के बीच बातचीत को सार्वजनिक कर दिया तो अमेरिका एवं अन्य देशों विशेषकर पाकिस्तान के साथ हुई बातचीत में भारत के बारे में हुई चर्चा भी सार्वजनिक हो सकती है, जिससे अमेरिका सबसे अधिक भयाक्रांत नजर आ रहा है।

कौन है मदाम का चाणक्य

कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के राजपाट की विजय पताका बिहार के चुनाव परिणामों के उपरांत सिमटती नजर आने लगी है। खुद सोनिया इसका अनुभव कर रही होंगी। कल तक सुरेश पचौरी, अहमद पटेल, राजा दिग्विजय सिंह, अर्जुन सिंह आदि के भरोसे चलने वाली सोनिया गांधी को लगता है नया चाणक्य मिल गया है। कांग्रेस अध्यक्ष को कठपुतली की तरह नचाकर अपना उल्लू सीधा करने में इन नेताओं ने कोई कसर नहीं रख छोडी थी। बिहार के नतीजे आते ही नए क्लेवर में नजर आ रही हैं सोनिया। बीते दिनों सोनिया कांग्रेस के मुख्यालय 24 अकबर रोड पहुंची तो उनके साथ न तो मीडिया प्रकोष्ठ के जनार्दन द्विवेदी, न अहमद पटेल, न दिग्विजय सिंह न ही टॉम वडक्कन ही मौजूद थे। सबसे अधिक चौंकाने वाली बात तो यह थी कि इन सबकी अनुपस्थिति में सोनिया ने मीडिया के साथ कुछ समय साझा किया। मीडिया सहित सियासी फिजां में सोनिया गांधी के इस बदले स्वरूप को देखकर चर्चा आम हो चली है कि लगता है सोनिया को अब कोई नया चाणक्य मिल गया है, जिसने इस तरह से बिना किसी बैसाखी के चलने का मशविरा दे दिया है।

फिर कमल ताल पर ठुमका लगाया भाजपा ने!

देश के हृदय प्रदेश के नागरिक आज भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार का नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं या कांग्रेस के क्षत्रप और केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ! इसका कारण यह है कि मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है, और इतनी दुर्दशा होने के बाद भी भाजपा और प्रदेश सरकार द्वारा रह रह कर कमल नाथ के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी जाने के बाद मामला टांय टांय फिस्स ही हो जाता है। कभी भाजपा के निजाम प्रभात झा इसके लिए पीएम से मिलने की घोषणा करते हैं, तो कभी शिवराज सिंह खुद कमान संभालते हुए प्रधानमंत्री से शिकायत की बात कह जाते हैं। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के नेतृत्व में इस मामले को लेकर सांसदों ने कमल नाथ से भेंट कर डाली। इस सारे प्रहसन को देखकर जनता भी दिग्भ्रमित हुए बिना नहीं है कि आखिर भाजपा और मध्य प्रदेश सरकार चाह क्या रही है। जनता को सब कुछ समझ में आ रहा है, उधर सत्ता और संगठन में बैठे नुमाईंदे सोच रहे हैं कि शतुरमुर्ग के मानिंद अगर रेत में सर गड़ा लिया जाए तो . . .।

और यह रहा बाबा रामदेव उवाच!

बीसवीं सदी में स्वयंभू योग गुरू बनकर उभरे बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खात्मे का अपना संकल्प फिर दुहराते हुए कहा है कि देश में 99 फीसदी नेता और अधिकारी आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। देवरिया में आयोजित एक शिविर में बाबा रामदेव ने यह हुंकार भरी है। मीडिया से रूबरू बाबा रामदेव का कहना है कि बेईमानों को इस देश पर शासन करने का कोई हक नहीं है। बाबा रामदेव ने नया पैंतरा खेलते हुए कहा है कि अंग्रेजों के समय से चली आ रही न्याय व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, साथ ही उन्होने दुख भी जताया कि आजादी के बाद किसी भी भ्रष्ट राजनेता को सजा नहीं मिल पाई है। बाबा रामदेव का हर एक शब्द तारीफ के काबिल ही माना जा सकता है। बाबा रामदेव के भारत की कल्पना करते ही राम राज्य आंखों में तैर जाता है। ये वे ही सपने हैं जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत के लिए देखे थे। गांधी का जीवन सादगी भरा था, आडम्बर, विलासिता, अहंकार से वे कोसों दूर थे। अपना पखाना स्वयं साफ किया करते थे। बाबा रामदेव का गांधी दर्शन वास्तविक गांधी दर्शन का लेटेस्ट वर्जन माना जा सकता है। वैसे बाबा को इस बात का खुलासा अवश्य ही करना चाहिए कि 99फीसदी भ्रष्ट राजनेता और नौकरशाहों में उनके शिष्य कितने फीसदी बने हैं।

पुच्छल तारा

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी कहते हैं कि इंडिया में दो भारत हैं। एक अमीरों का भारत एक गरीबों का। यह सच है, इसके लिए सवा सौ साल पुरानी और आधी सदी से ज्यादा भारत पर राज करने वाली कांग्रेस को ही जिम्मेदार माना जा सकता है। अहमदाबाद से सुरभी बैस एक ईमेल के जरिए इसी बात को प्रतिपादित करने का प्रयास कर रही हैं। सुरभी लिखती हैं कि भारतीय गरीब हैं, किन्तु भारत एक गरीब देश कतई नहीं माना जा सकता है। यह हम नहीं स्विस बैंक के एक संचालक का कहना है। वे कहते हैं कि भारतियों की 280 लाख करोड़ रूपए की संपत्ति स्विस बैंक में जमा है। इस राशि से भारत का बजट बिना किसी कर को लगाए हुए तीस सालों तक बनाया जा सकता है। अर्थात सब कुछ मुफत में। इससे साठ करोड रोजगार पैदा किए जा सकते हैं। इससे देश के किसी भी गांव से दिल्ली को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा सकता है। इससे 500 सोशल प्रोजेक्टस को सदा के लिए निशुल्क बिजली प्रदाय किया जा सकता है। यहां तक कि हर भारतीय को 2000 रूपए की पेंशन साठ सालों तक लगातार दी जा सकती है। अगर वाकई एसा है तो फिर हमें नाबार्ड, विश्व बैंक आदि की मदद की क्या दरकार! अब बताईए ”सोने की चिडिया” भारत को किसने गिरवी रखा है? जाहिर है हमारे जनसेवकों ने। हम इतिहास में पढ़ते हैं कि गजनबी या ब्रितानियों ने भारत को लूटा है, यह सच नहीं है, सच तो यह है कि इन सबसे ज्यादा देश के जनसेवकों ने देश को लूटा है। अब फैसला जनता करे कि हम गरीब हैं, पर हमारा देश गरीब कतई नहीं कहा जा सकता है।

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