लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन किशोर सिन्हा

दिनांक ६ दिसंबर को अन्ना हजारे जी ने अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध जो वक्तव्य दिया उससे अरविन्द केजरीवाल की निष्ठा सन्दिग्ध हुई है। अन्नाजी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल सत्ता और धन के लिए राजनीति कर रहे हैं और वे कभी भी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट नहीं डालेंगे। अन्नाजी कोई दिग्विजय सिंह नहीं हैं जिनके कथन को हवा में उड़ा दिया जाय। अन्नाजी के कारण ही केजरीवाल ज़ीरो से हीरो बने। उन्होंने यश और प्रसिद्धि के लिए अन्ना जी का भरपूर दोहन किया। अन्नाजी को जब केजरीवाल की असली मन्शा का पता लगा तो उन्होंने अविलंब केजरीवाल से संबन्ध तोड़ लिया। अन्ना के जन आन्दोलन के साथ अरविन्द केजरीवाल की निष्ठा आरंभ से ही सन्दिग्ध रही है। कांग्रेस के एजेन्ट स्वामी अग्निवेश केजरीवाल की ही अनुशंसा पर अन्ना की कोर कमिटी के सदस्य बने। अग्निवेश के चरित्र को सबसे पहले किरण बेदी ने पहचाना और वीडियो के माध्यम से आम जनता के सामने रखा। किरण बेदी और केजरीवाल के बीच मतभेदों की यही शुरुआत थी। आज भी स्वामी अग्निवेश से केजरीवाल के संबन्ध पूर्ववत हैं। सन २००५-०६ में केजरीवाल ने स्वामी अग्निवेश के माध्यम से सोनिया गांधी तक उनकी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्यता पाने के लिए जोरदार लाबिंग की थी। किसी तरह आमंत्रित सदस्य के रूप में दिनांक ४ अप्रिल २००११ को स्वामी अग्निवेश के साथ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक में सोनिया गांधी के साथ चाय पीने की उनकी आकांक्षा सफल हो पाई।

केजरीवाल के दादा हरियाणा के एक सफल व्यवसायी थे। धन के प्रति केजरीवाल का लोभ भी जगजाहिर हो चुका है। अन्नाजी ने उनके इस लोभ को सार्वजनिक किया है। केजरीवाल अपने और अपने एनजीओ के लिए देसी या विदेशी, कहीं से भी धन लेने में तनिक भी परहेज़ नहीं करते। वे घोषित रूप से मुख्यतया ‘परिवर्तन’ और ‘कबीर’ नामक दो एनजीओ से संबन्धित हैं। उनकी संस्था ‘कबीर’ ने अमेरिका के फोर्ड फाउन्डेशन से वर्ष २००५ मे १,७२००० एवं वर्ष २००६ में १,९७,००० डालर प्राप्त किए। इसके पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने वर्ष २०१० में भी लाखों डालर फोर्ड फाउन्डेशन से प्राप्त किए। इन सभी अनुदानों का क्या उपयोग हुआ और और किन उद्देश्यों के लिए प्राप्त किए गए, आज तक रहस्य बने हुए हैं। फोर्ड एक मज़े हुए व्यवसायी हैं। बिना लाभ के वे एक धेला भी खर्च नहीं कर सकते। उनके माध्यम से अमेरिका विदेशों में अपने हित साधन करता है। अमेरिका में ‘आवाज़’ नामक एक एनजीओ है जिसे वहां के उद्योगपति चलाते हैं। इस संस्था ने विश्व में अमेरिका के हित में कार्य करते हुए अनेक संस्थाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय अनुदान दिया है। मिस्र के तहरीर चौक में आन्दोलन चलाने के लिए इसने करोड़ों डालर खर्च किए, लीबिया में तख्ता पलट के लिए उसने सारे खर्चे उठाए और अब सीरिया में गृह युद्ध के लिए यह संस्था दोनों हाथों से धन ऊलीच रही है। केजरीवाल के दोनों एनजीओ ‘आवाज़’ से संबद्ध हैं।

केजरीवाल को कांग्रेस तथा सरकार में तबतक कोई बुराई या भ्रष्टाचार दिखाई नहीं पड़ा जबतक वे सोनिया गांधी के नेतृत्व में कार्यरत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्यता के प्रति आशान्वित थे। वे सरकार के आशीर्वाद से ही लगभग २० वर्षों तक आयकर विभाग में वे दिल्ली में ही पदस्थापित थे। दिल्ली के बाहर उनका एक बार भी स्थानान्तरण नहीं हुआ। जबकि उनके स्तर के अन्य अधिकारियों को इतनी ही अवधि में पूरा देश दिखा दिया जाता है। उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता केजरीवाल जो उनकी बैचमेट हैं, आज भी विगत २० वर्षों से अतिरिक्त इन्कम टैक्स कमिश्नर के पद पर दिल्ली में ही जमी हुई हैं। उनका भी आज तक दिल्ली के बाहर एक बार भी तबादला नहीं हुआ है। ये उनकी कुछ ऐसी कमजोरियां हैं जिनका केन्द्रीय सरकार जब चाहे अपने पक्ष में इस्तेमाल करती हैं। भाजपा के नेताओं पर केजरीवाल ने कांग्रेस के इशारे पर ही आरोप लगाए थे। वे मुकेश अंबानी, अनु पटेल इत्यादि के चुटकी भर धन के विदेशी बैंकों में जमा होने का भंडाफोड़ करते हैं। मुकेश अंबानी एक अन्तराष्ट्रीय व्यवसायी हैं, उनके यदि सौ करोड़ विदेशी बैंकों में जमा हैं, तो कौन सी आश्चर्य की बात है? केजरीवाल ऐसे ही रहस्योद्घाटन करते हैं। विदेशों में कार्यरत या वहां से वापस आने वाले भारत के लाखों इन्जीनियरों, डाक्टरों, प्रबन्धकों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के खाते विदेशी बैंकों में हैं। क्या उनके द्वारा जमा धन काला धन है? केजरीवाल सोनिया गांधी और राजीव गांधी के विदेशी बैंकों में जमा लाखों करोड़ रुपयों पर रहस्यमयी चुप्पी साध लेते हैं। बाबा रामदेव पूरे हिन्दुस्तान में प्रमाणों के साथ चिल्ला-चिल्ला कर यह बात कहते हैं, सुब्रहमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को भेजी अपनी २५६ पेज की याचिका में प्रमाणों के साथ इन तथ्यों का खुलासा किया है, लेकिन केजरीवाल सोनिया जी पर एक शब्द भी नहीं बोलते।

१९७४-७५ में इन्दिरा सरकार और कांग्रेस आज की तरह ही भ्रष्टाचार और निरंकुशता का प्रतीक बन चुकी थी। इन्दिरा गांधी के लोकसभा के चुनाव को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया था, जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रान्ति का देशव्यापी आन्दोलन अपने चरम पर था। इन्दिरा जी ने आपात्काल लागू करके अपनी सत्ता बचा ली और लोकतंत्र का गला घोंट दिया। उस समय कांग्रेस के कुशासन और तानाशाही से देश की मुक्ति के लिए सभी विरोधी दलों का एकीकरण अत्यन्त आवश्यक था। जयप्रकाश नारायण ने यह असंभव कार्य कर दिखाया और १९७७ में पहली बार मोरारजी भाई के नेतृत्व में एक प्रभावी और भ्रष्टाचारमुक्त गैरकांग्रेसी सरकार बनी। अपने ढाई साल के कार्यकाल में उस सरकार ने जिस तरह महंगाई, भ्रष्टाचार और तानाशाही के विरुद्ध प्रभावशाली नियंत्रण स्थापित किया उसे हिन्दुस्तान की जनता आज भी याद करती है। अल्प समय में ही वह सरकार कांग्रेस के षडयंत्र का शिकार बन गई। उस समय राजनारायण और चौधरी चरण सिंह ने इन्दिरा जी के इशारे पर जनता के साथ जो विश्वासघात किया, वही कार्य सोनिया जी के इशारे पर आज अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कर रहे हैं। अगर २०१४ के आम चुनावों के बाद भ्रष्ट और निकम्मी कांग्रेस पुनः सत्ता में वापस आती है, तो इसका पूरा श्रेय राहुल-सोनिया को नहीं, अरविन्द केजरीवाल को जाएगा जो विपक्ष की विश्वसनीयता को सन्देह के घेरे में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं

 

5 Responses to “सन्देह के घेरे में अरविन्द केजरीवाल”

  1. इंसान

    कीचड़ में लथपथ बैठा यदि कोई व्यक्ति अपना मूंह पोंछने का प्रयास करे तो अवश्य उसके स्वयं के चेहरे से कीचड़ की कालिख तो हटेगी नहीं बल्कि कालिख धोने हेतु अपने हाथों में स्वच्छ जल लिए वहां पहुंचे किसी अरविंद केजरीवाल को ही कीचड़ में खींच वह व्यक्ति किस दैवी हस्तक्षेप का आह्वान करता है?

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  2. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbalhindustani

    अन्ना से ज्यादा काबिल और बहादुर आदमी केजरीवाल हैं अन्ना सियासी दल बनाने के अपने बयान से भी मुकर चुके हैं लेकिन केजरीवाल ने अपना वचन निभाया है. देखते जाइये अन्ना या बाबा रामदेव नही केजरीवाल का ही बेहतर भविष्य हो सकता है बशर्त के जनता सही चुनाव करे.

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  3. आर. सिंह

    आर.सिंह

    कांग्रेसी पानी पी पी कर केजरीवाल को कोस रहें हैं.वही काम बीजेपी के समर्थक भी कर रहे हैं.जब केजरीवाल झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों और ५०० घर गिराए जाने वाले मुसलामानों का समर्थन करते हैं तो वे सीधा कांग्रेस के गढ़ पर धावा बोलते हैं.केजरीवाल के दादा भले ही व्यापारी थे,पर उनके पिता अभियंता थे..हो सकता है की कल लोग यह भी कहने लगे की वे भी घुसखोर थे
    अन्ना ने जो बात अपने अंतिम वक्तव्य में कही है ,उससे केजरीवाल भी हैरान हैं और वे उसके लिए अन्ना जी से शायद मिले भी,पर क्या आपलोगों ने अन्ना के ३ अगस्त के अनशन तोड़ने के दिन से आजतक के वक्तव्यों पर ध्यान दिया है ?३ अगस्त को उन्होंने जो कहा था ,उसका वीडियो भी यु ट्यूव पर उपलब्ध है.उसके बाद तीन बार उन्होंने व्यक्तव्य बदले हैं.क्या इससे उनकी विश्वसनीयता पर संदेह नहीं उठता?रह गयी जनता पार्टी के प्रयोग को असफल होने की तो उसके लिए कौन जिम्मेवार है,यह आज भारत का काला इतिहास बन चूका है ,अतः उसके बारे में चर्चा न किया जाए तो अच्छा है.अभी जब केजरीवाल ने अपनी पार्टी बना ही ली है तो अब देखना यह है की जनता यथा स्थिति से प्रसन्न है या इसमे आमूल परिवर्तन चाहती है..रह गयी बात कांग्रेस या बीजेपी के हारने और जीतने की तो इसके लिए वे स्वयं जिम्मेवार होंगे अन्य कोई नहीं.
    ऐसे जहांतक विदेशों में काले धन पर चर्चा का प्रश्न है,मेरे विचार से केजरीवाल उन्हीं मुद्दों को उठा रहे हैं,जिनका उनके पास ठोस प्रमाण है.

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    • ramnarayan suthar

      अगर इनके पास प्रमाण है तो मिडिया में हो हल्ला मचाने के बजाय कोर्ट में जाना ज्यादा अच्छा रहेगा उससे अपराधी को सजा भी मिलेगी और जनता तक भी बात पहुँच जाएगी
      अन्ना का एक विडिओ और यु ट्यूब पर मिल जायेगा जिसमे वो कहा रहे है की बाबा रामदेव के साथ हमारा कोई गठजोड़ नहीं है अगर वो हमारे आन्दोलन में आते है तो जनता के साथ बेठे हम मंच पर उन्हें जगह नहीं दे सकते
      और आन्दोलन के असफल होने के कुछ ही दिन बाद वाही अन्ना पंतजली योगपीठ में ससम्मान बाबा रामदेव के साथ उन्ही के मंच पर बैठे थे तो क्या अन्ना ने पलटी नहीं मारी थी अगर ये सही है तो पहले वाला बयान वो किस मज़बूरी में दे रहे थे ?
      और अन्ना ने खुद कहा की भारत माता का चित्र केजरीवाल के कहने पर उतरा गया इससे सिद्ध होता है की पहले वाला हर बयान अन्ना ने केजरीवाल के कहने पर दिया मतलब केजरीवाल ने अन्ना का अपने मसुबो को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया था
      अभी अभी कुमार विस्वास ने कहा है की अन्ना द्वारा चलाया गया आन्दोलन पहले से ही राजनितिक रंग में था पर अन्ना इसे आज भी एक सामाजिक आन्दोलन ही मान रहे है मतलब साफ है की जो टीम अन्ना के साथ थी उन्होंने पहले से ही राजनीती में आने की सोच रखी थी ये अनशन तो सिर्फ एक ढोंग था और वैसे भी में कह चूका हु की कोई डायबिटीज का मरीज आठ दिन अनशन कर ही नहीं सकता और केजरीवाल ने तो वो बिना हॉस्पिटल गए पूरा किया मतलब दाल में पहले से ही कुछ काला था अन्ना ब्रह्मचारी थे इसलिए १३ दिन कर पाए बाबा रामदेव छठे दिन हॉस्पिटल में थे क्योंकि अभ्यास नहीं था पर केजरीवाल ने तो कमल ही कर दिया

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      • आर. सिंह

        आर.सिंह

        राम नारायण सुथर जी अरविन्द केजरीवाल ने जब पार्टी बना ली है तो इस तरह के आरोप प्रत्यारोप तो चलते ही रहेंगे।इसलिए इस पर मैं ज्यादा बहस नहीं करना चाहता।अब तो देखना यह है कि जनता क्या चाहती है ?रह गयी अन्ना जी के बार बार बयान बदलने की बात तो उसपर आप मुझसे सहमत नजर आते हैं, आपको भी शायद उनकी विश्वसनीयता पर संदेह लगता है।

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