मानव गर्ग

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नवदेहली से विद्युत् अभियन्त्रणा विषय में सन् २००४ में स्नातक हुआ । २००८ में इसी विषय में अमेरिकादेसथ कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर से master's प्रशस्तिपत्र प्राप्त किया । पश्चात् ५ वर्षपर्यन्त Broadcom Corporation नामक संस्था के लिए, digital communications and signal processing क्षेत्र में कार्य किया । वेशेषतः ethernet के लिए chip design and development क्षेत्र में कार्य किया । गत २ वर्षों से संस्कृत भारती संस्था के साथ भी काम किया । संस्कृत के अध्ययन और अध्यापन के साथ साथ क्षेत्रीय सञ्चालक के रूप में संस्कृत के लिए प्रचार, कार्यविस्तार व कार्यकर्ता निर्माण में भी योगदान देने का सौभाग्य प्राप्त किया । अक्टूबर २०१४ में पुनः भारत लौट आया । दश में चल रही भिन्न भिन्न समस्याओं व उनके परिहार के विषय में अपने कुछ विचारों को लेख-बद्ध करने के प्रयोजन से ६ मास का अवकाश स्वीकार किया है । प्रथम लेख गो-संरक्षण के विषय में लिखा है ।

भूमि अधिग्रहण विवाद, भाग १ – स्वतन्त्र चिन्तन की आवश्यकता

-मानव गर्ग- केन्द्रीय प्रशासन के द्रारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण विधेयक बहुकाल से देश में व्यापक विवाद का विषय बना हुआ...

प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार

गत एक मास में भारत के अनेक क्षेत्रों में अनपेक्षित महती वृष्टि और शिलावृष्टि (ओलावृष्टि) हुई, जिससे इन क्षेत्रों में...

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