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कौन पड़ेगा कितना भारी


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 12.58 करोड़ मतदाता भाग लेंगे। प्रदेश में मुख्य मतदेय स्थलों की संख्या 1 लाख 28 हजार 112 एवं मतदान केंद्रों की संख्या 87,313 है। कई स्थानों पर मतदेय स्थलों की संख्या बढ़ जाने के कारण वहां सहायक मतदेय स्थल बनाये जाएंगे। प्रदेश में 18-19 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 52.53 लाख है। ये पहली बार वोट डालेंगे। चुनाव आयोग की पैनी नजर के बीच सभी राजनैतिक दल अपने-अपने क्षेत्र में पूरे दमखम के साथ चुनावी रणविजय के लिये जी जान से जुट गये है। यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के साथ बीते छह सालों में जमकर खेल हुआ। मुलायम से लेकर मायावती तक के कार्यकाल के दौरान केंद्र ने सूबे को 8657 करोड़ रुपये दिए, लेकिन अफसरों व चिकित्सकों ने पांच हजार करोड़ की बंदरबांट कर ली। इसका राजफाश सीएजी की रिपोर्ट में हुआ इसी बात को चुनावी जंग का हथियार बनाने के लिऐ आतुर काग्रेस और भाजपा को दूसरी दिशा में मोडने के लिए सपा ने भी अपना दाव चला है।प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की सोच के कारण अंग्रेजी और कंप्यूटर शिक्षा का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी ने अब न केवल इनके समर्थन में खड़ी हो गई है, बल्कि पार्टी ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता की तर्ज पर छात्रों को मुफ्त लैपटाप और टैबलेट देने का ऐलान कर युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश भी की है। चुनाव के 24 पेज के घोषणापत्र में महिलाओं, युवकों, किसानों, छात्रों, गरीबों, मुसलमानों और रिक्शा चालकों तक की जरूरतों के साथ साथ प्रदेश में स्वच्छ शासन और बेहतर कानून व्यवस्था का वादा किया गया है। सपा ने कहा है कि प्रदेश में सरकारी सेवाओं में भर्ती की आयु सीमा 35 वर्ष होगी और 35 वर्ष की उम्र के बाद भी नौकरी न मिलने पर बेरोजगार नौजवानों को 12 हजार रुपये सालाना बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। घोषणापत्र में मायावती सरकार के पांच साल के भ्रष्टाचार की निश्चित समय सीमा में जांच कराने के लिए एक आयोग के गठन के साथ ही लोकायुक्त संस्था को बहुसदस्यीय करने की बात कही है। पार्टी ने मुसलमानों को जनसंख्या के आधार पर आरक्षण देने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में जेलों में बंद यूपी के बेकसूर मुस्लिम युवकों को रिहा कराने के वादे के साथ ही उन्हें मुआवजे के साथ इंसाफ देने का भरोसा दिलाया है। प्रदेश में 2006 के विधानसभा नतीजों पर नजर डाली जाये तो सत्ता रूढ़ बहुजन समाज पार्टी 206 सीटों पर समाजवादी पार्टी 97 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी 51 सीटों पर कांग्रेस 22 सीटों पर तथा अन्य दल 27 सीटों पर सिमट कर रहे गये थे। विगत 22 वर्षो बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी के सामने इस बार सहयोगी दलों कें नाम पर अपना एजेण्डा पूरा न कर पाने का बहाना नही है। इसलिए 30.43 प्रतिशत मत हासिल करके सबसे मजबूत दल के रूप में अपना दबदबा बनाये रखने वाली बहुजन समाज पार्टी ने अपने चुनावों की तैयारियॉ सत्ता मिलते ही शुरू कर दी थी। तब से लगातार सोशल इंजीनीरिंग के तहत बनी भाईचारा समितियों सक्रिय समर्पित कैडर 20 प्रतिशत दलित वोट बैंक के साथ सरकार की नई नई नीतियों उपलब्धियों को सरकारी तंत्र के सहारे गॉव गॉव में पहुचाने की मुहिम में करोड़ों रूपया झोकने के बाद सबसे आगे दिख रही है। फिर भी बसपा में हालात अच्छे नही दिखने के पीछे नम्बर दो के नेता बाबू सिंह कुशवाहा की विदाई से लेकर भ्रष्टाचार के आरोप में आधा दर्जन मंत्रियों के पद गवाने के साथ साथ आधा दर्जन से अधिक मंत्री लोकायुक्त की जांच के घेरे में होने तथा 110 से अधिक विधायकों तथा आधा दर्जन मंत्रियों की टिकट काटे जाने के कारण मचा घमासान चिन्ता सबब बन सकता है। ब्राह्मण चेहरे के नाम पर सतीश मिश्रा एवं उनके कुनबे को ही सारी मलाई मिलने के कारण ही ब्राह्मण समाज की नाराजगी दबंग क्षत्रियों को जब तक बसपा में रहे तब संत और बसपा छोड़ते ही शैतान मानने की प्रक्रिया के कारण क्षत्रिय समाज का असंतोष तथा पॉच साल में उपजी सत्ता की नाराजगी के साथ कांग्रेस द्वारा मुस्लिम आरक्षण के दाव से बचना होगा। बसपाई सेना में मुख्य सेनापति मायावती के बाद मात्र सतीश चन्द्र मिश्रा, नसीम उद्दीन सिद्दीकी और स्वामी प्रसाद मौर्या ही स्टार प्रचारक शेष बचने के कारण स्टार प्रचारकों का टोटा दिख रहा है। विपक्ष द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों में माया सरकार को बुरी तरह घेरने के कारण चुनावी परिणामों पर प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है। एक सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा किये सर्वेक्षण में 9 प्रतिशत वोटों के खिसक जाने की बात सामने आने से बसपा के लिये खतरे की घंटी बचती नजर आ रही है। इसीलिऐ रंगनाथ मिश्र को बहुजन समाज पार्टी ने फिर से अपना प्रत्याशी बनाने की घोषणा की। उन्हें मिर्जापुर से ही उम्मीदवार बनाया गया है। उत्तर प्रदेश कें विभिन्न क्षेत्रों का सर्वेक्षण में जो तस्वीर उभर कर आयी है। उसमें बसपा सिमटती नजर आ रही है। लेकिन राजनैतिक दांव पेच के जाल में उलझे मतदाताओं के वोट आखिर किसके पाले में अधिक पड़ते है कहना इतना आसान नहीं है इसीलिऐ बसपा प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या का दावा है कि उनकी पार्टी को 250 सीटें मिलेगी खारिज करना उचित नही है। चुनावी ऊट किस करवट बैठेगा यह तो मतगणना के बाद ही तय होगा।

लोकसभा चुनाव में प्रदेश की दूसरे नम्बर की पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बीस वर्षो का अपना वनवास समाप्त करने के लिये पूरे दमखंभ के साथ चुनावी जंग में उतर गयी है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने विगत दो वर्षो में युपी को चुनावी दंगल के लिये मथडाला है। गाँव -गाँव और पाँव-पाँव के नारे के साथ हर गरीब के आँगन में दस्तक देकर बसपा और सपा को उसके ही गण में जबरदस्त तरीके से घेरा है। कांग्रेस ने प्रदेश में अपनी सरकार लाने के लिये लोकसभा चुनाव के परिणाम आते ही अपनी रणनीति तय कर दी थी। केन्द्रीय मंत्री मण्डल में बेनीप्रसाद वर्मा, श्रीप्रकाश जय सवाल सलमान खुर्शीद, जितिन प्रसाद, आर.पी.एन. सिंह, प्रदीप जैन आदित्य की ताज पोसी के साथ दलित नेता पी.एल. पूनिया को अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का चेयरमैन बनाकर अपने छत्रपों की सेना तैयार की प्रदेश को दस जोन में बॉटकर अन्य राज्यों के प्रभारी तैनात करके लगातार मानीटर्रिग के साथ राहुल गांधी के सम्पर्क में नेतृत्व में सम्पर्क अभियान केन्द्रीय मंत्रियों और सांसदों के द्वारा जन जागरण अभियान किसानों मजदूरों तथ बुनकरों के लिये मनरेगा, बुनकर पैकेज, बुन्देलखण्ड पैकेज, मुस्लिमों के लिये आरक्षण तथा भोजन का कानूनी अधिकार बिल के साथ-साथ प्रदेश में चल रही केन्द्र चल रही 16 जनकल्याणकारी योजनाओं पर निरन्तर नजर रखने के साथ परम्परा गत मुस्लिम दलित ब्राहा्रणों के वोटों की वापसी के लिये सम्मेलनों तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद से चुनावी गठबंधन का दाँव खेला है। कांग्रेस की रणनीति सपा को हर हाल में नुकसान पहूँचाने की है। जहां वह कम वोटों के अंतर से सपा की हार का कारण बन सकती है। कांग्रेस ने तो प्रत्याशियों के चयन में ही समाजवादी पार्टी से जुड़े पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं को तवज्जो देकर अपनी रणनीति के तहत मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा, मैनपुरी, औरैया, फर्रुखाबाद और कन्नौज जैसे जिलों में यादव बिरादरी के नेताओं को पार्टी प्रत्याशी बनाकर भी पार्टी ने अपने मिशन को आगे बढ़ाया है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी प्रदेश की चुनावी सभाओं में मुख्यमंत्री मायावती के साथ ही मुलायम की पिछली सरकार की गलतियों को गिनाना भी पार्टी की रणनीति का ही हिस्सा है। उन सीटों पर उन्हीं सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा जिन पर सपा के लिए जवाब देना भारी पड़े। कांग्रेस पार्टी किसी और को समर्थन से ज्यादा, दूसरे के ही सहयोग से सही अपनी सरकार बनाने को ज्यादा तवज्जो देगी। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में चुनाव बाद दूसरे दल से मिलकर सरकार नहीं बना पाती तो प्रदेश में राष्ट्रपति शासन और फिर नये चुनाव का विकल्प होगा। कासगंज उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में कांग्रेस को विजयी बनाने की कोशिशों में जुटे पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने खाद्य सुरक्षा विधेयक की आलोचना करने पर राज्य की मुख्यमंत्री मायावती को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के लागू होने के बाद देश में कोई भी गरीब भूखा नहीं सोएगा। इसके तहत हर परिवार को 35 किलोग्राम अनाज दिया जाएगा, लेकिन मायावती कहती हैं कि इससे किसी को फायदा नहीं होगा। इसमें उमड़ी भीड़ से उन्होंने सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा, मैं गांव में, गरीब के घर, दलित के घर यूं ही नहीं जाता, वहां भोजन ऐसे ही नहीं करता, उनके घर का गंदा पानी पीने के पीछे कुछ और कारण भी हैं। मायावती पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री किसी गांव में किसी गरीब के घर नहीं जातीं, इससे गरीब जनता के दर्द का कैसे अहसास किया जा सकता है? राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार जब मनरेगा योजना लाई थी तब बसपा मुखिया मायावती ने सवाल उठाए थे कि पैसा कहां से आएगा, लेकिन जब किसी बड़े व्यक्ति को जमीन की जरूरत होती है तो सरकार जमीन छीन लेती है। उसके लिए कोई नहीं पूछता कि धन कहां से आएगा। कांग्रेस ने इंतजाम किया देशभर में मनरेगा योजना लागू हुई। करोड़ों रुपया भेजा, मगर यूपी को मदद के लिए दिए गए हजारों करोड़ रुपये बसपा का हाथी हजम कर गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने आपके घरों में भूख नहीं देखी है। इसलिए वह बिना सोचे समझे कहती हैं कि खाद्य सुरक्षा विधेयक से किसी का फायदा नहीं होगा। सचाई यह है कि इससे देश के हर गरीब का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि हम भ्रष्टाचार पर पूरी तरह सजग हैं। इसीलिए यूपीए सरकार ने सूचना का अधिकार देकर भ्रष्टाचार को रोकने का क्रांतिकारी कदम उठाया था। इसके पीछे जनता को हक देने का मकसद था। प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह मुस्लिमों को मुसलमानों को साढ़े चार फीसदी आरक्षण देने की चर्चा करते हुए सचेत किया कि सपा ने मुसलमानों को सिर्फ लड़ाने के अलावा उन्हें कुछ नहीं दिया। वे बोले कि मौका परिवर्तन का है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा केंद्र सरकार द्वारा राज्य विभाजन के प्रस्ताव पर उठाए सवाल उचित हैं। साथ ही आरोप लगाया कि इस मसले पर मुख्यमंत्री मायावती की नीति व नीयत ठीक नहीं है। विस चुनाव नजदीक होने के कारण बसपा प्रमुख ने आनन फानन में प्रदेश बंटवारे का दांव केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए ही चला। इस मुद्दे पर सदन में सार्थक बहस कराने के अलावा जनमत संग्रह भी कराया जाना चाहिए था। कांग्रेस छोटे राज्यों की विरोधी नहीं है। अब तक बने 14 नए प्रदेशों में से 11 कांग्रेस के शासनकाल में ही गठित किए गए। इसके अलावा बुंदेलखंड व पूर्वाचल के गठन का प्रस्ताव कांग्रेस विधायकों द्वारा पहले भी लाया जा चुका है, लेकिन तब बसपा की ओर से कोई पहल नहीं की गई।

मुलामय सिंह के सबसे ताकतवर साथी रहे बेनी प्रसाद वर्मा, रसीद मसूद, राजबब्बर तथा मायावती के साथी पी.एल. पूनिया, कांग्रेस के प्रमुख योद्धा बनकर उभरे है। इनके साथ ही कांग्रेस के स्टार प्राचरकों में डा0 रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, सलमान खुर्शीद, सलीम शेरवानी की मौजूदगी के बीच प्रियंका गांधी भी राहुल की मुहिम को गति देने के लिऐ प्रचार की कमान संभालने को तैयार है। अन्य दलों से कांग्रेस को सबसे आगे ले जाने की राह दिखाती है। सर्वेक्षण में कांग्रेस उत्तर प्रदेश मे 2012 के चुनाव में अच्छी सीटें जीतती नजर आती है।

प्रदेश की नम्बर दो पार्टी का तमंगा हासिल करने वाली समाजवादी पार्टी के लिये उत्तर प्रदेश में सबकुछ अब ठीक ठाक नजर नही आ रहा है। सपा सुप्रीमों मुलामय सिंह यादव ने पहली बार विधानसभा चुनाव तैयारियॉ काफी पहले से शुरू कर दी। जन आन्दोलनों के साथ टिकटों की घोषणा पहले करकें बाजी मारने की जो चाल चली वह उल्टी पड़ती नजर आ रही है। इसकी बानगी सुलतानपुर जनपद के लम्बुआ विधानसभा सीट पर घोषिण उम्मीदवार का नाम आठवी बार बदल जाने के कारण जाना जा सकता है। है।प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी में भितरघातीयो पर नजर रखने के लिऐ जासूसो की सेवा लेकर जता दिया है कि पार्टी सबसे पीले है।।टिकटों को लेकर समाजवादी पार्टी में पारिवारिक कलह अब पार्टी सांसद बाल कुमार पटेल (मिर्जापुर) और आरके सिंह पटेल (बांदा) के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गयी हैं। सांसदों के बीच चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र की सीट पर रस्साकसी चल रही है। जहां सपा ने पहले बालकुमार के भतीजे वीर सिंह पटेल को टिकट दे दिया था लेकिन बाद में उनकी जगह आरके सिंह के बेटे सुनील सिंह पटेल को प्रत्याशी बना दिया। वीर सिंह पटेल ने समर्थकों के साथ सपा मुख्यालय पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन भी किया लेकिन फिलहाल पार्टी के बड़े नेता इस विवाद पर मौन हैं। बांदा-चित्रकूट क्षेत्र में बालकुमार व आरके सिंह पटेल के बीच में पहले से ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। इस बार विधानसभा चुनाव के लिए चित्रकूट से बालकुमार ने भतीजे वीर सिंह पटेल (ददुआ के पुत्र) को आगे किया था। वीर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। प्रतापगढ़ के पट्टी क्षेत्र से बालकुमार ने बेटे राम सिंह के लिए टिकट की मांग की थी। सपा ने दोनों का टिकट फाइनल भी कर दिया था। एक हफ्ते पहले सपा ने चित्रकूट का टिकट संशोधित करते हुए सुनील को प्रत्याशी बना दिया और वीर सिंह को पट्टी का टिकट पकड़ा दिया गया। बालकुमार खेमे ने सपा के इस फैसले को व्यक्तिगत हमले के रूप में लेते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर

दिया। चित्रकूट में कई बार आरके सिंह पटेल का पुतला फूंका जा चुका टिकटों के बटवारे की महाभारत ने समाजवादी पार्टी के कई क्षत्रपों को सपा से नाता तोड़ने को विवश कर दिया। सर्वाधिक विद्रोह की स्थिति इटावा,ऐटा, मैनपुरी, तथा सुलतानपुर में देखने को मिली है। सपा सुप्रीमों ने 2012 के चुनावी जंग जीतने के लिये कमान अपने बेटे अखिलेश सिंह यादव के हाथों में सौप कर उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी है। आन्दोलनों और क्रांतिरथ के पहुँचने पर जुटी भीड़ अगर वोटों में तब्दील हो जाती है तो समाजवादी पार्टी को प्रदेश की सत्ता में लौटने का सपना पूरा होने में देर नही लगेगी। सपा जातिगत समीकरणों के बल पर 2012 के चुनाव जीतने की जोर अजमाईस में नाराज आजम खॉ को पार्टी में वापिस लाके छिटकते मुस्लिम आधार को जोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन आजम के आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे ताकतवर मुस्लिम नेता रसीद मसूद के विद्रोह के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में पीस पार्टी तथा मुस्लिम उल्लेमा कांउसिल ने खतरे की घंटी बजा दी है। सपा के पास अपने क्षत्रपों के रूप में स्टार प्रचारकों में शिवपाल सिंह यादव तथा राजा भईया के अलावा और कद्दावर नेता के न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यादव मुस्लिम गठजोड़ के बल पर तीन बार सत्ता हासिल करने वाले मुलायम सिंह यादव के लिये 2012 का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव ने प्रदेश के बदतर हालात के लिए कांग्रेस तथा बसपा को जिम्मेदार मानते हुए दोनों दलों के नेताओं पर करारे प्रहार करते रहे है। राहुल गांधी को राजनीति में अनाड़ी बताते हुए कहा कि राहुल और उनकी मां सोनिया गांधी इतने शक्तिशाली हैं तो अमेठी-रायबरेलीका विकास करा ही सकते है। राहुल का विकास का वादा सिर्फ चुनावी स्टंट है। राहुल गांधी द्वारा सपा सरकार में विकास न होने की बात कहे जाने पर यादव ने कहा कि सपा सरकार के दौरान विकास दर सात फीसदी रही। केंद्र सरकार ने धन नहीं दिया। सरकार ने अपना राजस्व बढ़ाकर विकास कार्यो में धन की कमी नहीं आने दी। कन्या विद्या धन, बेरोजगार भत्ता तथा अन्य जनहितकारी योजनाएं शुरू करके गरीबों का भला किया। नेता प्रतिपक्ष यादव ने कहा कि जब उनकी दी हुई तहरीर पर एफआइआर दर्ज नहीं हुई तो आम जनता की हालत क्या होगी। इस बार मुलामय सिंह के साथी रहे बेनी प्रसाद वर्मा, राजबब्बर, अमर सिंह और रसीद मसूद उनके साथ नही है। छोटे लोहिया जानेश्वर मिश्र भी इस दुनिया से विदा हो चुके है। इस लिऐ इस संकट काल में अकेले अपने दम पर चुनावी रण की वैतरणी पार करने की चुनौती पहाड़ की तरह उनके सामने खड़ी है। देखना है कि सपा इस चुनौती को कैसे मुकाबला करती है। मुलायम सिंह यादव ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। बसपा को लेकर जनता में गुस्सा है। यह चुनाव न सिर्फ समाजवादी पार्टी की राज्य में सरकार बनाने के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि 2014 में होने वाले दिल्ली के चुनाव में समाजवादी पार्टी की महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका भी तय करेगी। सर्वेक्षण में समाजवादी पार्टी की सीटें अपने दम पर सत्ता हासिल करती नजर नहीं आती है। वही दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव का दावा है कि समाजवादी पार्टी दो सौ से अधिक सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत की सरकार जनता को देगी ताकि माया के आतंक और शोषण से मुक्ति मिल सके।चुनावी घोषणा पत्र मे सौगातो की झडी लगा चुकी सपा संगठन के तौर पर सपा की मजबूती पर संदेह नहीं किया जा सकता है लेकिन चर्तुकोणीय मुकाबले में जनता के सिंघासन पर बिठाती है यह तो वोटर ही तय करेगें। उधार के नेताओं से चुनावी जंग जीतने के लिये मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश की कमान सम्भालने वाली उमा भारती के सहारे नय्या पार लगाने की कवायद कर रही भारतीय जनता पार्टी की विश्वसियनियता का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। 51 सीटें लेकर तीसरे पायदान पर रहने वाली भापा को चौथे पायदान पर माना जा रहा है। जनस्वाभिमान यात्राऐं निकालकर कलराज मिश्र और राजनाथ सिंह के सहारे क्षत्रीय तथा ब्राह्मण मतों के साथ अल्पसंख्यक आरक्षण के कारण पिछडो के हको पर डाका बता कर मुकाबले के आने को तैयार भाजपा मे चिन्तन और मथंन की दौर ही चल रहा है। मुद्दे और झण्डे गायब है। भाजपा कभी राम मन्दिर का राग अलापती है तो कभी छोड़ती है। कभी गंगा का नारा देती है तो कभी अन्ना के साथ खड़ी होती है। तो कभी अन्ना से किनारा करती है। माया के सौ घोटाले की पुस्तिका पेश करती है तो कभी लगता है कि माया को कम सीटें मिली तो भाजपा सहारा देगी। इन द्वंदों के चलते भाजपा की स्थिति उत्तर प्रदेश में धोबी के गधे की तरह हो गयी जो घर का ना रहा ना ही घाट का । इन हालातों में 2012 के चुनाव में भाजपा जब तक अपनी नीति और रीति साफ नही रखेगी तब तक रण विजय का सपना सार्थक होना कठिन ही है। भाजपा के सामने कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण का एक ऐसा मुद्दा फेक दिया है जिसको लपक कर भाजपा चुनावी वैतरणी पार कर सकती है। क्षत्रपों के नाम पर भाजपाई सेना में कलराज मिश्र, विनय कटियार, ओम प्रकाश सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, उमा भारती जैसे तेज तररार अनेक चेहरे है। जो भीड़ जुटाने के साथ-साथ अपनी वाणी से जनमत को प्रभावित कर सकते है। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती कहती है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव विकास और सुशासन पर लड़ा जाना चाहिए । मै गरीब के घर की बेटी हूँ। मैं गाय और गरीब की इज्जत करती हॅू। मेरा अपमान गरीब का अपमान है। कृपा कर विरोधी मुझे गाली चुनाव के बाद दें। इस समय उत्तर प्रदेश की जनता को मुद्दों से न भटकाए।यूपी का ये चुनाव विकास के मुद्दों पर हो, विकास की बात हो, विकास पर राजनीति हो। जो उत्तर प्रदेश की जनता के लिए सबसे अहम् है। मुद्दाविहीन चुनाव विकास के मुद्दों पर हो भाजपा हर हाल मे इसी कोशिश में लगी है सरकार की नाक के नीचे हुए घोटाले की अनदेखी में बसपा,सपा, कांग्रेस, को घसीटने से स्थिति भी भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहतर होगी।

 

 

 

 

January 24th, 2012 | 185 views | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post
Category: विधानसभा चुनाव | Tags: bjp, BSP, Congress, U.P. Election, UttarPradesh, उत्तर प्रदेश, विधानसभा चुनाव
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    सुरेन्द्र अग्निहोत्री
    सुरेन्द्र अग्निहोत्री

    ललितपुर (उ0प्र0) मे जन्म, बी.ए., फिल्म एप्रीशियेशन कोर्स तक शिक्षा. प्रकाशनः कहानी, बालकहानी, बाल नाटक, व्यंग, कविताऐें तथा फीचर्स एवं राजनैतिक तथा सामाजिक रिपोर्ट. धर्मयुग, नवनीत, मनोरमा, सुलभ इण्डिया, उत्तर प्रदेश मासिक, हैलो हिन्दुस्तान, लोकमाया, अभय छत्तीसग़ढ, इतवारी पत्रिका, हिमप्रस्त, इस्पात भारती, सुगंध, प्रेरणा, प्रगति वार्ता, गुजंन, डायलोग इण्डिया, शुक्रवार, लोकायत, मध्यप्रदेश सन्देश, मड़ई, हरियाणा संवाद, प्रथम इम्पेक्ट, इण्डिया न्यूज, बुमेन ऑन टाप, प्रगति वार्ता, जागृति इण्डिया,विचारसाराशं, सार्त, मधुरिमा; रचनाकार आदि पत्रिकाओं के साथ नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक ट्रव्यून, पंजाब केसरी, नवज्योति, दो बन्धु, नवभारत, लोकमत, पूर्वाचंल प्रहरी, गांडीव, रांची एक्सप्रेस, प्रभात खबर, चौथी दुनिया, सन्डेमेल, महामेधा, आचरण, दैनिक कौसर, प्रातःकाल, श्री इण्डिया, जनप्रिय, भारतरंग टाइम्स, सत्तासुधार आदि में प्रकाशन। कृतियाँ : उ0प्र0 सिनेमा से सरोकार हंसवाहिनी पत्रकारिता पुरस्कार से इलाहाबाद में सम्मानित रामेश्वरम हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार 2007 से सम्मानित सम्प्रतिः लखनऊ ब्यूरो प्रमुख, दैनिक भास्कर झांसी/ नोएडा। सम्पर्कः राजसदन 120/132 बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ। मोबाइलः 9415508695, 05222200134
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