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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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4 जून 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में स्वामी रामदेव जी स्वयं अनिश्चित कालीन उपवास (आमरण अनशन ) पर बैठेंगे ।

राष्ट्रहित में तीन माँगे

1. लगभग चार सौ लाख करोड़ रुपये का काला धन जो की राष्ट्रीय संपत्ति है यह देश को मिलना चाहिए ।

2. सक्षम लोकपाल का कठोर कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर पूर्ण अंकुश लगाना ।

3. स्वतंत्र भारत में चल रहा विदेशी तंत्र (ब्रिटिश रूल ) खत्म होना चाहिए जिससे कि सबको आर्थिक व सामाजिक न्याय मिले ।

5 Responses to “4 जून से स्‍वामी रामदेव का अनशन, सत्‍याग्रह क्‍यों?”

  1. ajit bhosle

    कल एक और मूर्ख का टी.वी पर साक्षात्कार देखा वह पूछ रहा था ये बाबा रामदेव कौन है और क्या करता है, और भूख हड़ताल क्यों कर रहा है ये अपने अनुयायियों से कह दे की भ्रष्टाचरण मत करो तो आधा भ्रष्टाचार अपने आप ही समाप्त हो जाएगा,इस मूर्ख को आम आदमी के जीवन के बारें में की जीवन कितना दुष्कर है यह पता ही नहीं है, चोरी-चकारी की रिपोर्ट पुलिस में कराने के लिए भावरे पड़ जाती है आम आदमी इतना निरीह है की वह चाह के भी भ्रष्टाचार नहीं रोक सकता, ऐसे में बाबा का भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ खडा होना और करोड़ों लोगो को अपने साथ खडा कर लेना किसी चमत्कार से कम नहीं

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  2. sunil patel

    आज तक हमको झूठा इतिहास पढाया गया है, पढाया जा रहा है. बचपन से सुन रहे है की प्रत्यक पैदा लेने वाले बच्चे के ऊपर ३००० कर्ज है, जो आज १०-१२ हजार प्रति व्यक्ति हो गया है. स्वामी रामदेव जी के करह ही पता चला की कला धन हमारे देश में आ जाये तो हर भारतीय अगर करोडपति नहीं तो कम से कम कई कई लाख का मालिक हो जाए.
    सरकार कभी कुछ नहीं कर रही थी, न कर रही है और न ही कभी करेगी. जनता को निर्णय लेना है की इस अवसर का लाभ उठाय और सरकार को सोचने पर मजबूर कर दे की अब हद हो चुकी है, अभी भी वक्त है संभल जाओ नहीं तो जनता उखड फेकेगी.

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  3. mahesh chndra varma

    OMSAIOM**ोरामदेव से डरते तो वह जेल में होते: दिग्विजय सिंह
    कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पार्टी रामदेव से डरी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ यदि कांग्रेस डरी होती तो रामदेव सलाखों के पीछे होते। कोई डर की बात नहीं है इसलिए वह खुले में बाहर हैं और उनके साथ बातचीत हो रही है। ‘
    आखिर सच बोल ही दिए कांग्रेस महासचिव , अंग्रेज भी जिससे डरते थे उसे ज़ेळ मे डाल देते थे | बुजुर्ग
    सही कहते है, अंग्रेज चले गये औलाद छोड् गये | कांग्रेस अंग्रेज़ो की ……………….है
    भारत की जनता जवाब दे……हर भारतीय को इसका अहसास है…….पर रामदेव की तरह सब बोल नही पाते है..जिस दिन सारे सच्चे भरतीय जाग गये …..सम्पूर्ण भारत वर्ष से एक ही आवाज़ आएगी……”भ्रष्ट कांग्रेसियो भारत छोडौ”……….गाँधीजी की अहिंसा गाँधीजी के साथ चली गई , आज कांग्रेस द्वारा पाले जा आतंकवाद ने ८०% जनता को हिंसक बना दिया है ,जिस दिन ये अपनी औकात पर आ गये…….
    तो भ्रष्टाचारीओ के सपरिवार जान के लाले नही पड जाय तो बोलना…….

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  4. आर. सिंह

    आर.सिंह

    ऐसे भी ४६ वर्षीय राम कृष्ण यादव उर्फ़ बावा राम देव का खुद का जीवन भी कम चमत्कारी नहीं है.
    साधारण परिवार में जन्मे ४६ वर्षीय (ज्न्म१९६५) राम कृष्ण यादव को, जहाँ तक जानकारी उपलब्ध है, कोई ख़ास पैत्रिक सम्पति शायद ही मिली थी. राम कृष्ण यादव की शिक्षा दीक्षा का जो विवरण उपलब्ध है,उसके अनुसार उनकी विधिवत शिक्षा आठवीं कक्षा तक हुई थी.बाद के वर्षों में उन्होने आदर्श गुरुकुल खानपुर में दाखिला लिया था, जहाँ उन्होने संस्कृत और योग का अध्ययन किया. उद्योग चलाने की न तो उन्हें कोई विधिवत शिक्षा मिली और न उन्होनें कहीं से कोई अनुभव प्राप्त किया ऐसे में इतनी कम उम्र में तकरीबन १२०० करोड़ का ( प्रत्यक्ष रूप में, ,परोक्ष रूप में ज्यादा भी हो सकता है)उद्योग खड़ा कर लेना ,वह भी उस जमाने में, जब बिना पैसा खिलाये एक कागज भी आगे नहीं बढ़ता ,कोई खेल नहीं है.इससे यही सिद्ध होता है की कल के राम कृष्ण यादव और आज के बावा रामदेव केवल योग गुरु हीं नहीं ,बल्कि एक अनुकरणीय उद्योग पति भी हैं.अभियंता होने के नाते और वह भी यांत्रिक अभियंता जिसका सारा उम्र उद्योग और उद्योग पतियों के बीच गुजरा हो यह बात मेरे जैसों की समझ में बड़ी मुश्किल से आती है.
    सूचनानुसार यह पूरा उद्योग शायद पिछले सात आठ वर्षों में पनपा है. यह उद्योग विकास का एक ऐसा उदाहरण है,जिसका विश्व के किसी भी कोने में दूसरा उदाहरण यदि है तो कम से कम मुझे यह ज्ञात नहीं मेरी सूचना और मेरा आकलन गलत भी हो सकता है,क्योंकि मैं तो अपने को एक आम आदमी समझता हूँ,जो दो और दो के जोड़ को केवल चार ही कह सकता है.

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  5. अवनीश राजपूत

    avenesh singh

    बाबा रामदेव इस वक्त किसी सुपर हीरो या राष्ट्रीय नायक से कम नहीं लग रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि बाबा कुछ चमत्कार कर दिखाएंगे। विदेशों में जमा भारत के अरबों-खरबों के काले धन को वापस लाने या भ्रष्टाचार के संहार जैसा कुछ।

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