लेखक परिचय

संजय सक्‍सेना

संजय सक्‍सेना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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आगरा सहित पश्चिमी यूपी मेें कल से नामांकन प्रक्रिया
संजय सक्सेना
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहले चरण में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए कल (17जनवरी) से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इसके लिये चुनाव आयोग ने इन जिलों में नामांकन की तैयारियां पूरी कर ली है। पहले चरण में पश्चिमी यूपी में चुनाव का बिगुल बजेगाा। निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी इन जिलों से तैयारियों का जायजा ले चुके हैं और तैयारियों से संतुष्ट बताये जाते हैं। अधिकारियांें ने अपने मातहत काम करने वालों को कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी दिये हैं। चुनाव आयोग ने भले ही अपनी तैयारियां पूरी कर ली हों,लेकिन बसपा को छोड़कर अभी तक कोई भी दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पाया हैं।बीजेपी प्रत्याशियों की प्रथम सूची किसी भी समय आने की उम्मीद जताई जा रही है,वहीं सपा आपसी झगड़ें में फंस कर पिछड़ती जा रही है। बीजेपी और मोदी पर हमेशा बरसते रहने वाले कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को यूपी में हाथ से ज्यादा अखिलेश का साथ मुफीद लग रहा है,इसी लिये कांगे्रस प्रत्याशियों का फैसला अधर में लटका है। यही हाल कमोवेश अखिलेश के साथ चुनाव लड़ने का मन बनाये राष्ट्रीय लोकदल का भी है। अखिलेश के साथ छोड़ने के बाद मुलायम अब अपने ही बेटे की राह में कांटे बिछाने की कोशिश में लगे हैं। वह अखिलेश को किसी भी तरह से मुसलमान विरोधी साबित करना चाह रहे हैं।इसी लिये उन्होंने यह तक बयान दे दिया कि जावीद अहमद को डीजीपी बनाये जाने का अखिलेश विरोध कर रहा था,मैंने उसे जर्बदस्ती डीजीपी बनवाया। बाबरी मस्जिद का हवाला देकर भी मुलायम मुसलमानों से उनका साथ नहीं छोड़ने का आहवान कर रहे हैं।
बहरहाल,बाप पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही। जाट बाहुल्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शांतिपूर्वक चुनाव सम्पन्न कराना कभी आसान नहीं रहा है। यहां कई पार्टी के दिग्गजों की साख दांव पर लगी है। 2013 मंें मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यहां की सियासी तस्वीर काफी बदल गई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को छोड़कर यहां सभी दलों का सफाया हो गया था। इस बार भी इस क्षेत्र मंे जीत को लेकर बीजेपी काफी उम्मीदें लगाये बैठी है। पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह और किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत जैसे नेताओं की जन्मस्थली वेस्ट यूपी में राष्ट्रीय लोकदल के चैधरी अजित सिंह की प्रतिष्ठा तो दांव पर रहेगी ही, इसके अलावा बीजेपी नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी,हुकुम सिंह,कल्याण सिंह, संजीव बालियान, सतपाल सिंह केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह, संतोष गंगवार,महेश शर्मा,सपा छोड़कर बीजेपी में आने वाले अशोक प्रधान, समाजवादी पार्टी के आजम खान,कांगे्रस के राजब्बर आदि नेता शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि पिता मुलायम सिंह का हाथ छोड़कर अपनी अलग राह बनाने को आतुर अखिलेश बाप से अलग होने के बाद पहली बार आगरा में ही 19 जनवरी को चुनावी रैली करके चुनावी बिगुल फूकेंगे।आगरा में भीं प्रथम चरण में मतदान होना है।
प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों के लिए सात चरणों में चुनाव कराया जाना है। पहले चरण का नामांकन 17 से 24 जनवरी तक चलेगा। जिन 15 जिलों की 73 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी,उसमें 73 में से 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पहले चरण में जिन विधानसभा सीटों के लिये नामांकन किया जायेगा उसमें शामली जनपद की तीन सीटों में कैराना, थाना भवन व शामली, मुजफ्फरनगर जनपद की छह सीटों में बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी (सु), मुजफ्फरनगर, खतौली व मीरापुर, बागपत जिले की तीन सीटों छपरौली, बड़ौत व बागपत, मेरठ जिले की सात सीटों में शिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर (सु), किठौर, मेरठ कैन्ट, मेरठ व मेरठ दक्षिण, गाजियाबाद की पांच सीटों में लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद व मोदीनगर, गौतमबुद्धनगर की तीन सीटों में नोएडा, दादरी व जेवर, हापुड़ की तीन विधानसभा सीटों में धौलाना, हापुड (सु) व गढ़मुक्तेश्वर, बुलन्दशहर की सात सीटों में सकिंदराबाद, बुलन्दशहर, स्याना, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर व खुर्जा(सु), अलीगढ़ की सात सीटों में खैर(सु), बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ व इगलास (सु), मथुरा की पांच सीटों में छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा व बलदेव (सु), हाथरस की तीन सीटों में हाथरस (सु), शादाबाद व सिकन्दरा राव, आगरा की नौ सीटों में एत्मादपुर, आगरा कैंट(सु), आगरा दक्षिणी, आगरा उत्तरी, आगरा ग्रामीण (सु), फतेहपुर सीकरी, खैरागढ़, फतेहाबाद व बाह, फिरोजाबाद की पांच सीटों में टुंडला(सु), जसराना, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद व सिरसागंज, एटा की चार सीटों में अलीगंज, एटा, मरहरा व जलेसर (सु) तथा कांसगंज की तीन विधानसभा सीटों में कासगंज, अमनपुर व पटियाली शामिल हैं।
आयोग ने इन जिलों के जिलाधिकारियों से नामांकन की तैयारियों का जायजा लिया और जरूरी दिशानिर्देश भी दिये। नामांकन के समय किसी भी प्रत्याशी का जुलूस नामांकन कक्ष तक नहीं जा सकेगा। जुलूस को नामांकन का कार्य होने वाले भवन से दो सौ मीटर दूर ही रोक दिया जाएगा। इसके बाद राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ प्रत्याशी व उसके साथ पांच समर्थक तथा निर्दलीय प्रत्याशियों के साथ दस प्रस्तावक जा सकेंगे। हालांकि आयोग में यह भी विचार चल रहा है कि निर्दल के दस प्रस्तावकों को दो बार में पांच-पांच की संख्या में बुलाया जाए। इस बार प्रत्याशी को नामांकन के साथ नामांकन पत्र पर फोटो, नागरिकता प्रमाण पत्र व नोडयू लगाना होगा। इसके साथ ही शपथ पत्र के प्रारूप को भी बदला गया है।

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