मतदाता ही नही, मतवान भी बनें

देश का यह चुनाव निर्णायक है | यह पहले से चले आ रहे चुनावों की तरह नही है | इस चुनाव के शिल्प बदल चुके हैं | इस चुनाव की प्रचार पद्धति बदल चुकी है | नारे अब सपाट नही रह गए हैं | नारों में अब जीवन का अर्थ भरा जाने लगा है | वे अर्थ सही भी हो सकते हैं पर गलत भी | वे नारे देश की जनता के मन के हिसाब से ही गढ़े गए हैं |

नारों के घटाटोप में, प्रचारों की आंधी में सडक किनारे खडा मतदाता ठिठका हुआ है | संचार माध्यमों के तीव्रतम कोलाहल में अक्सर उसका मन भ्रमित हो जाता है | यह अच्छा या वह अच्छा ? – ये प्रश्न उसे बेचैन करने लगते हैं | आम हिन्दुस्तानी मतदाता का मन मिजाज कमोबेश अभी भी नहीं बदला है | चमकते-दमकते बैनर उसे अब भी ललचाते हैं | सजे धजेनेता पर वह लट्टू होता रहा है | खोखले वादों पर वह विश्वास करता आया है | बाद में मन मुताबिक वह नेता नहीं हुआ तो वह इश्वर अल्ला के नाम पर संतोष भी करता आया है |

जाति-पात, धर्म-मजहब अभी भी इस मतदाता के चश्मे बने हुए है | स्वजातीय नेता उसे अधिक प्यारा लगता है, उस पर जल्दी विश्वास जमता है उसका | बाद में बड़ी कुर्सियों पर बैठकर वही नेता जब उसे धमकाता है तो वह अपनी नियति मान कर बैठ जाता है | बताते हैं कि एक पार्टी केवल एक नारे के बल पर जीत गयी थी और वह नारा था- गरीबी हटाओ | हालांकि गरीबी तो नहीं हटी पर मतदाता जरूर तब से लेकर अब तक ठगा हुआ महसूस कर रहा है | उस पार्टी ने इस बार भी गरीबी का वही पासा फेंका है |

इस चुनाव में प्रचार का एक नया शिल्प भी सामने आया है | कुछ दल अपनी वैचारिकी भूल कर एक नेता के विरोध में एकजुट हो गए हैं | उसके विरोध के नाम पर लगातार फैलाये जा रहे झूठों को हम रोज टीवी चैनलों में सुनते हैं | वे सेना पर सवाल उठा रहे हैं | वे पुलवामा हमलों के लिए अपनी ही सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं | राफेल जैसे मुद्दे को सुप्रीमकोर्ट ने भी सही ठहरा दिया है पर वे तब भी उसमें भ्रष्टाचार की अफवाह उड़ा रहे हैं | वे दंगों की अफवाह उड़ा रहे हैं | तानाशाही की अफवाह उड़ा रहे हैं | बेरोजगारी की अफवाह उड़ा रहे हैं | वे आतंकवादियों को मारे जाने की खबर को निर्दोष नागरिकों के मारे जाने की खबर की तरह उड़ा रहे हैं | उन्होंने अपनी पतंगे अंतहीन आकाश में छोड़ दी हैं और देशकी हर बात को अफवाह की तरह से उड़ा रहे हैं | बिना यह सोचे कि इसका देश की सेहत पर क्या असर पड़ेगा | यह बात तब और समझ में आती है जब प्रधानमन्त्री मोदी आश्चर्य में कहते हैं कि ‘आखिर इन दलों, इन नेताओं को हो क्या गया है ? ये ऐसा क्यों कर रहे हैं ? क्या चुनाव देश से ऊपर है ?

’स्पष्ट है की वे ऐसा इस लिए कर रहे हैं कि इस अफवाह से मतदाता भ्रमित हो जाय और उन्हें अपना मत दे दे | मुसलमानों में वे इसीलिए असुरक्षा भाव का जहर भर रहे हैं | दलितों को वे इसीलिए बरगला रहे हैं | युवाओं में भी वे भ्रम भर रहे हैं |जाहिर है कि हिन्दुस्तानी मतदाता के लिए यह चुनाव बेहद अहम् है | उसके और भारत के भविष्य का फैसला होने वाला है इस चुनाव से | अतः ऐसे में यह उम्मीद की जाती है की हिन्दुस्तानी मतदाता अपना मनोविज्ञान बदलेगा | अपने मन को इन अफवाहों के खिलाफ प्रशिक्षित करेगा | झूठे वादों पर वह नहीं जाएगा | खोखले नारों के फैशन में नहीं डूबेगा | हिन्दुस्तानी मतदाता को यह ध्यान रखना होगा कि ज्यादतर नेता अगले चुनाव के बारे में सोचते हैं पर एक जमीनी नेता, एक सेवक देश के भविष्य के बारे में सोचता हैं | अतः मतदाता को ऐसे ही नेता के चुनाव की आशा होती है जो अगली पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य की रचना कर सके |

लोकतंत्र मात्र एक चुनाव नहीं है बल्कि यह हमारा दिन-प्रतिदिन का जीवन है | अतः मतदाता को पिछले पांच सालों के दिन प्रतिदिन के जीवन का पुनरावलोकन करना होगा | उसका एहसास करना होगा | उसे देखना होगा कि क्या वर्तमान शासन ने उसे ख़ुशी दी | जीवन स्तर उठाया | उसे इन सब बातों की गहरी पड़ताल करनी होगी | उसका तुलनात्मकमूल्यांकन भी करना होगा | कुल मिलाकर हर मतदाता को अपनी आँखें खोलनी होगी | युवाओं को सोचना होगा कि वह किस तरह का देश चाहता है | क्या मुफ्त में रेवडिया बांट कर बरगलाने वाला नेता ठीक है या फिर देश को उचाईयों पर ले जाने वाला नेता | किसानों को विचार करना होगा कि उसे बिचौलियों की सरकार चाहिए या फिर साफ़ सुथरी | मुसलमानों को सोचना होगा कि उसे ऐसी सरकार चाहिए जो उसे मजहब की दरिद्रता में फंसा दे या फिर ऐसी जो मुख्यधारा से जोड़ कर उसे आर्थिक प्रगति के पथ पर अग्रसर करे | मुस्लिम महिलाओं को भी इस बार खुल कर अपने मत प्रकट करने होगें ताकि फिर कोई अंधी सरकार न आ जाये जो उसे शाहबानो प्रकरण जैसे गर्त में धकेल दे |

फ़िलहाल पिछली सरकार का कामकाज सुखद है | मोदी ने उम्मीदों को पूरा किया तो उम्मीदें जगाईं भी हैं | देश में हर्ष का संचार है | भारत का वैभव इस बीच बढ़ा है | दुश्मन देशों में भय है | मित्र देशों में भारत का कद बढ़ा है | सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक ने देश की सुरक्षा को पुख्ता किया है | अंतरिक्ष में भी भारत सशक्त हुआ है | भ्रष्टाचार शून्य रहा है| मतदान, राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सहभागिता का सबसे महत्त्वपूर्ण तरीका है | अतः ऐसे में उम्मीद है कि हिन्दुस्तान का मतदाता इस बार अपने वोट की ताकत समझेगा और उसका प्रयोग देशहित में कर के मतवान भी बनेगा |

डॉ सर्वेश सिंहएसोसिएट प्रफेसर, बाबासाहब अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ   

साभार : https://www.academics4namo.com

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