खेलो का बहिष्कार या ….


-अनिल अनूप इंडिया के पूर्व कप्तान मुहम्मद अजहरुद्दीन और प्रख्यात स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने एक नई बहस छेड़ दी है कि विश्व कप के दौरान पाकिस्तान के साथ मैच नहीं खेलना चाहिए। बेशक टीम इंडिया को दो अंक गंवाने पड़ें, बेशक भारत विश्व कप जीत पाए या नहीं, लेकिन पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का बहिष्कार किया जाना चाहिए। यह कोई भावुक आह्वान नहीं है, आहत मन की पुकार है, देशभक्ति का जज्बा है। क्रिकेट के मौजूदा कप्तान विराट कोहली से भी आग्रह किया गया है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का मानना है कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट ही नहीं, हॉकी, फुटबाल, कबड्डी के संबंध भी तोड़ लिए जाने चाहिएं। पुलवामा के आतंकी हमले और बाद की मुठभेड़ में 45 जवानों की शहादत के बाद अब देश के भीतर का माहौल इतना उग्र है कि पाकिस्तान को भूखों मरने पर विवश कर देना चाहता है। क्रिकेट के अलावा, पाकिस्तान के कलाकारों, गायकों, शिल्पकारों पर भी पाबंदी थोप दी जाए, कवि सम्मेलन और साहित्य सभाओं का बहिष्कार किया जाए, संगीत सम्मेलन भी रद्द किए जाएं और बालीवुड फिल्में पाकिस्तान में रिलीज न की जाएं। गुस्सा और आक्रोश इतना है कि गांव-गांव और गली-मुहल्लों में भी कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं और पाकिस्तान के पुतलों पर कालिख पोतकर जूते मारे जा रहे हैं। देश के औसत नागरिक जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं जता रहे हैं। यह भावना अभी क्षीण नहीं हुई है। देशभक्त खिलाडि़यों और क्रिकेटरों ने ‘भारत रत्न’, महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, गेंदबाजी में विश्व के तीसरे स्थान के रिकार्डधारी अनिल कुंबले और ‘दीवार’ की तरह बल्लेबाजी करने वाले राहुल द्रविड़ को भी ऐसे आह्वान के लिए आग्रह किए गए हैं। उनके अलावा, ग्रेट खली, पुलेला गोपीचंद, यजुवेंद्र चाहल आदि कई नामी खिलाडि़यों ने भी आह्वान किए हैं कि क्रिकेट और विश्व कप भारत राष्ट्र और जवानों के बलिदानों से अहम नहीं हैं। देश है, तो खेल भी हैं। वैसे करीब 10 सालों से भारत पाकिस्तान के साथ क्रिकेट की द्विपक्षीय सीरिज नहीं खेल रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिति (आईसीसी) के अपने नियम हैं, लिहाजा उन्हीं मैचों में खेल रहे हैं। दिक्कत यह है कि यदि टीम  इंडिया विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार करती है, तो उस पर पाबंदी लगाई जा सकती है। हालांकि बीसीसीआई से पंगा लेने की स्थिति में आईसीसी भी नहीं है, क्योंकि भारत का क्रिकेट बोर्ड आर्थिक स्रोत का सबसे बड़ा जरिया है। यदि भारत-पाक क्रिकेट मैच नहीं भी होता है, तो आईसीसी को इतना नुकसान नहीं होगा, क्योंकि 16 जून, 2019 को होने वाले मैच के करीब 26,000 टिकट बिक चुके हैं। यदि राजनीतिक स्तर पर देखें, तो केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पाकिस्तान के क्रिकेट बहिष्कार को ‘उचित’ मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि विश्व कप एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है, लिहाजा आईसीसी और बीसीसीआई को सुरक्षा इकाइयों से बातचीत करने के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए। लेकिन हकीकत यह भी है कि एक लॉबी, जो खुद को बौद्धिक मानती है, के पेट में दर्द हो रहा है कि खेलों का बहिष्कार क्यों किया जाए? जबकि देश की उग्रता इस स्तर तक पहुंच गई है कि वह पाकिस्तान से फलों, चमड़े, सीमेंट का बचा-खुचा कारोबार भी समाप्त करने की पक्षधर है। बहरहाल पाकिस्तान के चौतरफा बहिष्कार घोषित करने से पहले इस पक्ष को भी देखा-परखा जाए कि न्यूजीलैंड की संसद ने पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। फ्रांस के अलावा, अमरीका, ब्रिटेन भी आतंकी मसूद अजहर पर पाबंदी चस्पां करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव ला रहे हैं। कुल 40 से अधिक देशों ने पाकिस्तान के आतंकवाद का विरोध करना तय किया है और वे भारत के पक्ष में खड़े हैं। भारत सरकार का गृह मंत्रालय भी पाकिस्तान के आतंकवाद और पुलवामा हमले पर डॉजियर तैयार कर रहा है। उसे विभिन्न देशों को भेजा जाएगा, ताकि वे जान सकें कि पाकिस्तान कितना आतंकी राष्ट्र है? यह समर्थन अलग है, लेकिन बहिष्कार और दुनियावी प्रचार के बावजूद भारत को अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ेगी । सवाल यह है कि भारत पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ घोषित क्यों नहीं कर पा रहा है? खेलों का बहिष्कार करने की तुलना में यह कदम ज्यादा कारगर साबित होगा।

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