प्रवीण गुगनानी

प्रवीण गुगनानी, दैनिक समाचार पत्र दैनिक मत के प्रधान संपादक, कविता के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी लेखन व नियमित स्तंभ लेखन.

स्वान्त्र्योत्तर भारत का सर्वाधिक बड़ा निर्णय : उच्च मूल्यवर्ग के बैंकनोटों का विमुद्रीकरण

कल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की और कि अब लोगों के पास मौजूद पांच सौ और एक हजार के नोट बाजार में मान्य नहीं होंगे तो देश भर में गजब का उत्साह छा गया. सम्पूर्ण देश के आम नागरिक इस स्थिति में अपनी विकट व विकराल समस्याओं को भी समझ रहें थे तब जिस प्रकार के प्रसंशा भाव को वे व्यक्त कर रहे थे या देश के नेतृत्व पर जिस प्रकार विश्वास व्यक्त कर रहे थे वह गजब के चरम राष्ट्रवाद के क्षण थे

तीन तलाक पर प्रगतिशील बने मुस्लिम समाज

हाल ही में जब कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक के विषय में कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करनें के लिए कहा तब नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछली सरकारों की तरह इस मुद्दें पर कन्नी काटने व चुप बैठे रहनें के स्थान पर संविधान की धारा 44 के मर्म को समझ कर अपनी जिम्मेदारी निभाई व तीन तलाक के मुद्दे पर स्पष्ट असहमति व्यक्त कर दी है. 1840 में यह विवाद प्रथम बार उभरा था और

राष्ट्रवाद के ज्वार में खून की दलाली का खलल 

इस मध्य जो सबसे लाभकारी पक्ष रहा वह यह कि देश ने राष्ट्रवाद का एक नया ज्वार देखा जो लम्बे समय तक टिकने वाला  प्रतीत होता है. अब देखना यह है कि देश में उभरे इस राष्ट्रवाद के नए ज्वार को नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अन्तराष्ट्रीय मंचों पर चीन पाकिस्तान सीमा पर कितना स्वर दे पाती है?!

सर्जिकल आपरेशन: वाह भारतीय सेना! वाह नमो !!

उड़ी हमले के पूर्व भी भारतीय सेना, भारतीय आम जनता व भारतीय संसाधनों पर कई बार आतंकियों के हमले हुए और भारत शांत और विवश बैठा रहा था. भारतीय जनमानस में लाचारी का भाव व बेबसी का भाव जागृत हो रहा था. गत लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान विरोधी नारों और भाषणों को लेकर और विशेषतः 56 इंच के सीनें वाली भाषा को लेकर वर्तमान सरकार पर तंज कसे जानें लगे थे.