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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी ये सभी बीमारियां रक्त के उत्पादों और यौन सम्बंधों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में चली जाती हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक़ गैर शिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से इंजेक्शन लेने से एचआईवी/एड्स फैलने का खतरा हो सकता है।

ट्रांसमिशन

एक व्यक्ति से दूसरे में एचआईवी की प्रक्रिया तब होती है जब एचआईवी सवंमित व्यक्ति का आंतरिक तरल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति की तहत तक पहुंचता है जिसमें ब्लडस्ट्रीम शामिल होती है, तब वह दूसरे में पहुंचता है। आमतौर पर एचआईवी इस तरह दूसरे में पहुंचता है: एक ही सुई का इस्तेमाल, अनप्रोटेक्टेड एनल, वैजाइनल और कभी-कभी ओरल सेक्स ओर मां से शिशु में अगर उसे डिलीवरी से पहले इसकी समस्या हो साथ ही स्तनपान से भी।

एचआईवी असुरक्षित तरीके से कई साथियों के साथ यौन सम्बंध बनाने से, रक्त के उत्पादों को लेने से, मां से शिशु में (जन्म से पहले या इसके दौरान या फिर स्तनपान के समय) और सहवास के दौरान (वैजाइनल ओर एनल)। जेनिटल और रेक्टम में एचआईवी सीधे म्यूकस मेंब्रेन्स को संक्रमित कर सकता है या फिर कटने से भी या जख्म से भी सहवास के दौरान इसका संक्रमण संभव है (इसको ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं)। वैजाइनल ओैर एनल सहवास में सबसे ज्यादा इसकी आशंका रहती है।

मुंह एचआईवी के लिए इनहास्पिटेबिल माहौल होता है (शुक्राणु, वैजाइनल फ्ल्यूड या ब्लड), इसका मतलब ये है कि एचआईवी फेलने का खतरा, गले, मसूड़े या ओरल मेंब्रेन्स से कम होता है बनिस्बत वैजाइनल या एनल मेंब्रेन्स के। ऐसे भी मामले सामने आएं है जो ओरल तरीके से इसका ट्रांसमिशन हुआ है, इसलिए हम नहीं कह सकते कि एचआईवी सवंमित सीमेन, वैजाइनल फ्ल्यूड या ब्लड मुंह में लेना खतरे से मुक्त है। हालांकि ओरल सेक्स में इसका खतरा कम रहता है।

एक इंजेक्शन की सुई से रक्त सीधे एक व्यक्ति से दूसरे के ब्लडस्ट्रीम में पहुंचता है। इसमें रक्त से जनित बीमारियों के फैलने की संभावना काफी होती है। सुई को एक दूसरे के लिए शेयर करना उच्च आशंकित खतरे की श्रेणी में आता है।

एचआईवी सवंमित मां से सीधे वायरस जन्म के दौरान या स्तनपान से शिशु में पहुंच सकता है। स्तनपान में एचआईवी होता है और थोड़ा सा भी दूध पिलाने से महत्वपूर्ण संक्रमण वयस्कों में भी संभव है, जो कि शिशु में इसके ट्रांसमिशन की पुष्टिs करता है।

एचआईवी से बचाव के लिए प्रभावी रणनीति :

एचआईवी के बारे में जानकारी और उसके बारे में समझदारी से ही इसके ट्रांसमिशन पर काबू संभव है और संभवत: यही इसके काबू पाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

कई लोगों से सेक्स सम्बंध से बचना और सुइयों को शेयर न करके भी एचआईवी के संक्रमण के साथ ही अन्य ट्रांसमिशन वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। लेकिन अगर लोग इन विकल्पों से अपने आपको नहीं बचा सकते तो वे बचाव के तरीके जैसे लैटेक्स कंडोम (पुरुश या महिला) चुन सकते हैं।

बचाव की तीन स्थितियां :

• पहला, हर व्यक्ति को संक्रमण से बचाव के हर तरह के जरूरी कदम उठाने चाहिए।

• दूसरा संक्रमित व्यक्ति जो यह नहीं जानता हो कि वह संक्रमित है तो उसे इस बारे में जागरूक करे और इसके लिए जरूरी जांच करवाए और

• तीसरा यह कि जो पहले से ही इसकी गिरफ्त में हों तो उसे भी अन्य लोगों में यह बीमारी न हो इसके लिए बचाव के जरूरी तरीके अपनाए और इस बारे में अन्य को भी जागरूक करे।

एचआईवी संक्रमण से बचाव के सबसे ज्यादा प्रभावी तरीके :

• वैजाइनल, एनल या ओरल सेक्स न करें।

• सिर्फ दो म्यूचुअली मोनोगैमस, असंक्रमित साथी से ही करें साथ ही जो सुई या सिरिंज को शेयर न करते हों।

• बिना डाक्टर के कहे इंजेक्शन न लें ओर न ही ड्रग्स लें।

• किसी भी कीमत पर सुई या सिरिंज को शेयर न करें (जब गैर कानूनी तरीके से इंजेक्शन से ड्रग्स लेते हैं, दवाएं, विटामिन या स्टीरायड लेते हैं या फिर टट्टू बनवाना या बाडी पियर्सिंग करवाना।)

• ऐसी किसी भी गतिविधि में हिस्सा न लें जिसमें रक्त, शुक्राणु, वैजाइनल फ्ल्ूयूड्स या स्तनपान के बदलाव की प्रक्रिया शामिल हो।

एचआईवी संक्रमण को कम करने के तरीके :

• लैटेक्स कंडोम का इस्तेमाल करना सबसे बढ़िया तरीका है चाहे वैजाइनल, एनल या ओरल सेक्स करना हो।

• ड्रग्स या शराब का सेवन न करें क्योंकि इससे आप बहक जाते हैं।

• साफ सुथरी सुई या सिंरिज जिसे क्लोरीन ब्लाीच या पानी से साफ करें यदि बचाव का अन्य कोइ तरीका नहीं रहा।

• जब ब्लड के संपर्क में आएं तो बचाव की अन्य चीजें (जैसे लैटेक्स ग्लव्ज़) अपनाएं।

1.युध्द के लिए एक नया हथियार-एचआईवी कन्या, जिसमें अपहरण के बाद एचआईवी ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिया, एचआईवी पॉजिटिव सिरिंज का उपयोग पैसे के लिए किया जा सकता है।

2. शनिवार, 4 अप्रैल 09 को 52 वर्षीय जॉनसन अजीगा को हत्या का दोषी करार दिया गया जिसमें उसने अपने यौन सम्बंध बनाने वाले साथियों को इस बारे में नहीं बताया कि जिससे बाद में उनकी एड्स सम्बंधी बीमारी से मौत हो गई। कनाडा में यह अपने तरह का पहला मामला था और संभवत: दुनिया में एचआईवी पॉजिटिव का भी पहला मामला जिसमें साथियों को न बताने पर व्यक्ति को दोषी करार दिया गया हो।

3. अजीगा युगांडा का एक पूर्व सरकारी शोधकर्ता को दोषी पाया गया है। उसने सात महिलाओं को संक्रमित किया; चार अन्य साथियों को वायरस नहीं पहुंचा। क्राउन ने दलील दी कि अजीगा ने महिलाओं को ”स्लो एक्टिंग पॉयजन” से संक्रमित किया जिससे उनका इम्यून सिस्टम गड़बड़ हुआ जिसकी वजह से उनकी मौत कैंसर से हो गई। इसमें सेक्स को लेकर दलील नहीं सुनी गई क्योंकि महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव के बारे में जागरूक नहीं थीं।

4. संक्रमित हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी सभी के रक्त को मौत के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल संभव है।

सुई से होने वाले जख्म

1. औसतन सुई से होने वाले जख्म बिना प्राफीलैक्सिस के प्रति 1000 में करीब 3 जख्म के मामले सामने आते हैं। अनुमान के मुताबिक यह खतरा कम से कम 80 फीसदी होता है जब प्राफीलैक्सिस (3 घंटे के अंदर शुरू किया जाए) को समय के हिसाब से लिया जाता है। हॉलो नीडिल में संक्रमण सबसे ज्यादा होता है, हाई बोर नीडिल और धमनी या नस में घुसाने के दौरान।

2. पहले तो स्वास्थ्यकर्मियों में हेपेटाइटिस बी वैक्सीन के दौरान फैला जाता था, हेपेटाइटिस बी वायरस के सूचक स्वास्थ्यकर्मियों में आम आबादी की तुलना में ज्यादा वायरस होता था। 1991 के दिशा-निर्देशों के में सभी स्वास्थ्यकर्मियों को हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन लेने के लिए कहा गया था। हाल के अध्ययन में सुझाव दिया गया कि इस रणनीति को काफी सफल देखा गया जिससे स्वास्थ्यकर्मियों में इस वायरस के इनफेक्शन के मामलों हेपेटाइटिस बी में तेजी से कमी यानी 95 फीसदी तक दर्ज की गई।

3. रक्त जनित बीमारियों में हेपेटाइटिस बी वायरस से ज्यादा संक्रमण फैलाने वाला होता है। यह परक्यूटेनियस और म्यूकोजल दोनों तरह से और मानव के काटने से भी फैलता है। यह अन्य तरह से भी फैल सकता है जैसे कि फिंगर स्टिक डिवायस के इस्तेमला से या फिर ग्लूकोज मापने के लिए रक्त लेने से, मल्टी डोज मेडिकेशन वायल, जेट गन इंजेक्टर, और एंडोस्कोप से। यह वायरस सात दिनों तक जिंदा रह सकता है और इतने दिनों तक संक्रमण फैला सकता है।

4. स्वास्थ्यकर्मियों में एचसीवी इनफेक्शन का प्रचलन आम आबादी के समान होता है। स्वास्थ्यकर्मियों में हेपेटाइटिस सी वायरस के लिए एचसीवी की टेस्टिंग तब कराई जानी चाहिए जब वे नीडिल स्टिक, शार्प इंजरी, म्यूकोजल, या हेपेटाइटिस सी वायरस पॉजिटिव रक्त के इंटैक्ट का सामना करें। औसतन सीरो कनवर्जन से लेकर अनइंटेंशनल नीडिल स्टिक या शार्प एक्सपोजर के बाद हेपेटाइटिस सी वायरस में हेपेटाइटिस सी वायरस पॉजिटिव 1.8 फीसदी (रेंज 0-7 फीसदी) है। हेपेटाइटिस सी वायरस ब्लड स्प्लैश से लेकर कंजक्टिवा को ट्रांसमिशन के तौर पर परिभाषित किया गया है। हेपेटाइटिस सी वायरस वातावरण में 16 घंटों तक जिंदा रह सकता है लेकिन ये चार या सात दिनों तक जीवित नहीं रहता। (स्टार न्यूज़ एजेंसी)

One Response to “एड्स : बचाव ज़रूरी है”

  1. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    अनेकों माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार एड्स का रोगाणु सीआईए द्वारा तैयार करवाया गया था और पोलियो की वैक्सीन में डालकर अफ्रिका में फैलाया गया. अमेरिका में हेपेटाईटस बी. की वैक्सीनेशन द्वारा इसे फैलाने की जानकारी मिली है. वास्तव में संसार की आबादी घटाने और नापसंद ‘ युस्लेस ईटर्स’ को समाप्त करने का एक गुप्त एजेंडा है जिसे प्रयत्न पूर्वक गुप्त रखा गया है. उसी का एक अंग ये रुग फैलाने के प्रयास भी हैं.
    * ख़ास बात यह भी है की दवा निर्माता कुछ अमेरिकी और यूरोपीय कम्पनियां रोग फैलाने के गुप्त प्रयास इस लिए भी कर रही हैं क्यूंकि इससे उन्हें अरबों-खरबों की कमाई करने का अवसर मिलता है.
    – सारे संसार को अपने हथकंडों से चलाने का काम ये दवा और हथियार बनानेवाले ही तो कर रहे हैं, इसे जानिये.
    – जहांतक एड्स व हेपेटाईटिस के इलाज की है तो कृपया ”प्रवक्ता.काम” के विविध या अन्य स्तम्भ में मेरे दो लेख इस विषय पर पढ़ लें. मेरे विचार में इनका इलाज सरल है. आप चाहें तो आजमालें .

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