मोदी सरकार में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने का एक सार्थक प्रयास

संसद में २०१७ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संसोधन विधेयक पारित कराकर ये लक्ष्य निर्धारित किया गया कि ३१ मार्च, २०१९ से पूर्व पूरे देश के सभी प्राथमिक विद्यालयों (सरकारी और निजी दोनों) में कार्यरत शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी की मदद से गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण पूर्ण कराया जायेगा.

भारत में जब भी शिक्षा की गुणवत्ता पर बहस होती है, सबसे अधिक उंगलियाँ इसकी कमजोर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की ओर उठती रही हैं. स्वतंत्रता के तुरन्त बाद आयी सरकारों ने भी इस आधारभूत कमी पर ध्यान देने के स्थान पर पहले उच्च शिक्षा पर ध्यान दिया, इसका सबसे बड़ा प्रमाण डॉ. राधाकृष्णन के नेतृत्व में बना विश्वविद्यालय आयोग (१९४८-४९) रहा. इसके बाद बने माध्यमिक शिक्षा आयोग और भारतीय शिक्षा आयोग. भारतीय शिक्षा आयोग (१९६६-६८) में ही प्रथम बार प्राथमिक शिक्षा पर विस्तार से चर्चा हुयी और इसमें सुधार के लिए प्रतिवेदन दिए गए पर इस देश में प्राथमिक शिक्षा के गुणवत्ता उन्नयन के प्रयास बहुत धीमी गति और अधूरे मन से आगे बढे. इसका कारण यह भी हो सकता है कि शिक्षा एक लम्बे समय तक सत्ता की प्राथमिकता बन नहीं पाई क्योंकि शिक्षा प्रश्न करना सिखाती है और सत्ता को प्रश्न पसंद नहीं होते.

भारत में प्राथमिक शिक्षा मूल अधिकार हो, इसकी मांग कोई नयी नहीं थी, पर इसके लिए ८६वां संविधान संशोधन भी २००२ में अटल बिहारी बाजपेयी जी की सरकार के समय ही किया जा सका. यद्यपि इसे भी अमली जामा पहनाने में ०७ वर्ष और लग गए और UNESCO के सहस्राब्दी लक्ष्यों को प्राप्त करने की तिथि नजदीक आने के दबाव में ही सही, २००९ में शिक्षा को एक त्रुटिपूर्ण और अधूरे कानून द्वारा भारत में मूल अधिकार घोषित कर दिया गया.

२००९ के शिक्षा के अधिकार कानून में जो लक्ष्य निर्धारित किये गए उनमें से अधिकांश को उनकी अंतिम तिथि तक पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किया जा सका और उनमे से प्रमुख था: सभी प्राथमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता.

भारत सरकार द्वारा संसद में यह स्वीकार किया गया कि २०१७ तक लगभग ११ लाख प्राथमिक शिक्षक बिना किसी प्रशिक्षण के शिक्षण कार्य में संलग्न थे. जिस देश में इतनी बड़ी संख्या में अप्रशिक्षित शिक्षक शिक्षा की आधारभूत इकाई प्राथमिक शिक्षा में कार्यरत हों, वहां की शैक्षिक गुणवत्ता पर यदि कोई प्रश्न उठे तो उसे नकारा कैसे जा सकता है.

जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को इसकी जानकारी हुयी तो उन्होंने तत्काल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को इस दिशा में कदम उठाने को कहा. माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रेरणादायी नेतृत्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक ऐसे लक्ष्य को पूरा करने को बीड़ा उठाया जिसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती थी. संसद में २०१७ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संसोधन विधेयक पारित कराकर ये लक्ष्य निर्धारित किया गया कि ३१ मार्च, २०१९ से पूर्व पूरे देश के सभी प्राथमिक विद्यालयों (सरकारी और निजी दोनों) में कार्यरत शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी की मदद से गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण पूर्ण कराया जायेगा.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अपने सभी संगठनों और संस्थाओं से चर्चा करने के उपरांत राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संगठन को यह उत्तरदायित्व सौंपा कि देश में लगभग १२ लाख अप्रशिक्षित सेवारत प्राथमिक शिक्षकों को १८ माह का शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के तकनीकी नवाचारों के प्रयोग से पूर्ण कराया जाये. यह विश्व में अपने आप का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम है और आज पूरा होने की कगार पर है.

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संगठन ने देश के सभी राज्यों के लगभग १२ लाख से अधिक अप्रशिक्षित सेवारत प्राथमिक शिक्षकों को न केवल अत्यंत कम शुल्क पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराया वरन इसे सफलतापूर्वक निर्धारित समयावधि में पूर्ण भी करा पाया है.

इस अनूठे प्रशिक्षण कार्यक्रम की कुछ मुख्य विशेषताएँ निम्नवत रहीं:

सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों तक उनकी मातृभाषा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना: शिक्षकों को विषयवस्तु समझने में सुविधा हो, इसके लिए हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त असमी, बंगाली, गुजराती, ओडिया, कन्नड़, पंजाबी, तेलगु, तमिल, मराठी और उर्दू भाषा में सभी विषयों की अध्ययन सामग्री का अनुवाद ई-सामग्री के रूप में उपलब्ध कराया गया. जिससे प्रत्येक शिक्षक इसे अपनी सुविधा के अनुसार डाउनलोड करके पढ़ सकता है. इसके साथ ही सभी शिक्षकों को यह अध्ययन सामग्री सी.डी. में भी उपलब्ध करायी गयी.

ई-लर्निंग पोर्टल ‘स्वयं’ का उपयोग: सभी शिक्षकों को शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के दूरदर्शी नवाचार ई-लर्निंग पोर्टल ‘स्वयं’ का उपयोग करके शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया. इस पोर्टल के माध्यम से न केवल अध्ययन सामग्री को छोटे छोटे खण्डों में बाँट कर module के रूप में प्रस्तुत किया गया वरन उनकी समस्या समाधान की अंतक्रियात्मक व्यवस्था भी की गयी.

“स्वयंप्रभा” टेलीविजन चैनल से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: भारत सरकार ने २०१७ में घर घर तक शिक्षा पहुँचाने के लिए जो ३२ डायरेक्ट टू होम निःशुल्क शैक्षिक चैनल प्रारंभ किये, उनमे से एक को पूर्णतयः शिक्षक शिक्षा को समर्पित किया गया. इस चैनल के माध्यम से देश भर के चुने हुए श्रेष्ठ शिक्षाविदों के लगभग १००० व्याख्यान निरंतर प्रसारित किये गए, जिससे सभी शिक्षकों को अपने प्रशिक्षण को पूर्ण करने में सहायता मिली. साथ ही प्रतिदिन २ घंटे का लाइव सत्र आयोजित कर उन्हें अपने प्रश्न पूछने और समस्या समाधान के अवसर प्रदान किये गए.

देशभर में अध्ययन केन्द्रों पर शिक्षण-कौशल प्रशिक्षण: इस कार्यक्रम में राज्य सरकारों का सहयोग लेकर लगभग प्रत्येक जिला और तहसील स्तर तक आवश्यकता अनुसार हजारों अध्ययन केंद्र स्थापित किये गए. जहाँ अवकाश के दिनों में प्रशिक्षणरत शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण कौशलों का प्रशिक्षण कार्यशालाओं और व्यक्तिगत-संपर्क कक्षाओं के माध्यम से प्रदान कराया गया.

अगर सारांश रूप में कहा जाये, तो भले ही स्वतंत्रता के ७० वर्ष से अधिक समय से प्राथमिक शिक्षा की इस आधारभूत आवश्यकता पर ध्यान न दिया गया हो परन्तु माननीय मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में एक असंभव से लगने वाले कार्य को पूरा करने का न केवल बीड़ा उठाया गया वरन उसे सफलता पूर्वक पूरा भी किया गया. आने वाले समय में प्रशिक्षित अध्यापकों की उपलब्धता भारत की भावी पीढ़ी में जिन मूल्यों का निर्माण करेगी वह पूरे देश को आगे ले जाने में अपना योगदान देगी.

ऐसे में ये कहने में कोई संशय नहीं है कि जो कार्य विगत सात दशकों में पूरा करने का कोई स्वप्न भी नहीं देख पाया उसे वर्तमान सरकार ने न केवल देखा, वरन उसकी रूपरेखा बनायी, उसे पूरा किया और न केवल लाखों अप्रशिक्षित शिक्षकों के कैरियर को संवारा वरन करोंड़ों बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए सक्षम हाथों को तैयार किया. इस महती कार्य का पूरा श्रेय आदरणीय मोदी जी के उर्जावान नेतृत्व, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संगठन के प्रमुख और उनके सभी सहकर्मियों को जाता है.

डॉ गौरव सिंहलेखक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में शिक्षा विभाग में प्राध्यापक हैं (www.academics4namo.com)

साभार : academics4namo.com

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