हरिहर शर्मा

पूर्व अध्यक्ष केन्द्रीय सहकारी बेंक, शिवपुरी म.प्र.

प्रधान मंत्री के खिलाफ “राजनैतिक जिहाद” का फतवा – कठमुल्ले मानते हैं देश में आज भी मुग़ल सल्तनत !

सत्ताधीशों की लगातार कुर्सीपरस्त तुष्टीकरण की राजनीति के कारण भारत के कतिपय कट्टरपंथियों के मन

गोविन्दाचार्य जी जैसे व्यक्ति का यह वैचारिक स्खलन देखना सचमुच दुखदाई

हरिहर शर्मा किसी जमाने में श्री गोविन्दाचार्य राष्ट्रवादी चिंतकों में अग्रगण्य माने जाते थे !

कैसी राजनीति ? कैसी पत्रकारिता ? क्या संघ स्वयंसेवक भारत के दोयम दर्जे के नागरिक हैं ?

मंगलवार को गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह व मंत्री गौरीशंकर बिसेन व दमोह सांसद प्रहलाद पटेल जबलपुर के जामदार हास्पिटल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती यादव को देखने पहुंचे। गृहमंत्री ने कहा कि निर्दयतापूर्ण ढंग से पुलिस ने पीटा है। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सक्रिय हुए संघद्रोही, बनी रणनीति
आरएसएस के जिला प्रचारक के साथ हुई मारपीट के बाद पुलिस

रामिथ की नृशंस हत्या – केरल में मार्क्सवादी-जेहादी घातक गठबंधन

जिस प्रकार श्री उथमान की हत्या में जिहादी मानसिकता की भूमिका सामने आई थी, उसी प्रकार रामिथ की हत्या में भी जिन हमलावरों के नाम सामने आये हैं, उनसे यह तथ्य स्पष्ट हो रहा है कि अब केरल में जेहादी तत्वों और सीपीएम का अपवित्र गठबंधन बन चुका है । जिहादी पृष्ठभूमि के खतरनाक शातिर आपराधी रहीम की भूमिका रामिथ की ह्त्या में सामने आई है ।

ट्रिपल तलाक के कोढ़ में खाज, इस्लामी बैंक का आगाज !

कट्टरपंथी मानसिकता से काम करने वाला यह बैंक क्या गुल खिलायेगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है ! आज जबकि फिजा में ट्रिपल तलाक का मामला सरगर्म है, यह भी विचारणीय हैकि कहीं बैंक धर्मांतरण के लिए लव जिहाद को तो बढ़ावा नहीं देगा ?

जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख – एक तुलनात्मक विश्लेषण

नानाजी अक्सर राजा राम की तुलना में वनवासी राम की अधिक प्रशंसा करते थे । उनका कहना था कि राजा के रूप में राम इसलिए अधिक सफल हुए, क्योंकि उन्होंने वन में रहते हुए गरीबी को जाना, समझा | इसीलिए नानाजी ने भी राजनीति से विराम लेकर गरीब वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन खपाने का निर्णय लिया । दीन दयाल शोध संस्थान भी बनाया तो चित्रकूट में, जहाँ वनवास के दौरान भगवान राम ने अपना समय व्यतीत किया । अपने चित्रकूट प्रवास के दौरान नानाजी ने वहां के पिछड़ेपन, अशिक्षा और अंधविश्वास में डूबी जनता का मूक रुदन अनुभव किया ।