अब वक्त आ गया है कि गंभीर की पहल पर गंभीरता से विचार किया जाए…….

इंद्रभूषण मिश्र

आरोप- प्रत्यारोप, सत्ता और सियासत के गलियारों की तू- तू मैं – मैं की खबरों से मन उब गया हो या फिर हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड, कंगना से लेकर रितिक तक की खबरों से आप पक गए है तो कोई बात नहीं. देश बदल रहा है . इन्हीं खबरों की दुनिया में कुछ ऐसी खबरें भी है जो हमें सोचने -समझने और सीखने पर मजबुर कर देती है. हमारे इसी समाज में कुछ ऐसे भी लोग है जो हमारे लिए प्रेरणा का काम करते है। अभी हाल ही में टीम इंडिया के बल्लेबाज गौतम गंभीर ने जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए ASI अब्दुल राशिद की बेटी जोहरा की पढ़ाई का खर्च उठाने का फैसला किया है. यह पहली बार नहीं है. इसके पहले भी गंभीर शहीदों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान कर चुके हैं. शहीद राशिद की बेटी जोहरा की रोती हुई तस्वीर देखने के बाद गौतम गंभीर अत्यंत भावुक हो गए थे. जिसके बाद गंभीर ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मैं आपको लोरी तो नहीं सुना सकता पर आपके सपनों को पुरा करने में आपकी मदद जरूर कर सकता हूं. इसके बाद गंभीर ने जोहरा की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा कर दी. देश की सीमाओं पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों तथा उनके परिजनों की मदद के लिए सामने आना किसी प्रेरणा से कम नहीं है। गौतम गंभीर की इस पहल की जितनी तारीफ की जाए कम है। इसके पहले अक्षय कुमार और सायना नेहवाल भी शहीदों के परिजनों की मदद कर चुके है. इसी साल अप्रेल में सुकमा में 25 जवान शहीद हो गए थे. जिसके बाद अक्षय कुमार ने जवानों के परिजनों को नौ – नौ लाख रूपए की मदद की थी . वही बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने 50-50 हजार की मदद किया था . अक्षय कुमार अक्सर शहीदों के परिजनों के साथ खड़े नजर आये है.उन्होनें शहीदों के परिजनों की मदद के लिए भारत के वीर’ नाम से वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया है. यह पोर्टल का उद्देश्य शहीदों के परिजनों को आर्थिक सहयोग करना है. सरकार को भी आगे आकर शहीद परिवारों की मदद के लिए और अधिक दिल खोलने की जरूरत है। सरकारें अक्सर शहीदों के परिजनों की मदद के नाम पर मरहम पट्टी लगाने का काम करते आई है. पिछले साल उड़ी में देश के 18 जवान शहीद हो गए थे .जिसमें बिहार के तीन जवान थे .बिहार सरकार ने महज पांच लाख मुआवजे की घोषणा की थी.तब बिहार सरकार की चौतरफा आलोचना हुई थी . जिसके बाद बिहार सरकार को मुआवजे की रकम बढ़ा कर 11 लाख करना पड़ा था। इसी तरह अन्य सरकारें भी शहीदों के परिजनों के साथ भेदभाव करती रही हैं. जिन विषयों पर सरकार को सियासत और वोट बैंक का नफा- नुकसान दिखता है वहां सरकारें पैसों की बरसात कर देती है. मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार ने किसान आंदोलन के समय पुलिस फायरिंग में मरने वालों के परिजनों के लिए एक -एक करोड़ की मुआवजे की घोषणा करती है, वही जब शहीदों के परिजनों की मदद की बात सामने आती है तो इनकी पोटरी खाली पड़ जाती है. सरकारें सता और सियासत की पेंच में फंस कर रह जाती है. सरकार मदद भी करती हैं तो वह वोट बैंक तक सीमित रह जाती हैं . ऐसे समय में गंभीर, अक्षय कुमार, सायना नेहवाल जैसे लोगों का सामने आना और शहीदों की परिजनों का मदद करना सराहनीय पहल है. समाज के रईस लोगों को इससे सीख लेने की जरूरत है. अब वक्त आ गया है कि सरकार के साथ -साथ बड़े -बड़े अमीर घराने, बड़े कारोबारी सामने आये और गंभीर, अक्षय कुमार, साइना नेहवाल जैसे लोगों से प्रेरणा लेकर शहीदों के परिजनों की मदद कर नई मिसाल पेश करें।

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