लेखक परिचय

निर्मल रानी

निर्मल रानी

अंबाला की रहनेवाली निर्मल रानी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं, पिछले पंद्रह सालों से विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार के तौर पर लेखन कर रही हैं...

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निर्मल रानी

भारतीय रेल व्यवस्था का नाम हालांकि विश्व के चंद गिने-चुने सबसे बड़े नेटवर्क में गिना जाता है। स्वतंत्रता से लेकर अब तक भारतीय रेल ने निश्चित रूप से काफी तरक्की भी की है। चाहे वह उच्चस्तरीय रख-रखाव वाले रेल पथ संचालन की बात हो या फिर उस पर दौडऩे वाली तेज़ रफ्तार रेलगाडिय़ों की अथवा रेल डिब्बों में यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की या फिर रेलवे स्टेशन के रख-रखाव की। ऐसे सभी क्षेत्रों में भारतीय रेल पहले से अधिक प्रगति करती दिखाई दे रही है। परंतु इन सब बातों के बावजूद अभी भी भारतीय रेल से जुड़ी तमाम बातें ऐसी हैं जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है गोया यह व्यवस्था अभी भी तरक्की के क्षेत्र में न सिर्फ बहुत पीछे है बल्कि भारतीय रेल अधिकारियों को अभी तक रेल यात्रियों की सुख-सुविधाओं तथा उनके जान-माल की रक्षा की गोया कोई चिंता ही न हो।

उदाहरण के तौर पर बिहार के दरभंगा जि़ले से ठीक पहले आने वाले स्टेशन का नाम है लेहरिया सराय। अंग्रेज़ों के समय से ही लेहरिया सराय टाऊन दरभंगा जि़ले के मुख्यालय के तौर पर जाना जाता है। दरभंगा जि़ले के सभी प्रमुख सरकारी हेडक्वार्टर, कोर्ट-कचहरी, जि़लाधीश कार्यालय, हेड पोस्टऑफस, बैंक आदि सब कुछ लेहरिया सराय में ही स्थित हैं। घनी आबादी वाले इस नगर में लगभग दरभंगा रेलवे स्टेशन के बराबर ही रेल यात्री लेहरिया सराय स्टेशन का इस्तेमाल कहीं भी आने-जाने के लिए करते हैं। अधिकांश मेल व एक्सप्रेस गाडिय़ां भी यहां अवश्य रुकती हैं। इस स्टेशन के निर्माण तथा इसके विस्तार में भी पहले की तुलना में काफी तरक्की हुई है। परंतु आश्चर्य की बात यह है कि ब्रिटिश काल से लेकर आज तक इतने बड़े रेलवे स्टेशन पर मात्र एक ही प्लेटफार्म उपलब्ध है। हालांकि प्लेटफार्म के समक्ष एक नंबर के अतिरिक्त तीन रेल ट्रैक और भी हैं। परंतु केवल लाईन नंबर एक प्लेटफार्म नंबर एक से संबद्ध है जबकि दूसरे व तीसरे ट्रैक के बाद चौथी रेल लाईन रेलवे माल गोदाम के लिए प्रयोग में लाई जाती है जिस पर प्राय: मालगाडिय़ां खड़ी रहती हैं। और सीमेंट व अन्य सामग्रियां यहां उतरा करती हैं। अब यदि एक साथ दो रेलगाडिय़ों को लेहरिया सराय स्टेशन पर क्रास होना हो तो ऐसे में प्लेटफार्म नंबर एक पर केवल एक ही रेलगाड़ी खड़ी हो सकती है जबकि दूसरी रेलगाड़ी लाईन नंबर दो पर लगा दी जाती है।

अब ज़रा रेलवे के अपने नियम व कानून पर गौर कीजिए। कहां तो रेल विभाग स्वयं यात्रियों को रेल लाईन पार करने हेतु मना करता है। अक्सर इस प्रकार की उद्घोषणा भी रेलवे स्टेशनों पर होती सुनाई देती है जिस में यात्रियों को आगाह किया जाता है कि वे दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए पुल का प्रयोग करें। रेल लाईन पार करना गैर कानूनी है। अब इस उद्घोषणा को लेहरिया सराय स्टेशन पर लागू करके देखिए। क्या यह संभव है वहां दो नंबर लाईन पर आने वाली गाडिय़ों पर सवार होने के लिए लाईन नंबर एक को पार न किया जाए। अब ज़रा यात्रियों की परेशानी का आलम भी महसूस कीजिए कि दोनों ओर पथरीली बजरी और बीच में ट्रेन। कोई बुज़ुर्ग,अपाहिज,अपने साथ अधिक सामान रखने वाला व्यक्ति, गोद में बच्चों को लिए हुए औरतें, कोई लाचार या बीमार व्यक्ति आखर इतने संकरे व तंग पथरीले रास्तों से चलकर मात्र दो मिनट के अंदर कैसे अपनी निर्धारित बोगी तक पहुंच सकता है? स्वयं मेरे साथ यही हादसा दरपेश आया। पहले जयनगर से चलकर अमृतसर को जाने वाली शहीद एक्सप्रेस को लेहरिया सराय के प्लेटफार्म नंबर एक पर आने की सूचना दी गई। परंतु गाड़ी आने के मात्र दो मिनट पूर्व यह उद्घोष किया गया कि प्लेटफार्म नंबर एक पर कोई दूसरी गाड़ी आ रही है तथा शहीद एक्सप्रेस अब लाईन नंबर दो पर आएगी। मेरा वातानुकूलित बोगी में आरक्षण था तथा मुझे स्टेशन पर छोडऩे के लिए गांव से कुछ लोग भी साथ आए थे। इसके बावजूद मुझे एक नंबर लाईन पार कर पत्थरों पर दौड़ते हुए अपनी बोगी तक पहुचने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा। मैं तो अपने परिवार व अपने साज़ो-सामान के साथ अपने सहयोगियों की सहायता से किसी तरह अपनी बोगी में सवार हो गई। मेरे बोगी में दाखल होते ही रेलगाड़ी भी चल पड़ी। परंतु मैंने बाहर झांककर देखा तो कई यात्री ऐसे भी थे जो चलती हुई ट्रेन के पीछे दौड़ते रहे। कई बोगियों के यात्रियों ने बोगी के दरवाज़े नहीं खोले। परिणामस्वरूप तमाम यात्री अपने डिब्बों तक नहीं पहुंच सके थे और वे उस टे्रन में यात्रा करने से वंचित रह गए। जब ट्रेन लेहरिया सराय से आगे बढ़ी तो मेरी ही वातानुकूलित बोगी में कई दैनिक यात्री भी सवार थे। उनमें कई रेल विभाग के लोग भी थे। जब मैंने उनसे इस घोर दुव्र्यवस्था के बारे में पूछा तो उन्होंने भी इसे काफ़ी पहले से चली आ रही एक घोर दुव्र्यवस्था तो माना परंतु इसके समाधान के लिए उनके पास कोई जवाब नहीं था।

सोचने का विषय यह है कि जब लेहरिया सराय जैसे घनी आबादी वाले तथा हज़ारों यात्रियों के प्रतिदिन आवागमन वाले बिहार के एक प्रमुख रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा हेतु प्लेटफार्म नंबर दो और तीन की व्यवस्था नहीं है तो अन्य छोटे स्टेशनों पर रेलयात्रियों की सुविधा का रेल विभाग क्या ध्यान रखता होगा?इस प्रकार की घोर दुव्र्यवस्था न केवल यात्रियों के लिए असुविधा, तकलीफ व परेशानी का कारण बनती है बल्कि इससे किसी रेल यात्री की जान भी जा सकती है। लिहाज़ा रेल विभाग को चाहिए कि लेहरिया सराय जैसे देश के और तमाम प्रमुख रेल स्टेशनों का एक सर्वेक्षण कराए तथा ऐसे सभी स्टेशनों पर दो व तीन नंबर प्लेटफार्म का निर्माण कराने के साथ-साथ प्लेटफार्म पर लाईन पार करने वाले पुलों का निर्माण भी कराए ताकि रेल यात्री बिना किसी $खतरे को मोल लिए हुए अपने सामानों के साथ अपनी निर्धारित बोगियों तक सुचारू रूप से सुरक्षित पहुंच सकें तथा अपनी आगे की सुरक्षित यात्रा जारी रख सकें। जहां तक अमृतसर-जयनगर के मध्य चलने वाली 14650 व 14673 शहीद एक्सप्रेस या सरयू-यमुना एक्सप्रेस के संचालन की बात है तो इस रेलगाड़ी को लेकर भी रेल विभाग द्वारा सही योजना अमल में नहीं लाई जा रही है। पिछले कुछ समय से इस ट्रेन को सुपर फास्ट ट्रेन का दर्जा दिया गया है जिसके अंतर्गत इसकी गति भी पहले से ज़्यादा तेज़ कर दी गई है। पंरतु लगभग पंद्रह सौ किलोमीटर के इसके पूरे रूट में इसके आने व जाने के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप अपनी नई तेज़ गति के कारण यह ट्रेन अपने किन्ही दो स्टेशन के बीच की दूरी तो समय पूर्व तय कर लेती है। जबकि उसी स्टेशन से छूटने के लिए अपने छूटने के निर्धारित समय का इंतज़ार करना पड़ता है। गोया यदि इसकी पूरी समय सारिणी की पुनर्समीक्षा कर इसकी नई गति के अनुसार नई समय सारिणी निर्धारित की जाए तो यह ट्रेन कम से कम चार घंटे पूर्व अपनी पूरी यात्रा समाप्त कर सकती है। परंतु ऐसा होने के बजाए यह गाड़ी प्राय: निर्धारित समय से पूर्व स्टेशन पर पहुंचकर तथा अपने छूटने के समय की प्रतीक्षा कर यात्रियों का समय नष्ट करती है और रेल विभाग के कर्मचारियों का समय यात्रियों का कीमती वक्त तथा बहुमूल्य ईंधन व्यर्थ करती है।

हालंकि देश के तमाम प्रमुख रेल मंडल इस समय डबल ट्रैक से युक्त हो चुके हैं। परंतु अभी भी तमाम ऐसे रेल सेक्शन हैं जहां एक ही रेल ट्रैक है। परिणास्वरूप ऐसे सेक्शन पर एक रेलगाड़ी दूसरी रेलगाड़ी की प्रतीक्षा में एक स्टेशन पर बेवजह खड़ी रहती है और दूसरी ट्रेन की क्रॉसिंग की प्रतीक्षा करती रहती है। भारतीय रेल विभाग को कोशिश करनी चाहिए कि यथाशीघ्र पूरे देश में डबल ट्रैक बिछाए जाने की व्यवस्था हो ताकि रेल यात्रियों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में आसानी हो तथा रेल विभाग द्वारा बेवजह किसी टे्रन की प्रतीक्षा में ख़र्च होने वाली ईंधन,उर्जा व समय की भी बचत हो सके। उपरोक्त कमियां हालंकि रेल विभाग की बुनियादी कमियों को दर्शाती हैं। परंतु जब हम यह सुनते हैं कि भारतीय रेल बुलेट ट्रेन व मैट्रो रेल जैसी अत्याधुनिक व विश्वस्तरीय रेल व्यवस्था से सुसज्जित होने जा रही है फिर हमें उपरोक्त बुनियादी कमियों का $ख्याल ज़रूर आता है। रेल मंत्रालय को चाहिए कि देश में हाईस्पीड ट्रेन के सपनों को साकार करने से पूर्व कम से कम उपरोक्त बुनियादी कमियों को दूर करने का प्रबंध अवश्य करे।

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