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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के पत्रकार जोगेन्द्र सिंह को जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार से आज जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति एम वाई इकबाल और जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने पत्रकार सतीश जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र, राज्य सरकार और प्रेस कांसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी करके जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। अदालत ने इन तीनों को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी। आवेदक ने मामले की सी बी आई से जांच कराए जाने के साष ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा निर्देशों (गाईद लाइंस) जारी करने की उच्चतम न्यायालय से अपील की है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर किसी भी पत्रकार की गैर प्राकृतिक मौत होती है तो उसकी जांच अदालत की निगरानी में हो। आवेदक के वकील आदेश अग्रवाल ने प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के हवाले से कहा कि पिछले ढाई साल में 70 पत्रकारों की हत्या हुई है। ऐसे में जरूरी है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई गाइड लाइन जारी की जाए। उनकी इन तर्कों के बाद कौंसिल को भी याचिका में पक्ष बनाया गया है। मालूम होना चाहिए कि यूपी के शाहजहांपुर के पत्रकार जोगेन्द्र सिंह की मौत कुछ दिनों पहले हुई थी। उन्होंने मौत से पहले बयान दिया था कि राज्य मंत्री राममूर्ति वर्मा के कहने पर कुछ पुलिस वालों ने उन पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी थी।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई गाइड लाइन जारी की जाए, यह बात इस लिए भी ज़रूरी हे कह पिछले कई सालों से पत्रकारों की हत्या अब एक आम बात बनती जा रही है। अभी मामला जोगेन्द्र सिंह का सामने आया ही था कह अब मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले में एक और पत्रकार के अपहरण के बाद कथित हत्या का मामला सामने आगया है। पुलिस के मुताबिक अपहरण के आरोप में गिरफ़्तार तीन अभियुक्तों ने कहा है कि उन्होंने पत्रकार की हत्या के बाद उनका शव जला दिया है। बालाघाट के कटंगी के निवासी 44 वर्षीय संदीप कोठारी का 19 जून की रात को अपहरण कर लिया गया था। उनके परिवार ने 20 जून को उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कटंगी के एसडीओपी जगन्नाथ मरकाम ने बताया, “हमने इस मामले में एक टीम नागपुर भेजी है ताकि बताए हुए स्थान से लाश को बरामद किया जा सके”।

लेकिन जहाँ यह मामला पत्रकारों की हत्या का है वहीं यह मामला कानून एवं व्यवस्था का भी है, इस पहलु से जब हम ग़ौर करते हैं तो यह एक गंभीर मसला बन जाता है। इसलिए जहाँ एक तरफ कानून एवं व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने की होनी चाहिए वहीं जनता को भी इस तरह के मामलों में अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए। क्यों की अत्याचार कहीं भी हो और किसी के भी साथ ग़लत है, और यह प्रक्रिया अत्याचार व दमन को बढ़ावा देने का ज़रिए बनता है। नतीजे में ज़ुल्म व ज़्यादती में वृद्धि होती है। और यह स्थिति ना देशवासियों के हित में, ना समाज के हित में उपयोगी हो सकती है, बल्कि विश्व स्तर पर देश की छवि खराब करने का साधन भी बनेगी। इसलिए कानून के दायरे में रहते हुए और शांति बनाए रखते हुए ऐसे सभी मामलों में आवाज उठाना हमारा हक़ है, और इस हक़ को छीनने का किसी को भी अधिकार नहीं है। इस अवसर पर हम ना केवल जोगेन्द्र सिंह, उसके परिवारवालों के साथ हैं बल्कि हम उन सभी साहसी पत्रकार के साथ हैं जो समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार और बुराइयों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

 

मोहम्मद आसिफ इकबाल

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