प्रदीप रावत

स्वतंत्र लेखक

उत्तराखंड में जल संकट :चुनोतियाँ व समाधान की दिशा में प्रयास

वास्तव में पेयजल संकट आगामी भविष्य के लिए एक चुनोतिपूर्ण विषय है । इस जटिल समस्या के निवारण के लिए हमें केवल सरकारी नीतियों के भरोशे न बैठकर जनता को भी जागरूक करना होगा जिससे हम प्रकृति द्वारा प्रदत्त इस मूल्यवान संसाधन को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए संजोकर रख पाएं। गाँवो से शहरो की तरफ होने वाले तीव्र पलायन के कारण शहरो पर अतरिक्त जनसंख्या दवाब बढ़ रहा है इस जनसंख्या दवाब के कारण शहरो में पेयजल की किल्लत साफ़ नज़र आती है । उत्तराखंड के अनेक इलाके ऐसे है जहाँ पानी भरने के लिए लोगो को घण्टों भर लाइन में रहना पड़ता है यह समस्या केवल शहरो में ही नही बल्कि उत्तराखंड के अनेक पहाड़ी गाँवो की भी है जहा आज भी महिलाए किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाकर अपनी आवश्यकताओ को पूरा करती है ।

केदारघाटी में शराब बन्दी के लिए फिर जागरूक हुयी मातृ शक्ति

सम्पूर्ण केदारघाटी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और देश भर के तीर्थयात्री इस घाटी के तीर्थ स्थानों के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते है । तीर्थ यात्री इस देवभूमि के प्रतिएक वस्तु व जगह में शिव का अंश देखते है केदारघाटी का नाम लेते ही लोग केदारवाशियो को एक सम्मान की दृष्टि से देखते है । लेकिन अगर इस घाटी में जगह जगह सड़को पर शराब के ठेके और शराब में लिप्त स्थानीय लोगो को देखते है तो उनकी आस्था पर आघात जैसा लग जाता है

उत्तराखंड का बालपर्व “फूलदेई”

पहाड़ की यह अनूठी बाल पर्व की परम्परा जो मानव और प्रकृति के बीच के पारस्परिक सम्बन्धों का प्रतीक है । तेज़ी से बड़ रही आधुनिकता के कारण यह प्राचीन परम्परा विलुप्त की कगार पर खड़ी हो गयी है इन प्राचीन परम्पराओ को बचाने के लिए सरकार को निति तय करनी होगी और स्कूलों मे बच्चों को इस बालपर्व फूलदेई को मनाने के लिए प्रेरित किया जाय व इस परम्परा से संबन्धित लेख या कविताओं को नौनिहालों के पाठ्यक्रम मे शामिल किया जाय ताकि इसे व्यापकता प्रदान हो सके.