लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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नई दिल्ली 23 मार्च। रेल मंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में रेल महकमा किस कदर अलसाया हुआ अंगडाई ले रहा है इसकी एक बानगी है बीते दिनों रेल विभाग द्वारा जारी एक विज्ञापन। इस विज्ञापन में रेल विभाग ने वह कमाल कर दिखाया है जो आज तक काई नहीं कर सका है।

गौरतलब है कि इसके पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने विज्ञापन में पाकिस्तान के फौजी अफसर की फोटो छापकर लानत मलानत झेली थी। वह मामला अभी शांत नहीं हुआ है और अब ममता बनर्जी के इस नक्शे ने बवाल काट दिया है। भारतीय रेल की एन नई रेलगाडी ”महाराजा एक्सप्रेस” के लिए जारी विज्ञापन में नई दिल्ली से बरास्ता आगरा, ग्वालियर, खजुराहो, बांधवगढ, बाराणसी, गया होकर कोलकत्ता जाना दर्शाया गया है।

मजे की बात तो यह है कि इस नक्शे में दिल्ली को पकिस्तान में ग्वालियर को गुजरात में खजुराहो को माहाराष्ट्र में बाराणसी को उडीसा में कोलकता और गया को अरब महासागर में होना दर्शाया गया है। दिल्ली की राजनैतिक फिजां में चल रही चर्चाओं के अनुसार रेल मंत्री की नजर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ही लगी हुई हैं, यही कारण है कि जब से वे रेल मंत्री बनी हैं तब से देश भर में सिर्फ कोलकता एक्सप्रेस की सीटी ही सुनाई दे रही है।

ममता बनर्जी ने रेल मंत्री बनते ही एक फरमान जारी कर दिया था कि त्रणमूल कांग्रेस के मंत्री अपना ज्यादा से ज्यादा समय पश्चिम बंगाल में दें। बाद में एक और फरमान जारी कर ममता ने पश्चिम बंगाल में रेल्वे के विज्ञापनों से प्रधानमंत्री डॉ मन मोहन सिंह और कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के नामों को भी हटवा दिया था।

रेल मंत्री ममता बनर्जी का पूरा का पूरा ध्यान पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों पर है, यही कारण है रेल महकमे में मुगलई मची हुई है। रेल में चलने वाले चल टिकिट परीक्षकों का आलम यह है कि रात की गाडियों में उनके मुंह से शराब की लफ््फार दूर से ही सूंघी जा सकती है। ये टीटीई लोगों की जेब काटने से नहीं चूक रहे हैं। रेल्वे में दुर्घटनाओं में जबर्दस्त बढोत्तरी हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के उपरांत भारतीय रेल मंत्रालय के इस तरह के कारनामे को देखकर यही कहा जा सकता है कि मनमोहन सिंह जी पूरे कुंए में ही भांग घुली हो तो फिर अंजाम ए हिन्दुस्तान क्या होगा।

-लिमटी खरे

One Response to “महिला बाल विकास के बाद अब रेल्वे ने दिखाया करिश्मा ए विज्ञापन”

  1. Divya

    Mamta ji is just another politician. Her focus is CM’s chair. She cannot think beyond that. All are selfish. She is not an exception.

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