लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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नई दिल्ली 13 अप्रेल। सुषमा स्वराज का कद कम करने की ठान चुके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पीएम इन वेटिंग एल.के.आडवाणी ने अब उमाश्री भारती की भाजपा में वापसी के मार्ग प्रशस्त करने के लिए भाजपा के पूर्व निजाम राजनाथ सिंह के कांधे पर जवाबदारी सौंपी है। राजनाथ अब उमा के मार्ग के शूल न केवल उखाडने का काम करेंगे वरन उनकी वापसी के लिए रेड कारपेट भी बिछाएंगे।

गौरतलब होगा कि लोकसभा चुनावों के दौरान उमाश्री भारती ने एल.के.आडवाणी के पक्ष में धुरंधर बयानबाजी कर जता दिया था कि वे जल्द ही भाजपा में वापस आ सकतीं हैं। आडवाणी के करीबी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनावों के दौरान ही आडवाणी ने उमाश्री को भाजपा में वापस आने का प्रस्ताव दिया था किन्तु संकोचवश उमाश्री ने उसे सविनय ठुकरा दिया था। उधर संघ के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि अब संघ के आर्थिक चिंतक गुरूमुूर्ति ने उमाश्री को वापस लाने की कवायद आरंभ की है। माना जा रहा है कि आडवाणी की इच्छा पूरी करने की गरज से गुरूमूर्ति यह काम कर रहे हैं। गुरूमूर्ति के प्रयासों के चलते ही दो बार नागपुर में तो एक बार दिल्ली में उमाश्री और मोहन भागवत के बीच तीन दौर की बातचीत भी हो चुकी है।

संघ के सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश में तैनात संघ के कारिंदो और उमाश्री के बीच खुदी खाई ही उमाश्री की वापसी में रोढा बन रही है। सूबे के निजाम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपाध्यक्ष नरेंद्र तोमर इस दुखती नब्ज को भांप गए हैं और उन्होंने भी संघ के कारिंदों के सुर में ही राग मल्हार गाना आरंभ कर दिया है। सारे समीकरण के बाद अब राजग के पीएम इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवाणी ने नया पत्ता फेंका है। उन्होंने नितिन गडकरी को मशविरा दिया है कि उमा की राह के कांटे चुनने का काम पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को सौंपा जाए।

नितिन गडकरी भी उमाश्री भारती की घर वापसी के हिमायती हैं। अत: उन्होंने आडवाणी की राय से इत्तेफाक रखते हुए पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को काम पर लगा दिया है। बताया जाता है कि राजनाथ सिंह ने इस मामले में शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र तोमर से दो दौर की टेलीफोनिक चर्चा भी कर ली है। मजे की बात तो यह है कि भाजपाध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश से हैं, और वे शिवराज सिंह चौहन और नरेंद्र तोमर को मसझा रहे हैं क यूपी में कोई बडा नेता नहीं है, अत: उत्तर प्रदेश को मद्देनजर उमाश्री भारती की घर वापसी बहुत जरूरी है।

उधर भाजपा मुख्यालय में चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाए तो भाजपा के अनेक नेता चाहते हैं कि उमाश्री भारती को मध्य प्रदेश के बडे नेताओं के साथ बिठाकर बात करना चाहिए और उमा उन नेताओं को यकीन दिलाएं कि वे मध्य प्रदेश की राजनीति में कोई दखल नहीं देंगी तब ही उमाश्री की राह आसान हो सकती है, वरना एमपी में बैठे संघ और भाजपा के नेता उनकी घर वापसी की राह में कांटे बोने से बाज नहीं आने वाले।

-लिमटी खरे

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