प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

  प्रखर राष्ट्रवाद का प्रतीक इजराइल और मोदी  

आज भारत को अमेरिका के पश्चात सबसे अधिक हथियार प्रदाय करनें वाला देश इजराइल है. कृषि क्षेत्र में भी इजराइल बहुत अग्रणी तकनीक वाला राष्ट्र है. इजराइल की कृषि तकनीक गजब की जल बचत की तकनीक है जिसकी आवश्यकता भविष्य में समूचे विश्व को पड़ने वाली है. कृषि क्षेत्र में भारत द्वारा बनाए जा रहे 26 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में से 15इजराइल के सहयोग से विकसित किये जा रहे हैं.

ट्रंप-नमो का सामंजस्य और ड्रेगन की भड़ास

“आतंकवाद का समाप्ति हमारी शीर्ष प्राथमिकता है” यह कहकर ट्रंप ने मुंबई व पठानकोट के दोषियों को शीघ्र कटघरे में लानें व सजा देनें की बात भी कही. “आतंकवाद हेतु पाकिस्तान की धरती का उपयोग पाकिस्तान को परेशानी व संकट में डालेगा” इस संदेश को दृढतापूर्वक प्रकट करनें में दोनों नेताओं ने स्पष्ट शब्दों व भावभंगिमा का प्रयोग किया.

भाजपाई सोशल इंजीनियरिंग के शिल्प: कोविंद

भारत में राष्ट्रपति चुनावों में प्रत्याशियों के चयन का बेहद उजला व प्रतिष्ठाजनक इतिहास रहा है तो वहीँ दूसरी ओर ग्यानी जैलसिंह व प्रतिभा पाटिल जैसे नाम भी रहें हैं जिन्होनें राष्ट्रपति भवन की गरिमा को दीर्घकालीन चोटिल किया है. ज्ञानी जैलसिंह सिंह ने तो सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि मैं सार्वजनिक रूप से इंदिरा गांधी की चप्पलें भी उठा सकता हूँ. ठीक इसी भातिं प्रतिभा ताई पाटिल की सबसे बड़ी योग्यता “गांधी परिवार की वफादारी” मात्र ही थी.

व्यग्र न हों – मोदी पर विश्वास रखें

जैसा कि इस आलेख के प्रथम पक्ष में ही मैंने चाणक्य का उद्धरण देकर बताया कि हमें स्वयं को साधकर सटीक समय पर अपना सर्वोत्तम करना होगा. आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है. और आज के समय की सबसे दुखद परिस्थिति यही है कि हमारी पीढ़ी कुछ अधिक व्यग्र है, वह कुछ अधिक ही हावी होनें के प्रयास में भी रहती है किंतु इस क्रम में आगे बढ़ते हुए वह स्वनियंत्रण को ही खो बैठती है जो इस समय की मूल ही नहीं अपितु परम आवश्यक आवश्यता रहती है. हम देख रहें हैं कि पाकिस्तान द्वारा हमारें सैनिकों के साथ पाशविक आचरण के बाद मीडिया पर और विशेषतः सोशल मीडिया द्वारा नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जिस तरह का बदला लेनें का मानसिक दबाव बना दिया गया है. लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित किसी भी सरकार के लिए ऐसा जनदबाव खतरनाक साबित हो सकता है, वो तो अच्छा है कि मोदी सरकार और उसके विभिन्न भाग व अंग इस जनदबाव के समक्ष भी अपनें विवेक व दायित्वबोध को यथा स्थान, यथा समय व यथा संतुलन समायोजित किये हुए है.

विश्व भर के मुस्लिमों को राह दिखाएगा भारतीय मुस्लिम

हाल ही में जब कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक के विषय में कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करनें के लिए कहा तब नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस मुद्दें पर कन्नी काटने व चुप बैठे रहनें के स्थान पर संविधान की धारा 44 के मर्म को समझ कर अपनी जिम्मेदारी निभाई व तीन तलाक के मुद्दे पर स्पष्ट असहमति व्यक्त कर दी है. 1840 में यह विवाद प्रथम बार उभरा था और 1985 में राजीव गांधी सरकार के समय तो शाह बानो प्रकरण से यूनिफार्म सिविल कोड अतीव सुर्ख़ियों में आया था.

विपक्षी दल बताएं: पत्थरबाजों के साथ हैं या सेना के साथ

कश्मीर में पत्थरबाजी और सेना की जीप पर बंधे युवक विषय पर जहां दिग्विजय ने एक भड़काऊ बयान देकर सेना की पवित्रता को ललकारा है वहीँ दूसरी ओर कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार के सदस्य व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी अगली पिछली खुजली को एक ट्वीट के माध्यम से व्यक्त किया है व भारतीय सेना के विपरीत वातावरण बनाने का दुष्प्रयास किया है. दिग्विजय व उमर अब्दुल्ला सेना द्वारा जीप पर बांधकर घुमाए जा रहे जिस युवक का वितंडा खड़ा किया जा रहा है; उसके पीछे की परिस्थितियां भी देश के समक्ष स्पष्ट हो जानी चाहिए.

बाबासाहेब – एक अनुकरणीय व्यक्तित्व

पूना पैक्ट की पीठ तक की यात्रा तक में बाबा साहेब भारत की एक बड़े दलित राजनैतिक केंद्र और संस्था के रूप में स्थापित हो चुके थे. ब्रिटिशर्स और गांधी दोनों के ही प्रति जातिगत व्यवस्थाओं में परिवर्तन को लेकर उदासीनता को लेकर वे खिन्नता प्रकट करते थे. दलितों और अछूतों की स्वतंत्र राजनैतिक परिभाषा और पहचान को लेकर वे संघर्ष को तीक्ष्ण कर रहे थे उस दौर में बाबा साहेब ने गांधी के प्रति यह नाराजगी भी प्रकट किया था कि वे दलितों को हरिजन कहनें के पीछे जिस प्रकार का भाव प्रकट करते हैं उसमें दलित देश में एक करुणा मात्र की वस्तु बन कर रह गएँ हैं.

सर्वसमावेशी है हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा

हमनें सदा से विदेशियों को प्रश्रय व उनकें विचारों को सम्मान दिया है ऐसा करके हम हमारें नेसर्गिक “वसुधेव कुटुम्बकम” के मूल विचार को आगे ही बढ़ा रहे थे किंतु भारत भूमि पर बलात आने वाले मुस्लिम व ईसाई शासकों ने हमारी इस दयालुता, सहिष्णुता व भोलेपन का गलत लाभ उठाया है. इनके अतिरिक्त हमें कम्युनिस्टों से भी बड़ी हानि झेलनी पड़ी है जिन्होनें अंग्रेजों के बाद हमारा समूचा इतिहास गड्डमगड्ड कर डाला व हमारें “धर्मप्राण राष्ट्र” में “धर्म को अफीम” कहना प्रारंभ किया.

जन्मभूमि का नजराना देकर नजीर पेश करे मुस्लिम समाज

भारतीय मुस्लिमों के समक्ष भी उच्चतम न्यायालय के समझौते के आग्रह के बाद एक बड़ा महत्वपूर्ण व एतिहासिक अवसर बनकर आया है. भारतीय मुस्लिमों को यह बात विस्मृत नहीं करना चाहिए कि बाबर (जिसके नाम पर वह बदनुमा दाग रुपी बाबरी मस्जिद थी) महज एक विदेशी आक्रमणकारी व लूटेरा था. भारतीय मुस्लिमों की रगों में बाबर का खून नहीं बल्कि उनके भारतीय (पूर्व हिन्दू) पुरखों का रक्त बहता है.

अंततः योगी अंततः हिंदुत्व

सतत 5 लोस चुनाव जीतनें वाले योगी 2009 का चुनाव दो लाख वोटों से व 2014 का लोकसभा चुनाव तीन लाख मतों के अंतर से जीत चुकें हैं. लगातार पांच बार सांसद रहना, फायर ब्रांड हिन्दू नेता होना, अपनें तर्कों के माध्यम से सदा हावी रहना आदि ऐसे तर्क थे जिन्होंने भाजपा आलाकमान को योगी के पक्ष में मुख्यमंत्री की आसंदी देनें का निर्णय करवाया. योगी सदा आक्रामक रहते हुए भी एक विशिष्ट प्रकार की विनम्रता को कठोरता से अपनाए रहते हैं यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशिष्टता है.