More
    Homeसाहित्‍यकहानीएक सत्य लघु कथा

    एक सत्य लघु कथा

    गुरुग्राम शहर के डी एल फेस वन में एक दम्पति रहते है | जिनकी उम्र लगभग 65 तथा 70 के बीच है उनके दो पुत्र जिनके नाम अरुण व वरुण तथा एक पुत्री है जिसका नाम रेणुका है पर वे उनके पास नहीं रहते | आजकल दोनों पुत्र यु एस के कैलफोर्निया स्टेट में सेटल हो गये है|,अक्सर महीने में एक या दो बार मोबाइल पर उनसे बातचीत हो जाती है | उनकी बेटी रेणुका भी अपने पति के साथ आस्ट्रेलिया में सेटल हो गयी है वह भी अपने माता पिता के सप्ताह में एक दो बार बात चीत कर लेती है और उनका कुशल मंगल पूछ लेती है |खाने पीने की कोई परेशानी नहीं है |चूकी दोनों बुजर्ग दम्पति को अच्छी खासी पेन्सन मिलती है | परेशानी केवल एक ही थी और वह थी अकेलेपन की | वे अपने अकेलेपन से ऊब चुके थे | ज्यादा बाहर निकलना उनको काफी मुश्किल था और उनके अंग शिथिल पड़ते जा रहे थे | आजकल तो वे कोरोना के डर से बाहर भी नहीं निकल रहे थे |
    अभी पिछले माह के पहले सप्ताह के हिंदुस्तान टाईम्स के सन्डे एडिसन में अपने इस मकान को बेचने का ऐड दिया | मकान में तीन बैड रूम,दो बाथ रूम, एक ड्राइंग रूम और एक रसोई है | इस ऐड को देखकर एक दलाल उनके घर पंहुचा |
    उसने बाहर से काल बैल बजाई | काल बैल की आवाज सुनकर दोनों बुजर्ग दम्पति बाहर निकले | दलाल ने पुछा, ,”क्या आप अपना मकान को बेचना चाहते है” | बुजुर्ग ने तुरन्त उत्तर दिया ,” हाँ” | पर दलाल बाहर ही खडा रहा
    बुजर्ग ने फिर कहा,”आप अंदर तो आईये,बाहर क्यों खड़े हो “| दलाल कुछ सुकुचाते हुए अंदर चला गया और उनके साथ ड्राइंग रूम में बैठ गया |
    दलाल ने कुछ समय बैठने के बाद उनसे पुछा, “आप इस मकान की क्या कीमत मांग रहे हो ” | बुजुर्ग ने तुरन्त उत्तेर दिया ,”दो करोड़ रूपये “| दलाल ने कहा, “बाबूजी इस मकान के दो करोड़ रूपये तो बहुत ही अधिक है | आजकल तो प्रॉपर्टी का काफी मंदा चल रहा है | ज्यादा से ज्यादा इस मकान के एक करोड़ रूपये मिल सकते है |साथ ही आजकल तो कोरोना भी चल रहा है | कोई भी बाहर नहीं निकल रहा है | सबके मन में डर बैठा हुआ हुआ है |
    इसी बीच बुजुर्ग की पत्नि तीन कप चाय व ढेर सारा नाश्ता ले आई | दलाल उठ कर जाने लगा | पर बुजुर्ग ने उसे हाथ पकड कर बैठा लिया और बोला,” भाई, नाश्ता तो आपको करना ही पड़ेगा | चाहे आप मेरी प्रॉपर्टी बिकवाये या ना बिकवाये | नाश्ते के दौरान तीनो अपनी घर की बाते व दुःख सुख की बाते करने लगे समय का पता भी नहीं लगा कि कब में एक घंटा बीत चुका | बातचीत करते हुये दोनों बुजर्ग बड़े ही खुश नजर आ रहे थे और उनके चेहरे पर एक ख़ुशी की चमक थी | दलाल भी नाश्ता करके नमस्ते करकर उनके घर से निकल गया |
    बजुर्ग ने फिर अख़बार में मकान बेचने का ऐड दिया | ऐड देखकर वही दलाल उनके घर फिर पंहुचा | दलाल ने फिर प्रश्न किया | “आप इस मकान को कम कम कितने में बेचना चाहते हो “| बुजर्ग ने फिर वही उत्तर दिया ,”दो करोड़ रुपए “| दलाल उठने लगा और सोचा की इन्होने मकान नहीं बेचना है केवल भाव लगवाना चाहते है | पर बुजुर्ग ने अबकी बार जबरदस्ती उस दलाल को बैठा लिया और कहा, ” बैठो भाई नाश्ता तो करना ही पड़ेगा “| मकान बेचे या न बेचे |अबकी बार वे तीनो लोग दो घंटे तक अपने जीवन के संस्मरण सुनाने लगे | दोनों बुजर्ग अबकी बार पहले से काफी खुश थे और उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था | और सोचने लगे कि,देखो इस ऐड के बहाने कोई तो कोई हमरे घर आया और हमसे बातचीत की |
    बुजुर्ग ने फिर तीसरी बार मकन बेचने का ऐड दिया | अबकी बार कई और दलाल उस मकान को देखने गये पर उस बुजुर्ग ने उस मकान की कीमत दो करोड़ ही बताई | इस बात को लेकर कुछ दलालो में आपस में बात चीत और कानाफूसी होने लगी | अबकी बार सभी दलाल उस बुजर्ग के घर पहुचे और बोले ,” बाबूजी.आप अखबार में हर बार मकान बेचने का ऐड दे देते हो पर मकान बेचना नहीं चाहते हो और प्रत्येक बार दो करोड़ ही मांगते हो | जरा भी कीमत कम करना नही चाहते हो | साथ ही हमे अच्छा ढेर सारा नाश्ता करवाते हो | इसका क्या कारण है | जरा हमे तो बताये ?”
    यह सुनकर अबकी बार दोनों ही बुजुर्ग दम्पति फूट फूट कर रोने लगे और हरेक दलाल को गले से लगा कर रोने लगे और बोले ,” हमारी समस्या मकान बेचने की नहीं है | हमारी समस्या एकाकीपनकी है हम अपने जीवन में बोर हो चुके है | हमे एकांतवास रोज खाये जा रहा है | हमारे बच्चे होते हुये भी हम अकेले है | हमसे कोई भी बात नहीं करना चाहता | आपसे अनुरोध कि आप बारी बारी से हमारे घर आयेगे और हमारे घर पर नाश्ता व भोजन करेगे ताकि हमारा यह एकाकीपन दूर हो सके | मरने से पूर्व हम इस मकान को एक वृंद्धा आश्रम में परिवर्तित करना चाहते है और इसका एक ट्रस्ट बनाना चाहते है जिसके ट्रस्टी आप सभी लोग होगे पर एक शर्त यह है कि हम जब तक जिन्दा है आप लोग हमारे पास आयेगे ,और हमारे मरने के पश्चात भी आप हमारा अंतिम संस्कार करेगे |” इस बात को सुनकर सभी दलाल लोग सुबक सुबक कर रोने लगे और रोते रोते हुए अपने घर को प्रस्थान करने लगे |

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Must Read

    spot_img