लेखक परिचय

तनवीर जाफरी

तनवीर जाफरी

पत्र-पत्रिकाओं व वेब पत्रिकाओं में बहुत ही सक्रिय लेखन,

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-तनवीर जाफरी-

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भारत में दूरसंचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी निजी कंपनियों के कदम रखे जाने के बावजूद भारत
सरकार का दूरसंचार उपक्रम भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) आज भी देश के सबसे बड़े संचार नेटवर्क के रूप में फिलहाल अपना दबदबा बनाए हुए है। परंतु जिस प्रकार बीएसएनएल द्वारा इस समय अपने ग्राहकों कीे उपेक्षा की जा रही है तथा तकनीकी रूप से इसके नेटवर्क को जिस तरह जानबूझ कर नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इसके रख-रखाव की अनदेखी की जा रही है उसे देखकर तो साफतौर पर यही प्रतीत होता है कि देश का यह अति महत्वपूर्ण सरकारी उपक्रम भी निजी कंपनियों व कारपोरेट घरानों की भेंट चढ़ऩे जा रहा है। और यहां यह कहने में भी कोई हर्ज नहीं कि इस साजि़श में हमारे देश के कारपोरेट घरानों के हितैषी राजनेता भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यानी मुंह पर तो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रवाद जैसी बातें और पिछले दरवाज़े से अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थानों को बेच खाने की सुनियोजित साजि़श।

इसमें कोई शक नहीं कि संचार क्षेत्र में कोई भी
ग्राहक बिना किसी व्यवधान के व सिग्रल में व्यवधान उत्पन्न हुए बिना
निर्बाध चलने वाली 24 घंटे की संचार सेवा प्राप्त करना चाहता है।
इंटरनेट कनेक्शन व ब्रॉड बैंड जैसी सेवाएं भी ग्राहक को 24 घंटे
चलती हुई मिलनी चाहिए। यदि इन सेवाओं में ज़रा सी भी त्रुटि पैदा
होती है तो गा्रहक उसकी शिकायत अपने कनेक्शनदाता नेटवर्क के
कार्यालय में कराता है। यदि उसकी शिकायत की तत्काल सुनवाई हो गई
तो िफलहाल वह संतुष्ट हो जाता है। और यदि वैसी ही शिकायत किसी
भी कनेक्शन में बार-बार आने लगे और बार-बार उसे उसी समस्या की
शिकायत करनी पड़े तो ग्राहक इस परेशानी से तंग आकर इसका स्थायी
हल ढंूढने की कोशिश करता है। और अपनी इसी संतुष्टि की तलाश
में वह किसी दूसरे कनेक्शनदाता उपक्रम से रिश्ता बना लेता है। यानी कि
यदि वह बीएसएनएल से दु:खी हो गया है तो वह रिलांयस या एयरटेल अथवा
किसी अन्य संचार नेटवर्क से जुड़ जाता है और अपने पिछली कनेकशनदाता
कंपनी से मोह भंग कर लेता है। कुछ ऐसा ही आजकल बीएसएनएल के साथ
भी हो रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी संचार कंपनियों में शामिल यह
विभाग अपने ही देश में धीरे-धीरे निजी नेटवर्क चलाने वाली कंपनियों
के आगे अपना कद छोटा करता जा रहा है। कहने को तो बीएसएनएल ने
भी भारत में संचार क्षेत्र में नई निजी कंपनियों के उतरने के बाद
प्रतिस्पर्धा में आकर कई ऐसे कदम उठाए हैं जिसे देखकर यह लगे कि
वह भी अपने नेटवर्क बढ़ाना चाह रही है। परंतु दरअसल यह महज़ एक
धोखा मात्र है जबकि इसकी हकीकत कुछ और ही है। प्रतिस्पर्धा के
चलते किए जा रहे दिखावे में भी बीएसएनएल द्वारा सैकड़ों करोड़ रुपये
खर्च किए जा रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर अपने ग्राहक को अच्छी सेवाएं
देने व उसकी शिकायत पर तत्काल सुनवाई किए जाने के बजाए विज्ञापन पर
ज़्यादा पैसे खर्च किए जा रहे हैं। और विज्ञापन भी छोटा-मोटा नहीं
बल्कि लंबी दूरी तक चलने वाली पूरी की पूरी रेलगाड़ी के डिब्बों के
दोनों ओर बीएसएनएल के स्टिकर लगे देखे जा सकते हैं। यानी बीएसएनएल
विज्ञापन के रूप में रेलवे विभाग को सैकड़ों करोड़ रुपये हस्तांतरित
कर रहा है। सवाल यह है कि जब ज़मीनी स्तर पर ग्राहक आपकी सेवाओं
से संतुष्ट नहीं हैं,बीएसएनएल अपने ग्राहक की शिकायत पर तत्काल सुनाई
नहीं कर पा रहा है तो रेलगाडिय़ों पर छपे विज्ञापन को देखकर क्या
कोई ग्राहक बीएसएनएल का कनेक्शन खरीद लेगा? ठीक इसके विपरीत
निजी कंपनियां अपने ग्राहकों की शिकायत का तत्काल व उचित समाधान
निकालने की यथाशीघ्र व यथासंभव कोशिश करती हैं। यहां तक कि यदि
किसी के घर के किसी एक कमरे में नेटवर्क नहीं आ रहा है तो
निजी कंपनियां अपने उस एक ग्राहक के लिए अपने नज़दीकी टॉवर की
फ्रीक्वेंसी को बढ़ा देती हैं। यहां तक कि ज़रूरत पडऩे पर किसी
क्षेत्र में नए टॉवर भी लगवा देती हैं। परंतु बीएसएनएल के शिकायत केंद्र
पर यदि आप अपनी किसी समस्या की शिकायत करें तो कोई कर्मचारी जल्दी
आने का नाम नहीं लेता। और यदि सौभाग्यवश दो-चार दिन बाद कोई
कर्मचारी आ भी गया तो वह आपकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाल
पाता। और केबल में गड़बड़,गड्ढे में पानी या अमुक स्थान पर हो रही
सडक़ों की खुदाई जैसे कारणों को गिनाकर चलता बनता है। स्वाभाविक
है कि ऐसी बातों से दु:खी होकर ग्राहक मजबूरन किसी अन्य निजी
कंपनियों की ओर देखने लग जाता है। और इस प्रकार बीएसएनएल का अपने
एक पुराने ग्राहक से नाता टूट जाता है।

कहां तो बीएसएनएल अब थ्री जी और फोर जी की दिशा
में आगे बढ़ रहा है। परंतु इसकी ज़मीनी हकीकत यह है कि जहां
देखिए वही कहीं सीवर के पाईप डालने के नाम पर तो कहीं वाटर
सप्लाई के पाईप डालने की खातिर जेसीबी द्वारा ज़मीन की खुदाई
होती रहती है। बिना किसी पूर्व योजना के होने वाली इस प्रकार की
खुदाई में अक्सर बीएसएनएल के केबल कट जाते हें। परिणामस्वरूप विभाग
को भारी नुकसान तो उठाना ही पड़ता है साथ-साथ उस खास केबल के
माध्यम से जुड़े हुए ग्राहकों को भी तब तक असुविधा का सामना करना
पड़ता है जब तक वह केबल पुन:जोड़ न दिया जाए। कायदे से ऐसी जगहों
पर खुदाई करते समय बीएसएनएल के कर्मचारियों को भी मौके पर
बुलाना चाहिए तथा उनसे यह पूछ लेना चाहिए कि किन-किन स्थानों पर
और किस रास्ते से संचार केबल डाले गए हैं। परंतु न कोई
ठेकेदार किसी विभाग से यह पूछने की ज़हमत गवारा करता है न ही
कोई इसकी लिखित सूचना देता है। यह बात जब बीएसएनएल के एक
जि़ मेदार वरिष्ठ कर्मचारी से पूछी गई तो उसने बड़ा हैरतअंगेज़ जवाब
दिया। उसने बताया कि एक बार वाटर पाईप लाईन बिछाने वाले एक
ठेकेदार द्वारा जेसीबी से ज़मीन की खुदाई करवाई जा रही थी।
इत्तेफाक से उसी समय वह भी उस जगह से गुज़रा। उसने देखा कि जेसीबी
ने बीएसएनएल का केबल काट दिया है। इस पर उस कर्मचारी ने जेसीबी
ऑप्रेटर से शिकायत की तथा ऐसा करने पर आपत्ति की। कर्मचारी के
अनुसार उस जेसीबी ऑप्रेटर ने उसे धमकी देते हुए कहा कि यहां से
चले जाओ वरना तु हें भी इसी गड्ढे में डालकर जेसीबी से मिट्टी डाल
देंगे। वह कर्मचारी चुपचाप अपनी जान बचाकर वहां से वापस आ गया। और
उसने अपनी आपबीती अपने करीबी आला अधिकारियों को भी सुनाई।
जिसके जवाब में अधिकारियों ने उससे यही कहा कि अच्छा किया जो तुम
वहां से चले आए। और यह कहानी वहीं पर खत्म हो गई। बाद में उसे
पता चला कि जो ठेकेदार वाटर पाईप लाईन डलवाने के लिए गड्ढे खोदने
हेतु जेसीबी का प्रयोग करवा रहा है वही ठेकेदार ज़रूरत पडऩे पर
बीएसएनएल व दूसरे निजी संचार नेटवर्क के लिए भी गढ्ढे खोदने का काम
करता है।

इसी प्रकार अंबाला शहर के महावीर नगर क्षेत्र में एक
केबल पिलर बॉक्स जिसमें लगभग दो सौ से लेकर तीन सौ तक ग्राहकों के
कनेक्शन हैं वह लोहे का बॉक्स ज़ंग लगने की वजह से नीचे से गल गया
है। तेज़ हवा के झोंके से ाी या शरारती तत्वों के छेड़छाड़
करने से पूरी तरह टेढ़ा हो जाता है। उसके अंदर बरसाती पानी भी
घुसता है। बीएसएनएल के क्षेत्रीय फील्ड कर्मचारियों के अनुसार विभाग
के उच्चाधिकारियों को इस बॉक्स को दुरुस्त करवाने या बदलवाए जाने
की शिकायतें कई बार की जा चुकी हें। परंतु दो वर्ष से अधिक समय
बीत जाने के बावजूद अभी भी यह केबल पिलर बॉक्स उसी तरह टूटा व खुला
पड़ा रहता है। किसी भी समय यह बॉक्स पूरी तरह से काम करना बंद कर
सकता है। और इस बॉक्स से संबंधित सैकड़ों कनेक्शन कभी भी ठप्प हो
सकते हैं। यानी ब्राड बैंड की हाईस्पीड व संचार व्यवस्था में लगातार
पैदा हो रहे व्यवधान तथा शिकायतों की अनदेखी के बाद ग्राहकों को
किसी समय पूरी तरह से या लंबे समय तक के लिए कनेक्शन मुक्त भी होना
पड़ सकता है। ठीक इसके विपरीत निजी कंपनियां बहुत तेज़ी के साथ तथा
उच्चस्तरीय और ग्राऊंड केबल का इस्तेमाल किए जाने के साथ बाज़ार में
उतर रही हें। ऐसे में यदि यह कहा जाए कि देश का सबसे बड़ा व सबसे
प्राचीन सरकारी उपक्रम भारतीय संचार निगम लिमिटेड एक बड़ी साजि़श का
शिकार हो चुका है तो यह कहना कतई गलत नहीं होगा।

4 Responses to “बीएसएनएल: एक बड़ी साजि़श का शिकार ?”

  1. इंसान

    तनवीर जाफरी जी ने बीएसएनएल के लिए एक षड्यंत्र से पीड़ित होने पर जो चिंता व्यक्त की है उसे संभवतः वहां उच्च अधिकारी अवश्य जानते होंगे लेकिन वे स्वयं भारतीय जीवन में घोर अनैतिकता के अंग होते हुए किसी समाधान का सोच भी नहीं सकते हैं| मैं अपने अनुभव से कहूँगा कि कुशल कार्यशैली मुख्यतः राष्ट्रवाद और कार्यशैली के परिवेश पर निर्भर करती है| मूलभूत आवश्यकताओं, खाना पीना और हगना, को जैसे तैसे निभाते भारतीयों में राष्ट्रवाद का अभाव रहा है और कुशल नेतृत्व के अभाव में कोई सामान्य कार्य-वातावरण कभी बन ही नहीं पाया है| उस पर जीवन का बोझ ढोते भारतीयों में अनैतिकता और भ्रष्टाचार सहज ही दीमक स्वरूप लगे हुए हैं जिसे पूर्णतया नष्ट करने के लिए फिर वो ही राष्ट्रवाद और कुशल नेतृत्व की आवश्यकता है| अब जब श्री नरेन्द्र मोदी जी कुछ करना चाहते हैं तो उनके विरोध में अपने पराए सभी यथासंभव योगदान दे उन्हें विफल बनाने में लगे हुए हैं|

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  2. suresh karmarkar

    जाफरीजी ,आप एकदम १०० %सही हैं. मैं बीएसएनएल का गत ३५ वर्षों से उपभोक्ता हुँ. आज तक निर्धारित तारीख से पूर्व देयक जमा किये हैं. किन्तु आज भी बीएसएनएल को मेरी पहचान के लिए मेरे फोटो और आईडी की जरूरत है. हुआ यह की मुझे पोस्ट पेड सीम लेना थी ,तो बीएसएनएल ने कहा की ५०० रु. की अमानत । एक फोटो, और एक आईडी चाहिए. अभी आपके हैंडसेट में जो प्रीपेड बॅलेन्स है उसे जीरो करना पड़ेगा. दूसरे ३ महीने तक इसे निरंतर रखना पड़ेगा. फिर आप चाहें तो इसका रिफंड लेंगे. (२) मेरे एक परिचित नागपुर से अन्यत्र गये. उन्होंने बीएसएनएल का चोंगा वापस करने के लिए ६-७ दफ्तरों के चक्कर लगाए कोई चोंगा लेने को तैयार नही. (३)एक अन्य परिचित इंदौर में अभी गए हैं.उन्हें बीएसएनएल संयोजन के लिए आवेदन दिए एक महीना हो चुका. पता करने पर जवाब हाज़िर.,बस एक दो दिन और. (४) रतलाम में मैं जब भी लैंड लाइन त्रुटि, नेट त्रुटि ,बिल त्रुटि के लिए फ़ोन नो. २३०००१ /२७०६०८/२३२९००/२३०५५५ लगाता हूँ तो कोई माई का लाल ३-४ बार रिंग दिए बैगेर उठता ही नहीं। अंततः मैं डीएम /जेएम को २२३००० को फोन लगाता हूँ तो उनका सहायक बात करता है और एक नया नंबर देता है मैं उसे लगाता हुँ. वह नहीं उठता। फिर मैं डीएम को लगाता हूँ तो वही कर्मचारी दिए गए को फोन लगाता है ,तब जाकर वह बात करता हैं. मैं उसे निवेदन करता हूँ की भैय्या बीएसएनएल को जिन्दा रखो इसमें आपका और हमारा भला है. जाफरीजी हालत या है की बीएसएनएल से सेवानिवृत्त जो कर्मचारी हैं वे एर्टेल./आईडिया वपर्त्े हैं.unhone बीएसएनएल कटवा दिया है ,जो बीएसएनएल से पेंशन पाते हैं और एक हम बीएसएनएल के भक्त हैं ,जो तकलीफें सहन कर भी आज ग्राहक है. ऐसा लगता है बीएसएनएल के उच्च अधिकारी में से कुछ बीएसएनएल के लिए नहीं बल्कि अन्य कम्पनियों के लिए काम करते हैं और बीएसएनएल को डूबा देना चाहते हैं.

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  3. बी एन गोयल

    B N Goyal

    मैं स्वयं एक ऐसा BSNL का भक्त हूँ जो इस से दुखी होने के बाद भी इस से चिपका हूँ -क्यों ? मालूम नहीं । मैं गत तीन साल से किसी दूर दराज़ स्थान के अपने एक हमनाम व्यक्ति का बिल प्राप्त कर रहा हूँ और वो सज्जन BSNL के उच्च अधिकारी हैं – उन्हें मैं हर महीने लिखता हूँ – उन के नाम के बिल को सादर उन्हें भेजता हूँ । उन से हर बार प्रार्थना करता हूँ कि अपने प्रभाव से अपना बिल अपने पते पर मँगवा ले और कृपया मेरे नाम का बिल मुझे भिजवा दें । लेकिन वे महाशय भी एक ही हैं – शायद उन के विभाग में भी उन कि कोई नहीं सुनता । अतः वे किसी प्रकार की लज्जा से दूर हैं । मैं वर्ष के लगभग 8 महीने बाहर रहता हूँ और बीएसएनएल को बिना किसी उपयोग के किराया आदि देता हूँ – क्योंकि में एक देसी फोन रखना चाहता हूँ । मैं BSNLया इन अधिकारी से क्या अपेक्षा करूँ ?

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