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    Homeसाहित्‍यकविताअल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा

    अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा

    —विनय कुमार विनायक
    अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा,
    आ मेरे मौला आ, संग-संग होली मना!

    राधा-कान्हा के संग में तुम भी आज रंग जा
    आ मेरे मौला आ,संग-संग होली मना!

    तेरे मिल्लत में हमने ईद की सेवईयां खाई,
    तुम भी होली उत्सव का थाली भर पुआ खा!

    अल्लाह,ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा!
    आ मेरे मौला आ, संग-संग होली मना!

    विशेष संज्ञा से जबतक स्वीकारोगे विशेष पूजा
    तब तक समझेंगे लोग तुझे एक नहीं दूजा!

    सातवें आसमान से उतर मोरमुकुट पीतांबर पहने
    इंसानी रंग में रंग करके धरती पर आ जा!

    हे विश्व के बिस्मिल्लाह भूपर चैन की बंसी बजा
    आ मेरे मौला आ, संग में मिलके होली मना!

    राम,अब्राहम,कृष्ण,क्राइस्ट सब तुम्हारी ही संज्ञा
    मस्जिद में राम-कृष्ण-क्राइस्ट को पनाह दो!

    मंदिर गिरजाघर में हे खुदा खुद निवास कर लो
    जन-जन-कण-कण बासी तुम ये कथन सार्थक हो!

    विभिन्न पर्यायधारी अल्लाह ईश्वर रब तुम हो
    तुमने जन्म दिया ढेर अवतार पैगम्बर गुरु को!

    राम-कृष्ण अवतार तुम्हारे, यीशु भी तेरा बेटा
    अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा!

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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