लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन किशोर सिन्हा

महात्मा गांधी ने कांग्रेस को लोकप्रियता के चरम शिखर पर पहुंचाया। उन्होंने इसके माध्यम से देश को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त भी कराया। लेकिन क्या उन्होंने सपने में भी सोचा था कि उनकी कांग्रेस बोफ़ोर्स, २-जी स्कैम, राष्ट्रमंडल घोटाला, कोलगेट जैसे घोटालों में आकण्ठ डूब जाएगी? जबतक कांग्रेस गांधीजी के आभामंडल के आस-पास थी, देश के लिए काम किया। सरदार पटेल, डा. राजेन्द्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई जैसे चरित्रवान नेता कांग्रेस की ही देन थे। लेकिन जब से कांग्रेस ने चरित्र को बाहर का रास्ता दिखाया, तब से यह राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, नारायण दत्त तिवारी, चिदंबरम, वाड्रा, अभिषेक सिंघवी और दिग्विजय सिंह की पार्टी बनकर रह गई। भारत की ऐसी कौन सी राजनीतिक पार्टी है जो अपने घोषणा पत्र में घोटालों और भ्रष्टाचार की वकालत करती है? कौन पार्टी वंशवाद को अपना नैतिक अधिकार मानती है? सबके सिद्धान्त अच्छे प्रतीत होते हैं। उनके कार्यक्रम भी लोक लुभावन हैं। फिर ऐसा कौन सा कारण है कि कोई भी पार्टी भ्रष्टाचार को रोकने में सफल नहीं हो पा रही है? कारण एक ही है – चरित्र की कमी। विवेकानन्द ने कहा था – I want a man with capital M. इस समय capital M वाले मनुष्यों की समाज के हर क्षेत्र में कमी हो गई है जिसका परिणाम घोटाले, भ्रष्टाचार, बलात्कार, लूटपाट, आगजनी, दंगा इत्यादि के रूप में सबके सामने है। क्या पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, मनरेगा, मिड डे मिल, वृद्धावस्था पेन्शन, पंचायती राज, सांसद/विधायक निधि की योजनाएं गलत हैं? शायद नहीं। लेकिन भ्रष्टाचार के घुन ने इन्हें इतना खोखला कर दिया है कि सभी योजनाएं लक्ष्य से भटक गईं हैं। स्वराज प्राप्ति के पश्चात सुराज कि अत्यन्त आवश्यकता थी और इसके लिए अधिक चरित्रवान और निष्ठावान कार्यकर्त्ताओं की आवश्यकता थी, लेकिन दुर्भाग्य से देश में चरित्र निर्माण करने वाले संगठनों की भारी कमी होने के कारण हम चरित्रवान नागरिकों का निर्माण नहीं कर पाए। ले-देकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी एक ही संस्था देश को उपलब्ध हुई जिसने चरित्रवान कार्यकर्त्ताओं की कई पीढ़ियों का निर्माण किया। राजनीति और इसके इतर भी इसके कार्यकर्ताओं ने अपने कार्य से राष्ट्र की महत्तम सेवा की है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण अडवानी ने अपने अपने क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए, परन्तु आज की तिथि में येदुरप्पा, मधु कोड़ा और नीतिन गडकरी के क्रिया कलापों को देख मन में यह संशय घर करने लगता है कि इस महान संगठन के प्रशिक्षण में भी कही कोई दोष तो नहीं?

आजकल हर आदमी कुछ दिन समाज सेवा करता है, आन्दोलन चलाता है और फिर राजनीति में घुस जाता है। हम यह भूल जाते हैं कि राजनीति से अधिक श्रेष्ठ समाज सेवा है। समाज श्रेष्ठ होगा तो सरकारें स्वयं ही श्रेष्ठ बन जाएंगीं। स्व. लोकमान्य तिलक अपने समय के सर्वमान्य राजनेता थे। वे अपने युग की राजनीति के शिखर पुरुष थे। उनका नारा – स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, वन्दे मातरम की तरह देश पर मर मिटने वालों के लिए ध्येय वाक्य था। उन्हीं दिनो तिलक जी से किसी पत्रकार ने पूछा –

“यदि इन कुछ वर्षों में स्वराज मिल गया तो आप भारत सरकार के किस पद को संभालना पसंद करेंगे?”

इस सवाल को पूछने वाले ने सोचा था कि तिलक महाराज उत्तर में अवश्य प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की मंशा जाहिर करेंगे। लेकिन उसे लोकमान्य तिलक का उत्तर सुनकर अत्यन्त हैरानी हुई। बाल गंगाधर तिलक ने कहा था –

” मैं तो देश के स्वाधीन होने के पश्चात स्कूल का अध्यापक होना पसंद करूंगा क्योंकि देश को सबसे बड़ी आवश्यकता अच्छे नागरिक एवं उन्नत व्यक्तियों की होगी जिसे शिक्षा एवं समाज सेवा के द्वारा ही पूरा किया जाना संभव है।”

हजार वर्षों की गुलामी के कारण अपना सबकुछ खो बैठने वाले समाज में अनगिनत बुराइयों के साथ नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक पिछड़ेपन को दूर किया जाना आज की तिथि में सबसे बड़ा काम है और इसे किसी राजनीति के द्वारा नहीं बल्कि सामाजिक सत्प्रवृतियों के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। समाजसेवा के लिए अनगिनत क्षेत्र हैं। निरक्षरता की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। प्रौढ़ों और महिलाओं को पढ़ाने की सुध किसे है? सरकार तो अपने वर्तमान शैक्षणिक ढांचे को चलाने में ही चरमरा रही है। ऐसी स्थिति में शिक्षा की सामयिक चुनौती को समर्पित लोकसेवी ही पूरी कर सकते हैं। खर्चीली शादियां, तंबाकू, शराब, भांग, अफ़ीम, दिखावा आदि में समाज के हजारों लाखों करोड़ नित्य ही व्यर्थ जा रहे हैं। यह धन २-जी स्कैम और कोलगेट से ज्यादा है। यदि इस धन को बचाया जा सके तो न जाने कितनी राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के साथ अनगिनत परिवारों की खुशियां वापस लौट सकती हैं।

जात-पांत के नाम पर हजारों टुकड़ों में बंटे-बिखरे समाज को फिर से एकता-समता के सूत्र में बांधने की आवश्यकता है। गृह उद्योगों के अभाव में देश की महिलाएं एवं वृद्ध निठल्ला जीवन जीते हैं। यदि इन्हें विकसित किया जाय तो घरों के साथ देश की आर्थिक स्थिति भी सुधर सकती है। देश का युवा वर्ग आज के सिनेमा और टीवी चैनलों से दिशा प्राप्त कर रहा है। सार्थक साहित्य का सृजन ठप्प है। ये पंक्तियां समाज सेवा की अनगिनत जरुरतों में से कुछ की ही चर्चा करती हैं। इनके अतिरिक्त और भी अनेकों कार्य करने को पड़े हैं जिन्हें हाथ में लेकर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है। लेकिन ये सारे कार्य करेगा कौन? सोनिया या अरविन्द केजरीवाल?

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16 Comments on "राजनीति ही क्यों"

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ramnarayan suthar
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One problem is that Mukeshbhai controls GoI. Bigger problem is that Rockefellar controls Mukeshbhai, they both control Supreme Court judges. And much bigger problem is — Arvind Gandhi will refuse to mention that Rockefellars run GoI and Supreme Court judges, because his media-coverage also comes from Rockefellars !!! Pls read http://educate-yourself.org/ga/RFcontents.shtml This is tip of iceberg The whole story is 1. Because of bettwr courts, administration etc USA is far ahead in technology and weapons than India and rest of the world. 2. Indian Elitemen such as Mukeshbhai are now controlled by Rockefellers etc because Ambani etc depend on Rockefellers… Read more »
आर. सिंह
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Mr. Ram Narayan Suther I read the reference and tried to understand the whole gambit, but I could not understand your solution. If everybody and everything is controlled by US and Indian elites (Further you have added Chinese elites as well) then what’s the solution? Do you think these elites(US and Indian) have not influenced Congress or BJP? In my opinion they have. In such circumstances you have come with some vague solution. Who will prepare such drafts and to whom will he give?.Activists had been putting enormous efforts to pressurize the government since many years, especially in last two… Read more »
आर. सिंह
Guest
Mr. Ram Narayan Suther I read the reference and tried to understand the whole gambit, but I could not understand your solution. If everybody and everything is controlled by US and Indian elites (Further you have added Chinese elites as well) then what’s the solution? Do you think these elites(US and Indian) have not influenced Congress or BJP? In my opinion they have. In such circumstances you have come with some vague solution. Who will prepare such drafts and to whom will he give?.Activists had been putting enormous efforts to pressurize the government since many years, especially in last two… Read more »
आर. सिंह
Guest
राम नारायाह सुथर जी आपने बहुत कुछ लिखा है,पर एक बात भूल गए कि मैंने पहले ही लिख है कि किसी भी वर्तमान राजनैतिक दल से मैं परिवर्तन या बदलाव की उम्मीद नहीं रखता,अतः भारतीय स्वाभिमान ट्रस्ट वर्तमान परिस्थिति में बदलाव कैसे लायेगा,यह मेरी समझ से बाहर है।रही बात केजरीवाल टीम के बहुमत में आने की तो मुझे उसकी ज्यादा उम्मीद नहीं है,पर उनकी उपस्थिति भी अगर दर्ज हो जाती है तो यह त्रस्त आम आदमी की जीत होगी। मेरे विचार से उनको जब तक बहुमत न मिले तब तक उनको एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका से आगे कुछ नहीं… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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डा.राजेश कपूर
केजरीवाल पर संदेह करने के कारण…………………………… १. मीडिया द्वारा उसे अत्यधिक महत्व दिया जाना, जबकि उसका ऐसा ऊंचा स्तर और भूमिका नहीं है. अन्ना, बाबा राम देव, आर्ट औफ लीविंग, संघ आदि अनेक व्यक्ती और संगठन हैं जो अनेकों महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं, पर मीडिया उनपर तो कभी ध्यान नही देता. केजरीवाल पर इतनी क्रिपा के कुछ तो गुप्त कारण हैं. राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका किसी से छुपी हुई नहीं है. वह तो पूरी तरह सोनिया अर्थात व्यापारी कम्पनियों अर्थात भारत विरोधियों की मुट्ठी में है. २. केजरीवाल पर संदेह का दूसरा बडा कारण यह है कि…… पर्दे के… Read more »
आर. सिंह
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हो सकता है कि डाक्टर राजेश कपूर सही साबित हों और हमारे जैसे लोग जो केजरीवाल का केवल आज ही खुला समर्थन नहीं कर रहे हैं ,बल्कि विभिन्न माध्यमों द्वारा उनको को पहले भी सलाह दे रहे थे कि राजनैतिक दल बनाने के अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग नहीं है,गलत सिद्ध हों।पर अब परिस्थितियाँ इस तेजी से करवट बदल रही हैं,कि विवाद में न पड़कर अब धरातल पर कुछ ठोस कार्य करने की आवश्यकता है।जहां तक मेरे निजी विचारों का प्रश्न है जैसा मैंने पहले भी कहा है कि मैं पिछले छप्पन सत्तावन वर्षों से विभिन्न दलों के कार्य कलाप देख… Read more »
आर. सिंह
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सिन्हा जी केजरीवाल ने कासाब के फांसी के विरुद्ध आवाज नहीं उठाई थी,बहुत से ऐसे लोग भी हैं ,जो फांसी की सजाके सख्त खिलाफ हैं,उन्होंने तो कासाब की फांसी के खिलाफ भी आवाज उठाई थी,फिर भी मैं उनको देशद्रोही नहीं मानता,क्योंकि फांसी की सजा अगर उनके सिद्धांत के विरुद्ध है तो वे ऐसी आवाज अवश्य उठाएंगे,अगर इसी बात पर किसी का चरित्र संदिग्ध हो जाए तो शायद बहुतसे ईमानदार और संविधान का पालन वाले भी इस दायरे में आ जायेंगे।उसी तरह आस्तिकता और सनातन धर्म में वर्णित देवी देवताओं के प्रति जिसमें आस्था नहीं है आपलोगों की परिभाषा के अनुसार… Read more »
Rajendra
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बिपिनजी, मैं आपके इस विचार से सहमत नहीं की गांधीजी ने कांग्रेस के माध्यम से देश को स्वतंत्र कराया. हाँ, कांग्रेस के माध्यम से देश को खंडित अवश्य किया. कांग्रेस में पार्टी के कोष में घपले गांधीजी के जीवन काल में ही होने लगे थे. नेहरु को प्रधानमंत्री बना कर उन्होंने एक अत्यंत अलोकतांत्रिक कार्य किया था. बिपिनजी,संघ की प्रशिक्षण प्रणाली में दोष नहीं है. दोष है प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात, प्रशिक्षित व्यक्ति की अपनी प्रवृत्ति का. नितिन गडकरी पर आरोप, व्यवसाय में धन लगाने की प्रक्रिया को लेकर हैं, आर्थिक रूप से भ्रष्ट होने के नहीं. और हाँ,… Read more »
Bipin Kishore Sinha
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राजेन्द्रजी, भाजपा दीनदयाल उपाध्याय, अटलजी और आडवानीजी की पार्टी है और संघ उसका अभिभावक है। याद कीजिए नरसिंहा राव के प्रधानमंत्रीत्व में आडवानीजी पर हवाला-भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। उन्होंने अविलंब् लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था और यह भी घोषणा की थी कि जब तक वे आरोपों से मुक्त नहीं हो जाएंगे, कोई चुनाव नहीं कड़ेंगे। आरोप झूठे थे, सिद्ध नहीं हो पाए। आडवानी जी ने उसके बाद चुनाव लड़ा। क्या इस उच्च परंपरा का पालन गडकरी नहीं कर सकते? इससे तो आप सहमत हैं ही कि येदुरप्पा संघ के स्वयंसेवक रहे हैं। रही बात मधु कोड़ा कि तो… Read more »
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