लेखक परिचय

रवि श्रीवास्तव

रवि श्रीवास्तव

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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tiranga

हम देश की आजादी का 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। हर तरफ देशभक्ति के गाने सुनाई दे रहे हैं। स्कूल हो या सरकारी दफ्तर तिरगें को लहराते हैं। देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वीरों को याद करते हुए बड़े शान से तिरंगे को सलामी भी देते हैं।
बच्चे अपनी मम्मी पापा से कहकर स्कूल ले जाने के लिए छोटे-छोटे तिरंगे झण्ड़े भी खरीदते हैं। प्रभात फेरी करते हुए कहते हैं, शान न इसकी जाने पाए चाहे जान भले ही जाए आगे बढ़ते रहते हैं। स्कूलों में कार्यक्रम होता है। अध्यापकों का आजादी को लेकर भाषण होता हैं, बाद में मिठाइंया बटती हैं, मिठाई पाकर बच्चे खुश और तिरंगे को वही फेका या रास्ते में फेका और चलते बने ।
इसे तिरंगे का सम्मान कहे या अपमान। कुछ ही घण्टों पहले शान न इसकी जाने पाए चाहे जान भले ही जाए का नारा लगाया गया था। लेकिन चंद घण्टों में ये क्या बच्चों को एक बोझ जैसा मालूम हुआ और फेंक दिया। आप को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की बात बता रहा हूं। दोपहर के करीब 3 बजे अपने दोस्त के साथ दवा लाने के लिए गया हुआ था।
लौटते वक्त अचानक से मेरी नज़र नाली में पड़ी। जिसका नजारा देखकर मै दंग रह गया। आजादी का जश्न मनाए हुए चंद घण्टे ही हुए थे, जिस तिरंगें को अभी सलामी दी गई थी, वही तिरंगा जो देश की शान बढ़ाता है, वह नाली में बहता हुआ जा रहा था।
आने जाने वाले कितने लोगों की नज़र इस पड़ी होगी, पर किसे इतनी फुर्सत है कि रूककर इसे उठा ले। नाली में पड़े इस झण्ड़े से उनके हाथ भी खराब हो जाएगें। यह सब देखकर गुस्सा तो बहुत आया, पर किसपर दिखाता ? मुझसे देखा नही गया तो झण्ड़े को नाली से बाहर निकाला, ये क्या इसको देखते हुए कुछ लोग तमाशा देखने आ गए थे ?
लेकिन उन्हे क्या पता इस तिरंगें की अहमियत ? उन्हें तो पता है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी हो झण्ड़े को फहराया जाता है। 15 अगस्त के दिन देश आजाद हुआ था। ये सच भी है, लोगों में झण्ड़े को लेकर जागरूकता की कमी देखी गई है। आखिर हम अपने बच्चों को क्यों नही बताते कि ये झण्ड़ा देश की शान है। इसे इधर उधर फेका मत करों। स्कूल से वापस आने के बाद सुरक्षित जगह पर रख दो। जिससे इसका अपमान न हो सके।
अध्पापकों के लम्बे चौड़े भाषण रहेगें, पर तिरंगें के सम्मान और अपमान के बारे में बच्चो को जागरूक करने का काम शायद नही होता। बच्चों को यह भी नही बताया जाता कि झण्ड़े को लेकर आप आए तो हैं, पर इसे फेकना नही घर ले जाकर सुरक्षित स्थान पर रख देना। जिससे इसका अपमान न हो सके। अरे ये सब बताने इन सब के लिए उनके पास समय कहां हैं, जल्दी से स्कूल का कार्यक्रम समाप्त हो घर जाए।
ये तो एक जिले की बात थी ऐसा न जाने कितने राज्यों शहरों में होता होगा। अधिकतर देखा जाता है, किसी प्रदर्शन में अगर तिरंगें को लेकर जाते हैं तो उसका किसी न किसी के द्वारा अपमान होना तय होता है। अपनी शान में लेकर तो चल दिए, पर तिरंगे की शान की रक्षा नही कर सके।

तिरंगें के अपमान के मामले को लेकर नीचे कुछ बिंदु दे रहे हैं।
1- जनता को जागरूक करने की जरूरत- जनता को सिर्फ यह नही मालूम होना चाहिए कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को झण्ड़े को फहराया जाता है। उन्हें झण्डें को लेकर उसके सम्मान और अपमान की बातों के बारे में भी जागरूक करना चाहिए। अगर जनता जागरूक होगी तो वह अपने बच्चों को भी इस बारे में जागरूक करेगी।
2- दुकानदार बेचते समय जानकारी दें- छोटे-छोटे झण्ड़े बेचते समय दुकानदार भी जानकारी दे सकते हैं, कि उसकों ले तो जा रहे हो पर संभाल कर रखना इधर उधर मत फेंक देना। तिरंगें के इधर उधर फेकने से इसका अपमान होता है।
3- माता-पिता, शिक्षक पूर्ण जिम्मदारी निभाएं- घर से स्कूल जाते समय माता- पिता बच्चे को झण्ड़े के बारे बताएं और स्कूल में शिक्षक भी बच्चा जब घर वापस आ रहा हो तो झण्ड़े को फेकने से मना करें।
4- बच्चों को झण्ड़ा स्कूल की तरफ से मिले- अगर सरकार बच्चों को स्कूली ड्रेस, खाना आदि चीजे दे सकती है, तो 15 अगस्त और 26 जनवरी को झण्ड़ा क्यों नही, जिसे लेकर बच्चे प्रभात फेरी कर सके और जाते समय स्कूल में जमा करते हुए जाए।
5- धरना प्रदर्शन में तिरंगे को ले जाने से बचे- किसी प्रदर्शन में अगर तिरंगें को लेकर जाते हैं तो उसका किसी न किसी के द्वारा अपमान होना तय होता है। अपनी शान में लेकर तो चल दिए, पर तिरंगे की शान की रक्षा नही कर सके। कही पैरों के नीचे कुचल देते हैं तो कही ऐसे पड़ा रहता है।
दोस्तों बहुत ही मुश्किल से आजादी मिली है, कितनें वीरों नें इस तिरंगें की शान के लिए अपनी कुर्बानी दी है। कम से कम हमारा ये फर्ज बनता है कि वीरों की कुर्बानी की लाज और तिरंगें की शान को बचाकर रखें।

हम इस धरती के वीर पुत्र हैं, कुछ भी हम कर जाएगें,
भारत माता तेरी शान का, पर अपमान नही सह पाएंगें।

जय हिंद जय भारत-

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1 Comment on "तिरंगें का ये कैसा सम्मान ?"

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आर. सिंह
Guest

किसी ने क्या खूब लिखा है,
रात भर की जगी हूँ.
खूब नौटंकी भी हो गयी है.छुट्टी का
आनंद भी उठा लिया है.
अब सोने जा रही हूँ.
फिर मिलती हूँ.
२६ जनवरी २०१७ को.
आपकी
देशभक्ति
शुभ रात्रि
तिरंगे का क्या हस्र होगा यह इसी से जाहिर है. ऐसे तो जो चौराहे पर या गलियों में तिरंगा बेचते हैं,उनको तो शायद यह भी न मालूम हो कि यह किस लिए है,महत्त्व की बात तो भूल ही जाइये.

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