लेखक परिचय

हेमेन्द्र क्षीरसागर

हेमेन्द्र क्षीरसागर

लेखक व विचारक संपर्क : 09893801255/ 09424353778

सत्र और क्षेत्र से नदारद सांसद!

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देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका हर किसी को मुनासिब नहीं होता है वे नसीब वाले होते है जिन्हें ये अवसर मिलता है। वह भी देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक प्रतिनिधि संस्था संसद का, अभिभूत  सौभाग्य तो सिर्फ और सिर्फ 130 करोड के देश में 545 लोकसभा सांसदों को जन-गण ने दिया है। यह सोच कर… Read more »

राष्ट्र निर्माण और मानव शिल्पी दीनदयाल

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देश की आजादी और नवनिर्माण में सर्वस्त्र न्योछावर करने वाले पुरोधाओं की कमी नहीं है, कोई ज्ञात है तो कोई अज्ञात है। जो स्मृत है उन्हें श्रद्धा के दो फूल नसीब है और विस्मृत को सजदा के दो बोल भी मुनासिब नहीं। शाष्वत सबकी भूमिका अपनी जगह बहुमूल्य है, बात है मानने की तो अनुयायी… Read more »



खौफ में कौम, मौज में हामिद!

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हेमेन्द्र क्षीरसागर बहुसंख्यकों के बीच में अल्पसंख्यकों का वतन की सर्वोच्च आसंदी पर आसिन हो जाना हिन्दुस्तान की सर जमीं के अलावा कहीं दीगर मयस्सर नहीं है। जाके देखिए! उन मुल्कों में जहां अल्पसंख्यकों के लिए नुमाइंदगी तो छोडिए मर्जी से जीना तक बमुश्किल है। यह हिन्दुस्तान की गंगा-जमना तहजीब की सीख है कि हिन्दु-मुस्लिम-सिख-ईसाई… Read more »

हम कब होंगे आजाद!

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हेमेन्द्र क्षीरसागर आजादी के पहले गुलामी एक मुसिबत थी, 15 अगस्त 1947 के बाद आजादी एक समस्या बन गई, बेबसी आज भी हम आजाद देश के गुलाम नागरिक है। व्यथा सत्ता बदली है व्यवस्था नहीं, स्वाधीन देश में रोटी-कपडा-मकान-सुरक्षा और दवाई-पढाई-कमाई पराधीन होने लगी। यह सब मोहलते, सोहलते और जरूरते कब अधिन होगी। इसी छटपटाहट… Read more »

आरती का दम, बेटी नहीं हुनर में कम

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हेमेन्द्र क्षीरसागर एक जमाना था जब बेटियों को घर की चार दीवारियों में कैद रखकर चुल्हा-चक्की तक सीमित रखा जाता था, पढाई-लिखाई तो उनके लिए दूर की कौडी थी। धीरे-धीरे समय ने करवट बदली और बेटियां बेटों के साथ पढने लगी। यहां तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चला किन्तुु कौशलता, कारीगिरी तथा तकनीकी दक्षता के… Read more »

3 फीसद जमीन,  17 फीसद जन 

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हेमेन्द्र क्षीरसागर बेलगाम बढती आबादी एक विश्वव्यापी समस्या हैं, खासतौर पर अविकसीत और विकासशील देशों के लिए यह और भी अधिक गंभीर हैं। विशेषतः भारत में वृद्धि और विकास को हानि पहॅंुचाते हुए तीव्र गति से बढती जनसंख्या परेशानी का सबक बन चुकी हैं। उधेड़बून में हम 1.30 अरब हो चुके हैं। इतर हमारे पास… Read more »

वृक्षारोपण: एक पौधा, दस हाथ

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कवायद में मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा बेसिन में 6 करोड 67 लाख पौधे रोपकर दुनिया को पर्यावरण बचाने का शानदार संदेश दिया। प्रदेश में 2 जुलाई 2017 की तारिख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। बेमिसाल, दुनिया भर में अब तक एक ही दिन में इतनी बडी संख्या में पौधे रोपने का रिकाॅर्ड कहीं नहीं बना। बना तो सिर्फ और सिर्फ मध्यप्रदेश की सरजमीं पर, फलीभूत सूबे का दूसरी बार नाम गिनीज विश्व रिकाॅर्ड में शुमार हो गया। लिहाजा, सदी के इस सबसे बडे महा वृक्षारोपण प्रकल्प की चहुंओर प्रषंसा हो रही है। बेहतर उक्त एक दिवसीय पौधे रोपण के बाद भी जुलाई-अगस्त में प्रदेश के 51 जिलों में करीबन 8 करोड पौधे लगाए जाने की योजना है।

राष्ट्रीय पशु गाय को मौज की मौत

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मालूम हो कि केरल हाई कोर्ट ने युवक कांगे्रस के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार के आदेश  पर रोक लगाने पर हैरानी जताई। दूसरी ओर ंिहंगौनिया गोशाला मामले मे सुनवाई के दौरान राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि गोवंश की हत्या पर उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया जाए। अभी तीन साल कैद की सजा का प्रावधान है।

बेकामी फटाखों पर लगे रोक

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बेवजह की चीज खरीदते-खरीदते एक दिन ऐसा आता है कि जरूरत के लिए वजह की चीज बेचना पडता है, इसीलिए सोच-समझकर कदम उठाना वक्त की नजाकत है। उसी हिमायत की आज बहुत दरकार है, देश में चंहुओर व्यसन, फैशन और फंतासी जीवन की उधेडबून में खर्चीली, जहरिले और जानलेवा सामानों की भरमार है। जिसे आए… Read more »

व्हिस्की पीने के लिए और पानी लडने के लिए

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हेमेन्द्र क्शीरसागर व्हिस्की पीने के लिए और पानी लडने के लिए अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन की यह मशहूर कहावत चरितार्थ हो चुकी है। जगह-जगह लोग पानी-पानी के लिए त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहे है। जीने के लिए एक बूंद पानी बमुश्किल से मुनासिब हैं। वहीं व्हिस्की का जगह-जगह पाबंदी के बावजूद मिलना आम बात हो गई है।… Read more »