लेखक परिचय

अन्नपूर्णा मित्तल

अन्नपूर्णा मित्तल

एक उभरती हुई पत्रकार. वेब मीडिया की ओर विशेष रुझान. नए - नए विषयों के लेखन में सक्रिय. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परस्नातक कर रही हैं. समाज के लिए कुछ नया करने को इच्छित.

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क्या आपको पता चला आज हम यहाँ किस विषय में बात कर रहे हैं. मैं आपको बता दूँ कि आज हम भारत के छोटे से मगर सुंदर राज्य सिक्किम की बात कर रहे हैं. सिक्किम भारत का गोवा के बाद दूसरा सबसे छोटा प्रदेश है. यह भारत का एक पर्वतीय राज्य है जो भारत के उत्तर पूर्व में है. सिक्किम का क्षेत्रफल 7 हजार वर्ग किलोमीटर है. इसकी जनसंख्या सारे राज्यों से कम, केवल 5,40,000 है. अंगूठे के आकार का यह राज्य पश्चिम में नेपाल उत्तर तथा पूर्व में चीनी तिब्बत स्वायत क्षेत्र तथा दक्षिण-पूर्व में भूटान से लगा हुआ है और इसके दक्षिण में पश्चिम बंगाल राज्य का दार्जिलिंग जिला है. सिक्किम में चार जिले हैं – उत्तर, पूरव, दक्षिण, और पश्चिम. गंगटोक राजधानी तथा सबसे बड़ा शहर है.

कहा जाता है कि बौद्ध संत गुरु रिन्पोचे ने 9 वीं सदी में सिक्किम दौरा किया, बौद्ध धर्म और राजशाही के पूर्वाभास युग की शुरूआत की. तदनुसार, नामग्याल राजवंश 1642 में स्थापित किया गया था. अगले 150 वर्षों में राज्य में नेपाली आक्रमणकारियों ने लिए लगातार छापे मारे और प्रादेशिक नुकसान देखा. बाद में, सिक्किम एक ब्रिटिश संरक्षित राज्य बन गया और 1975 में एक जनमत संग्रह के बाद भारत के साथ विलय हो गया.

अपने छोटे आकार के बावजूद सिक्किम भौगोलिक दृष्टि से काफ़ी विविधताएँ लिए हुए है. कंचनजंगा जो कि दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है, सिक्किम के उत्तरी पश्चिमी भाग में नेपाल की सीमा पर है और इस पर्वत चोटी को प्रदेश के कई भागो से आसानी से देखा जा सकता है. सिक्किम की विशेषतायें जिसमें इसका साफ सुथरा होना, प्राकृतिक सुंदरता एवं राजनीतिक स्थिरता शामिल हैं, जो इसे भारत में पर्यटन का प्रमुख केन्द्र बनाती हैं. यहाँ पर जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल का होता है. यहां अलग-अलग सभ्यता और संस्कृति के लोग रहते हैं.

सिक्किम के शहरी इलाके में सारे भारत के लोग आ कर बस गये हैं. लेकिन,  यहां मुख्यतः लिम्बू, लेपचास्, भूटिया, नेपाली, और तिब्बती लोग  हैं. यह अपनी संस्कृति और पहनावे का आज तक निर्वाह कर रहे हैं. भूटिया महिलाओं के पहनावे को खो या बख्खू कहतें हैं. सिक्किम के पारंपरिक पहनावे देखने में बहुत प्यारे लगते हैं. अंग्रेजी, नेपाली, लप्चा, भूटिया, लिम्बू तथा हिंदी आधिकारिक भाषाएँ हैं परन्तु लिखित व्यवहार में अंग्रेजी का ही उपयोग होता है. हिन्दू तथा ब्रज्यान धर्म सिक्किम के प्रमुख धर्म हैं. सिक्किम में सबसे मुख्य बात यह है कि काफी संख्या में लड़कियां – काम करती हुई, घूमती हुई, या स्कूल जाती हुई-दिखाई पद जाती हैं. यहाँ की महिलाओं में अन्य जगह की महिलाओं से ज्यादा आत्म विश्वास है. यह शायद मातृ प्रधान समाज का प्रभाव हो.

नाथुला दर्रे पर भारत चीन की सीमा है. नाथुला पास पर एक यादगार चिन्ह बना हुआ है. यह मार्च 2002 में बनाया गया था. यह 1962 में भारत -चीन लड़ाई और बाद के अन्य हादसों में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के यादगार में बनाया गया है. इसके ऊपर एक जगह पत्थर जड़ा हुआ है जिसमे लिखा हुआ है कि जवाहर लाल नेहरू 1 सितम्बर 1957 को यहां आये थे. यहां से चीन में बनी रोड भी दिखाई पड़ती है. पुराने समय में चीन भारत और पश्चिमी देशों के बीच रेशम का व्यापार हुआ करता था. यह कई रास्तों से जाता था. इन्हें ‘सिल्क रूट’ कहा जाता था. इसमें एक रास्ता नाथुला दर्रे से होकर जाया करता था. 1962 में, भारत– चीन युद्ध के बाद यह रास्ता बंद कर दिया. यह पुन: 6 जुलाई 2006 में खोला गया. इस रास्ते से पुनः व्यापार हो रहा है.

निकोलस नोतोविच एक रूसी अन्वेषक था. उसने कुछ साल भारत में बिताये. बाद में, उन्होने फ्रेंच भाषा में ‘द अननोन लाइफ ऑफ जीज़स नामक पुस्तक लिखी है. निकोलस के मुताबिक यह पुस्तक हेमिस बौद्घ आश्रम में रखी पुस्तक The life of Saint Issa पर आधारित है. उस समय हेमिस बौद्घ आश्रम लद्दाख के उस भाग में था जो कि भारत का हिस्सा था. हांलाकि इस समय यह जगह तिब्बत का हिस्सा है. यह आश्रम इसी तरह के सिल्क रूट पर था.

यहाँ बाबा हर भजन सिंह नाम का मंदिर है. यह वास्तव में समाधि है. बाबा हर भजन सिंह पंजाब रेजीमेंट में थे. 4 अक्टूबर 1967 को जब वे एक खच्चर को लेकर आ रहे थे तो उनका पैर फिसल गया जिसके कारण वह एक झरने में गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई. ऎसा कहा जाता है कि कुछ दिनों बाद वह अपने एक  सहयोगी के सपने में आये और कहा कि उनके नाम से एक समाधि बना दी जाए. यहां  उन्हीं की समाधि बनी है.

यहाँ बहुत अनेक झीलें, झरने और नदियाँ भी हैं, जो अपनी खूबसूरती के कारण बहुत प्रसिद्ध हैं. जिसमें से एक टोम्गो झील है. टोम्गो सिक्किमी भाषा का शब्द है और नेपाली में इसे छंगू झील कहा जाता है. इस झील के पास बहुत सारे याक हैं.  लोग इन पर चढ़कर सवारी करते हैं. यहाँ एक मंदाकिनी नाम का झरना भी है. इस झरने के बारे में कहा जाता है कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ फिल्म की हिरोइन मंदाकिनी इस झरने में नहाती है. इसलिए यह मंदाकिनी झरने के नाम से प्रसिद्ध है. यहाँ एक झरने का नाम ‘सात बहने’ है. सात बहने झरने में पानी पहाडी से सात चरणों में नीचे रास्ते तक गिरता है. इसलिए इसे सात बहने कहा गया है.

इस झरने के बारे में कहा जाता है कि किसी राजा की 7 राजकुमारियां थीं. उन्हें प्रकृति से प्रेम था और वे इसी झरने के रूप में हमेशा प्रकृति की हो गयीं. इसलिए इसका नाम ‘सात बहने’ पड़ा. बॉलीवुड की गमक यहाँ भी मौजूद है. शायद इसी का प्रभाव है कि यहाँ एक झरने का नाम अमिताभ बच्चन झरना है. बन झकरी झरना सुन्दर जगह है. यहाँ छूंगथंग नामक जगह है जो टिस्ता और लाचुंग नदी का सगंम है. सिक्किम भाषा में छू शब्द का अर्थ है, पानी. वहां झरने, नंदियां हैं इसलिए अक्सर जगहों, झरनो के नाम में छू शब्द जोड़ दिया जाता है.

यहाँ की प्रसिद्ध घाटियाँ युमसंगडॉन्ग और युमथांग हैं जो कि देखने योग्य हैं. युमसंगडॉन्ग लगभग 4663 मीटर 15300 फीट की ऊँचाई पर है यहाँ पर बहुत सी जगह बर्फ जमी रहती है. इस जगह की खूबसूरती कुछ अलग किस्म की है और इसे बयान कर पाना मुश्किल है. युमथांग घाटी फूलों की घाटी है. युमथांग घाटी युमसंगडॉन्ग और, के बीच तरह -तरह के लाल, नारंगी, बैगनी, पीले और सफेद रंग के फूल हैं. युमथांग घाटी के पास ही गर्म पानी का झरना है. इसमे नहाने से त्वचा की बीमारियां ठीक हो जाती है. इस पानी में सल्फर मिला हुआ है.

यहाँ नमग्याल तिब्बतोलोजी संस्थान है, जिसमें तिब्बती सभ्यता एवं भाषा पर शोध होता है. यह तीन मंजिले भवन में है. गैंगटॉक में तारगाड़ी  भी है. यह  बहुत ऊंची  है और इसमें गैंगटॉक शहर दिखाई पडता है. यहाँ का चिड़ियाघर भी देखने योग्य है. यह चिड़ियाघर कम और जंगल ज्यादा लगता है – जंगलो के बीच, उसी में जानवरों का रहने का स्थान. इनमें स्नो लेपर्ड , लाल पांडा,  हिमालयन पाम सिवेट, टाइगर बिल्ली, तिब्बती भेड़िया शामिल है. यहाँ के रास्तों में जगह जगह कुछ कमरे से बने हुए दिखाई पड़ते हैं. इनमें ड्रम रखे हुए होते हैं जो कि पानी के बहाव से घुमते हैं. इसे माने (यानी मंदिर) कहते है. सिक्किम में बौध धर्म की विशेषता है और इसमें बौद्घ धर्म से सम्बन्धित पवित्र पुस्तके रखी रहती है और ड्रम के बाहर बौद्घ धर्म के मंत्र लिखे हुए हैं जो पानी के बहाव से घूमते रहते हैं. बौद्घ आश्रम में भी इस तरह के गोले होते हैं जिसे लोग हाथ से घुमाते रहते है. यह उसी तरह की बात है जिस तरह से हिन्दू धर्म के लोग रोज सुबह उठकर राम नाम की माला जपते हैं. सिक्किम में इस तरह के मंदिर मरने के बाद मृतक की याद में बनाये जाते हैं.

सिक्किम के नागरिक हमारा देश के सभी मुख्य त्योहारों जैसे दीपावली और दशहरा मनाते हैं. बौद्ध धर्म के ल्होसार, लूसोंग, सागा दावा, ल्ह्बब ड्युचेन, ड्रुपका टेशी और भूमचू वे त्योहार हैं जो मनाये जाते हैं. लोसर – तिब्बती नव वर्ष लोसर, जो कि मध्य दिसंबर में आता है, के दौरान अधिकतर सरकारी कार्यालय एवं पर्यटक केन्द्र हफ़्ते भर के लिये बंद रहते हैं. पाश्चात्य रॉक संगीत यहाँ प्रायः घरों एवं भोजनालयों में, गैर-शहरी इलाक़ों में भी सुनाई दे जाता है. हिंदी संगीत ने भी लोगों में अपनी जगह बनाई है. विशुद्ध नेपाली रॉक संगीत, तथा पाश्चात्य संगीत पर नेपाली काव्य भी काफ़ी प्रचलित हैं. फुटबाल एवं क्रिकेट यहाँ के सबसे लोकप्रिय खेल हैं.

नूडल पर आधारित व्यंजन जैसे थुक्पा, चाउमीन, थान्तुक, फाख्तु, ग्याथुक और वॉनटन सर्वसामान्य हैं. भाप से पके और सब्जियों से भरे पकौडि़याँ, सूप के साथ परोसा हुआ भैंस का मांस, सूअर का माँस लोकप्रिय लघु आहार है. पहाड़ी लोगों के आहार में भैंस, सूअर, इत्यादि के माँस की मात्रा बहुत अधिक होती है. मदिरा पर राज्य उत्पाद शुल्क कम होने के कारण राज्य में बीयर, विस्की, रम और ब्रांडी इत्यादि का सेवन किया जाता है.

सिक्किम सचमुच ही एक दर्शनीय जगह है. यह भारत के प्रमुख प्रयत्न केन्द्रों में शुमार है. जिसकी सुन्दरता को लफ्जों में बयान कर पाना बहुत मुश्किल है.

 

 

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