योगी सरकार के 1 साल : सही दिशा में सही कदम


शिवशरण त्रिपाठी
१९ मार्च दिन सोमवार को मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तरप्रदेश में भाजपा नीति राजग सरकार के एक साल पूरे हो गये। सरकार के एक साल के कार्यकलापों/उपलब्धियों पर निष्पक्ष व व्यापक दृष्टि डालने से साफ  दिखता है कि मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को आगे बढ़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। प्रदेश के सभी वर्गो के समग्र कल्याण के लिये उनकी सरकार यथेष्ट प्रयत्नशील रही है।
योगी सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे बड़ा कदम किसानों की कर्ज माफ ी का उठाया। ५ अप्रैल २०१७ को राम नवमी के दिन मुख्यमंत्री ने प्रदेश के ८६ लाख किसानों की ऋण माफ ी की घोषणा की। इसके लिये पहले बजट में ही ३६ हजार करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया। नतीजतन अब तक ८६ लाख लघु एवं सीमान्त किसान लाभान्वित हो चुके है। इसी तरह सरकार ने किसानों के गन्ना बकायों का २७ हजार करोड़ रूपये का भुगतान कर किसानों को बड़ी राहत दी। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य १७३५ रूपये प्रति क्विंटल किये जाने से किसानों को भारी लाभ मिलना तय है।
प्रदेश की रीढ़ किसानों की तरह ही युवाओं के लिये भी योगी सरकार ने अनेक कदम उठाये है। एक वर्ष में करीब दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण प्रदान कर प्लेसमेंट कराया गया। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में विशिष्ट उत्पाद को बढ़ावा देने एवं रोजगार हेतु एक जनपद एक उत्पाद योजना लागू किये जाने से रोजगार बढऩा तय है। सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय, ग्रामीण कौशल योजना के तहत कोई ६२ हजार गरीब ग्रामीण परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हे आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है।
प्रदेश में अधिकाधिक पूंजी निवेश की दृष्टि से योगी सरकार ने बीते फ रवरी माह में दो दिवसीय सफ ल मेगा पूंजी निवेश सम्मेलन आयोजित किया। जिसमें देश के जाने माने आद्योगिक घरानों ने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया वरन् सूबे में निवेश के लिये पांच लाख करोड़ रूपये के एमओयू भी हस्ताक्षरित हुये। यह सिलसिला जारी रहे इसके लिये सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का भी गठन कर दिया है। उद्यमियों को कोई दिक्कत न हो इसके मद्देनजर ही सरकार ने सिगल विंडो, क्लीयरेन्स विभाग की स्थापना एवं निवेश मित्र, सिंगल विंडो वेब पोर्टल भी संचालित किया है।
योगी सरकार की एक और सबसे बड़ी सफ लता रही है अर्से से नकल के मकड़ जाल में फ ंसी यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को नकल विहीन कराकर उसकी शुचिता की पुर्नबहाली। ऐसा ही प्रयास विश्व विद्यालय स्तर पर भी किया जा रहा है। इससे निश्चित ही आगे चलकर बच्चों का भविष्य निखरना तय है।
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार ने उल्लेखनीय सफ लता हासिल की है। अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टालरेंस की नीति के तहत एक साल के कार्यकाल में पुलिस व अपराधियों के बीच मुठभेड़ की १३०० घटनाओं में ४४ अपराधी ढेर कर दिये गये। वहीं ३३० अपराधी घायल हुये व ३०६७ अपराधी गिरफतार कर लिये गये।
पुलिस ने अपने इस अभियान में अपराधियों की लगभग डेढ़ सौ करोड़ रूपये की सम्पत्ति भी जब्त कर ली।
इसी क्रम में पुलिस ने भूमाफि याओं के खिलाफ  भी सख्त रूख अपनाया। प्रदेश में १५३१ भूमाफि याओं को चिन्हित कर उनके विरूद्ध विभिन्न धाराओं में २५९६ मुकदमें दर्ज किये गये। इन मुकदमों में १९२२ अभियुक्तों की गिरफतारी की गई जबकि ४६० अदालत में हाजिर हो गये। ६ माफि याओं की कुर्की करते हुये लगभग ७.४५ करोड़ रूपये की अवैध सम्पत्ति जब्त की गई।
योगी सरकार ने सर्वहारा समाज व अल्पसंख्यक समाज के लिये भी खजाने का मुंह खोलने में कोताही नहीं बरती है। जहां सूबे में वृद्धजनों को १६७२८.२२ ल ाख वृद्धाव्यवस्था पेंशन निर्गत की गई वहीं दिव्यांगजन भरण पोषण अनुदान को ३०० रूपये  प्रतिमाह से बढ़ाकर ५०० रूपये कर दिया गया। सरकार ने प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना लागू करके समाज के सभी कमजोर वर्गो की बेटियों की शादी को आसान बना दिया।
अल्पसंख्यक बहुलक्षेत्रों में २८ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, एक सामुदायिक स्वास्थ्यकेन्द्र, ६ आयुष चिकित्सालयों ३९ इण्टर कालेज, २२ आईटीआई भवन, ३४८ आंगनबाडी केन्द्रों, ३ पॉलीटेनिक  एवं २० पेयजल परियोजनाओं का निर्माण होने ने समग्र समाज को लाभ पहुंचा है।
यह तो नहीं कहा जा सकता है कि प्रदेश में सभी सड़के चकाचक हो गई है पर इस दिशा में भी सरकार ने काफ ी कुछ किया है। सड़कों की मरम्मत व सुधार लगातार जारी है। इसी तरह बिजली की आपूर्ति भी पूर्व की तुलना में        काफ ी बेहतर हुई है। सरकार ने ३२ लाख गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन देकर एक सराहनीय कार्य किया है।
कुल मिलाकर योगी सरकार सही दिशा में ईमानदारी से आगे बढ़ रही है। हां, यदि सरकार ने भ्रष्टाचार पर काबू पा लिया तो प्रदेश की तस्वीर बदलने में देर न लगेगी।
बाक्स में
काबिले तारीफ  है मुख्यमंत्री की साफ गोई
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की राजनीति यर्थाथवादी रही है। वो दिखावे की राजनीति नहीं करते। वो तृष्टीकरण की राजनीति में विश्वास नहीं करते। खास बात यह है वो सच को सच कहने की हिम्मत रखते हैं। यहां ऐसे ही कुछ बयान दिये जा रहे है जिनसे उनकी साफ गोई का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है।
बीते सप्ताह ही मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान साफ  कहा कि मै गर्व से कहता हूँ ‘मै हिन्दू हूँ ईद नहीं मनाताÓ। मैं किसी के दिखावे के लिये टोपी नहीं पहनता पर हर धर्म मानने वालों की पूरी सुरक्षा की जायेगीÓ।
अतीत के एक कार्यक्रम में उन्होने साफ  कहा था कि मदर टरेसा जैसे लोग कभी भारत के ईसाईकरण करने का काम करते है तो कभी फ ादर बनकर यही लोग हिन्दुओं के दफ नाने की साजिश रचते है।
अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान राममंदिर को लेकर श्री योगी ने कहा था कौन सी ताकत है जो आपको राम मंदिर बनाने से रोक सकती है। जब ढांचा ढहाने से कोई नहीं रोक पाया तो मंदिर बनाने से कौन रोक पायेगा।
देश में मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या पर उन्होने स्पष्ट कहा था मुस्लिमों के बीच उच्च प्रजन्नदर से जनसंख्या असंतुलन हो सकता है। उन्होने इसे हिन्दुओं के लिये खतरनाक बताया था।
बाबा, बाबा है
नि:संदेह मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ असली बाबा (संत) हैं। वो कर्म व ईश्वर में सच्ची आस्था रखते हैं। वो अंध विश्वासों में यकीनन नहीं रखते तभी तो अतीत में कुर्सी जाने के भय से नोएडा की यात्रा न करने वाले मुख्यमंत्रियों को आइना दिखाते हुये  उन्होने अब तक एक नहीं अनेक बार नोएडा का दौरा कर डाला है। उनकी इस बात की तारीफ  नोएडा के एक कार्यक्रम में स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी की थी।
फि र भी…!
योगी सरकार ने राज्य परिवाहन की बसों को भगवे रंग में रंगे जाने की शुरूआत कर अतीत की बसपा व सपा सरकारों का ही अनुशरण किया है। जो कि उचित नहीं प्रतीत होता है। बसों का रंग नीला अथवा हरा किये जाने से ही यह सरकारें बनती बिगड़ती या जनता प्रभावित होती तो अपने शासनकाल में बसों को नीले रंग में रंगवाने वाली सुश्री मायावती कभी चुनाव न हारती। इसी तरह अपने शासनकाल में श्री अखिलेश यादव द्वारा लोहिया जी के नाम पर सपा के झंडे के रंग में रंगी बसे चलाये जाने के बावजूद उनकी सत्ता हाथ से निकल गई थी।
योगी सरकार पर बनते ही जिस तरह खासकर क्षत्रीय जाति के अधिकारियों को जमकर तरजीह दी गई और आज भी दी जा रही है उससे लोगो में यह चर्चा आम हो चली है योगी जी भी वहीं कर रहे है जो पिछली सरकारे मसलन बसपा व सपा करती रही है।
सोशल साइट पर भी योगी सरकार की जातिवादी राजनीति की बख्यिा उधरने का काम जारी है।
योगी सरकार की शुरूआत हनक साल बीते-बीते कमजोर पड़ती दिखने लगी है मसलन सोहदों की हरकते बढऩे लगी है। चोरी छिपे बुचड़ खाने चलने लगे है। यातायात व्यवस्था भी पटरी पर नहीं आ पा रही है। भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पाना ही योगी सरकार के गंभीर चुनौती बनी हुई है।
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जश्न का भविष्य!
उत्तर प्रदेश की दो महत्वपूर्ण सीटों गोरखपुर व फ ूलपुर में हुये उपचुनाव में सपा के दोनो प्रत्याशियों ने अंतत: बसपा के समर्थन से भाजपा के प्रत्याशियों को पटखनी देकर दोनो सीटे भाजपा से छीन ली।
उपचुनाव में पहले भी सत्तारूढ़ दल हारते रहे हैं। पर इस बार सत्तारूढ़ भाजपा की उपचुनाव में हार से इतनी गहमागहमी क्यों है इसका प्रमुख कारण है दोनो सीटों का अतिमहत्वपूर्ण होना।
गोरखपुर सीट जहां वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही है वहीं फ ूलपुर सीट उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भारी मतों से जीता था।
नि:संदेह दोनो सीटों पर दोनो ही पूर्व सांसदों ने बार-बार बढ़ चढ़कर दावे किये थे कि भाजपा दोनो ही सीटे बड़े अंतर से जीतेगी। गोरखपुर सीट पर तो भाजपा २८ वर्षो से काबिज रही है।
दोनो ही सीटों पर सपा की जीत से सपा प्रमुख अखिलेश यादव की जय-जयकार जायज ही है। सपाईयों का गद्गद होना स्वाभाविक ही है। २०१९ के लोकसभा चुनाव में सफ लता के झंडे गाडऩे के बढ़-चढ़कर दावे करना भी अनुचित नहीं है पर सवाल यह है कि सपा की ताजी जीत के जश्न का भविष्य क्या है।
इस जीत के जश्न की पहली परीक्षा तो २३ मार्च को होने वाले राज्य सभा के चुनाव में होनी है। ज्ञात रहे मतों के हिसाब से राज्य सभा की १० सीटों में से ८ सीटे भाजपा के खाते में तो एक सीट सपा के खाते में जाना तय है। जबकि एक सीट पर भाजपा व बसपा के बीच घमासान होना है। इसी सीट के लिये भाजपा व बसपा ने अपने-अपने प्रत्याशी भी उतार रखे हैं। भाजपा इस सीट को हरहाल में जीतना चाहती है। इसी कारण उसने बीते दिनो सपा छोड़कर आये नरेश अग्रवाल को हाथो-हाथ लिया था। उनका बेटा सपा विधायक है। यदि उसने भाजपा के पक्ष में मतदान किया तो फि र बसपा के प्रत्याशी की जीत लगभग अंसभव है। क्योंकि तब सपा के कुल वोट ९ ही रह जायेगें जोकि कांग्रेस के ७ व रालोद के एक वोट के बाद ३६ ही होंगे। जबकि जीत के लिये ३७ वोटो की जरूरत होगी।
यहां यह भी चर्चा है कि जरूरी नहीं कि सपा के बचे ९ वोट भी बसपा के प्रत्याशी को मिल ही जाय।
ऐसे में यदि ऐसा कुछ होता है और बसपा प्रत्याशी राज्य सभा न पहुंचा तो सपा, बसपा के भविष्य के गठबंधन पर सवालिया निशान भी ल ग सकता है।
बसपा प्रमुख मायावती ने लोकसभा उपचुनाव में सपा को इस लिये समर्थन दिया था कि सपा उन्हे राज्य सभा भेजने में पूरी मदद करेंगी। ऐसे में सपा के साथ कांग्रेस व रालोद के रूख का निर्णय २३ मार्च को हो जायेगा।
सभी जानते है मायावती अपने वोटो का स्थान्तरण किसी अन्य पार्टी के पक्ष में प्राय: करा सकती है और कराती भी रही हैं। पर दूसरी पार्टियों के वोट उनके यानी बसपा के पक्ष में स्थान्तरित नहीं होते या फि र आधे अधूरे ही होते हैं।
दूसरे और बड़े जश्न के लिये २०१९ के चुनाव परिणाम की छोडिय़े चुनावी गठबंधन का इंतजार करना होगा। यदि २०१९ के लोकसभा चुनाव के लिये  सपा बसपा गठबंधन की बात की जाय तो बसपा शायद ही इसके लिये तैयार हो। क्योकि तब उसे अपने अधिक से अधिक सांसद जिताने की चिंता होगी। हां वो सीटों के हिसाब से भले ही समझौता कर सकती है वो भी तब जब कांग्रेस गठबंधन से दूर रहे। मायावती अच्छी तरह जानती है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन खो चुकी है और जो बची है वो भी लगातार खोती जा रही है। दोनो ही उपचुनाव में उसके प्रत्याशियों की जमानते जब्त हो गई। फ ूलपुर में तो उसका प्रत्याशी निर्दलीय लड़े अतीक अहमद से भी नीचे चौथे स्थान पर रहा था। उसे महज लगभग १२ हजार वोट ही मिल सके थे। ऐसे में कोई भी समझौता अथवा गठबंधन होता है तो सबसे अधिक फ ायदा कांग्रेस को ही मिलना है।
उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भले ही भविष्य में कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की आशा जतायी है पर कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने अभी कोई संकेत नहीं दिये है तो उसका प्रमुख कारण है  राहुल गांधी का भावी प्रधानमंत्री पद का तय दावेदार होना। ऐसे में सपा व कांग्रेस का गठबंधन किन्तु परन्तु के साथ हो भी गया तो बसपा का इस गठबंधन में शामिल होना आसान न होगा।  ऐसे में सपा सहित अन्य विपक्षीदलों के लिये असली जश्न की घड़ी तब आयेगी जब खासकर सपा बसपा व कांग्रेस मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ेगी तथा भाजपा को पछाड़कर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने की ओर अग्रसर होगी।

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