लोकेन्द्र सिंह राजपूत

युवा साहित्यकार लोकेन्द्र सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। वे स्वदेश ग्वालियर, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समसाययिक विषयों पर आलेख, कहानी, कविता और यात्रा वृतांत प्रकाशित। उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह 'देश कठपुतलियों के हाथ में' प्रकाशित हो चुका है।

आज की आवश्यकता है एकात्म मानवदर्शन

जिस समय न केवल दुनिया में बल्कि भारत में भी इन विचारधाराओं का वर्चस्व था, खासकर साम्यवादी विचारधारा का, तब संघ के द्वितीय संघचालक माधव सदाशिव राव गोलवलकर ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि वह प्रकृति के अनुकूल विचारदर्शन प्रस्तुत करें। इसके बाद ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवदर्शन जैसा सम्पूर्ण विचारदर्शन दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया। एकात्म मानवदर्शन में परस्पर निर्भरता की बात कही गई। सबको एक-दूसरे के साथ एकात्म मानकर विचार किया गया।

रामायण संग्रहालय का सराहनीय फैसला

सरकार के इस निर्णय में राजनीति देख रहे महानुभावों और राजनीतिक दलों को समझना चाहिए कि ‘रामायण सर्किट’ बनाने पर केन्द्र सरकार काफी पहले से विचार कर रही थी। रामलीला संग्रहालय उसी रामायण सर्किट का ही हिस्सा है। अक्षरधाम की तर्ज पर रामलीला संग्रहालय की घोषणा भी अभी नहीं की है, बल्कि पिछले साल जून में सरकार ने इसकी घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिल के करीब है हृदयप्रदेश

देश की अनेक सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन लिया जा सकता है। इसी तरह, ‘मेक इन इंडिया’ की तर्ज पर ‘मेक इन मध्यप्रदेश’ की पहल करने वाला एकमात्र राज्य मध्यप्रदेश है। आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की तर्ज पर अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी ‘शिव की बात’ के जरिए प्रदेश की जनता से संवाद करेंगे।

सुधार क्यों नहीं चाहता मुस्लिम समुदाय

यह कैसी प्रथा है कि फोन पर, ई-मेल से, एसएमएस से या पत्र से भी तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कह देने भर से संबंध खत्म कर लिया जाता है। मुस्लिम महिला को इसमें समानता का अधिकार कहाँ है? उसके पास तो अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं है। इस कुरीति का समर्थन करने के लिए यह कहना कि यदि पुरुष के पास तीन तलाक का अधिकार नहीं होगा, तब वह महिला से छुटकारा पाने के लिए उसकी हत्या कर देगा। इसलिए तीन तलाक महिलाओं के हक में है, क्योंकि इससे उनका जीवन सुरक्षित होता है। यह कठमुल्लापन नहीं, तो क्या है?

हमारे नेताओं को आखिर वीडियो क्यों चाहिए?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट और पाकिस्तान की हरकत पर अरविंद केजरीवाल का खून इतना ही खौल रहा था, तब उन्हें भारतीय सेना से आग्रह करना चाहिए था कि एक सर्जिकल स्ट्राइक और कर दो, ताकि पाकिस्तान को समझ आए कि हाँ सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है। केजरीवाल की तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम और संजय निरुपम को भी सेना पर भरोसा नहीं है।