लेखक परिचय

प्रदीप रावत

प्रदीप रावत

स्वतंत्र लेखक

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केदारघाटी में शराब बन्दी के लिए फिर जागरूक हुयी मातृ शक्ति

चारो तरफ है हाहाकार 
बंद हो नशे का बाज़ार
घर घर में सबको जगाना है
हमें देश को एक नया बनाना है
हो जाए तंदुरस्त अब उत्तराखंड
नशे को दूर भगाना है”

अगर हमारे देश के पुरषो ने यदि महान कार्य किये है तो मातृशक्ति भी किसी से पीछे नही रही है और समय समय पर समाज को जागरूक करने का कार्य किया है । उत्तराखंड में शराब बन्दी के लिए तो पहले से ही अनेक वीर महिलाओ ने अकेले ही बीड़ा उठाया है । जिसका सबसे बड़ा उदाहरण टीचरी माई है जिन्होंने गढ़वाल में शराब के नाम पर चल रही टिचरी का विरोध किया ।अकेले ही शराब की दुकानों पर आग लगा दी थी इसलिए उनका नाम टिचरी माई पड़ा
टिचरी माई की तरह ही केदारघाटी की मातृ शक्ति ने शराब की दुकानों की बन्द करने के लिए दृढ़ संकल्प लिया है ।
हाई कोर्ट के एक फैसले के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे वाली सारी शराब की दुकानों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जायेगा जिसका उत्तराखंड के पहाडी इलाको में मातृशक्ति द्वारा जोरदार विरोध हो रहा है । केदारघाटी में इसके विरोध में महिलाए अनसन पर बैठ गयी है । और एक शराब विरोधी संगठन बनाया है इस संगठन का मुख्य उदेश्य शराब बिक्री पर पूर्णतया से प्रतिबन्ध लगाना है । महिलाओ ने मुख्य राजमार्ग पर चक्काजाम कराकर विरोध प्रकट किया । उखीमठ से सुरू यह विरोध धीरे धीरे अन्य इलाको में भी तेज़ी से बड रहा है । जिसमे चमोली में भी महिलाओ ने शराब की दुकानों को तोड़कर शराब की पेटियों को जलाया है । आखिर विरोध करे भी क्यों नही क्योकि शराब तो पुरष पीते है परंतु इसका असर महिलाओ और उनके बच्चों पर पड़ता है । महिलाए अपने भविष्य के प्रति कितनी सजग है इस बात को इसी से समझा जा सकता है की भूखे पेट दिनभर बरसात में भीगने की जरा सी भी परवाह न कर पुरष समाज में फैली इस गन्दगी को साफ़ करने का कठोर संकल्प लिया है ।
दिनप्रतिदिन अखबारो में यह खबर मिलती है की आज शराब के नशे में गाडी चलाने से इतने लोगो की मौत हो गयी । और दूसरी तरफ पारवारिक मनमुटाव शराब के कारण सबसे ज्यादा हुए है
सम्पूर्ण केदारघाटी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और देश भर के तीर्थयात्री इस घाटी के तीर्थ स्थानों के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते है । तीर्थ यात्री इस देवभूमि के प्रतिएक वस्तु व जगह में शिव का अंश देखते है केदारघाटी का नाम लेते ही लोग केदारवाशियो को एक सम्मान की दृष्टि से देखते है । लेकिन अगर इस घाटी में जगह जगह सड़को पर शराब के ठेके और शराब में लिप्त स्थानीय लोगो को देखते है तो उनकी आस्था पर आघात जैसा लग जाता है
केदारघाटी में शराब की दुकाने इसलिए भी पूर्ण तरीके से बन्द होनी चाहिए क्योकि यहाँ समय समय पर दैवीय प्रकोप के कारण आपदाएं दस्तक देती है जिसमे बड़े स्तर पर जान माल की हानि होती है । इन पवित्र स्थानों की पवित्रता को खराब करने में स्थानीय लोगो ने भी कसर नही छोड़ी है । जिसके कारण समय समय पर दैवीय प्रकोप के कारन आपदाएं आमन्त्रित हो जाती है ।यह एक कड़वी हकीकत है शराब की सुगमता के कारण लोग कई बार तीर्थ स्थानों पर भी शराब पंहुचा देते है । उत्तराखंड के पहाड़ी इलाको में शराब की बिक्री प्रतिदिन बड़े पैमाने पर होती रही है । इस सम्बन्ध में एक कहावत है “सूर्य अस्त पहाड़ मस्त” यह एक सत्य है जिसे हम स्वीकार करे या ना और अब शराब की दुकानों को शिफ्टिंग होने से ये दुकाने गाँव के करीब शिफ्ट होगी जो की भविष्य के लिए एक खतरा है । ऐसा होने से गाँव में हर समय शराब सुगमता से मिल जायेगी । शराब की यह सुगमता युवा पीढी को खोखला कर देगी और सुख़ और शांति के प्रतीक गाँवो में भी शहरो की तरह दहशत का माहौल बना रहेगा । गाँवो के मेले, त्योहारो और अन्य धार्मिक क्रियाकलापो का वातावरण और भी दूषित हो जाएगा ।

गन्दगी पुरुष प्रधान समाज की और सफाई का कार्य महिलाओ का आखिर ये कब तक चलता रहेगा । अब समय आ गया है की हम पुरषो को भी महिलाओ की भावनाओ का सम्मान करते हुए इस शराब विरोधी मुहीम में सम्मलित होना होगा और एक सभ्य समाज का निर्माण करना होगा । तभी राम राज्य स्थापित हो पायेगा
प्रदीप रावत

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