धर्म-अध्यात्म “मनुष्य का कर्तव्य सृष्टि के अनादि पदार्थों के सत्यस्वरूप एवं अपने कर्तव्यों को जानना है” November 29, 2018 / November 29, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जन्म लेकर माता-पिता व आचार्यों से विद्या ग्रहण करता है। विद्या का अर्थ है कि सृष्टि में विद्यमान अभौतिक व भौतिक पदार्थों के सत्यस्वरूप को यथार्थरूप में जानना और साथ ही अपने कर्तव्य कर्मों को जानकर उनका आचरण करना। संसार में मनुष्यों की जनसंख्या 7 अरब से अधिक बताई जाती है। […] Read more » अग्निहोत्र यज्ञ अजन्मा अनन्त उपासना दयालु धर्त्ता निराकार न्यायकारी माता पिता सब सृष्टि का कर्त्ता सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान् हर्त्ता
प्रवक्ता न्यूज़ “हिन्दू जाति के सच्चे रक्षक व उद्धारक महर्षि दयानन्द सरस्वती और आर्यसमाज” November 28, 2018 / November 28, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द एक पौराणिक पिता व परिवार में गुजरात प्रान्त के मौरवी जनपद के टंकारा नाम ग्राम में 12 फरवरी, सन् 1825 को जन्में थे। उनके पिता शिव भक्त थे। उनके परिवार के सभी सदस्य भी पौराणिक आस्थाओं में विश्वास रखने वाले जन्मना ब्राह्मण थे। स्वामी दयानन्द का बचपन का नाम मूल […] Read more » आचार्य डॉ. रामनाथ वेदालंकार पं. गंगा प्रसाद उपाध्याय पं. गणपति शर्मा पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु पं. भगवद्दत्त जी पं. युधिष्ठिर मीमांसक भाई परमानन्द महर्षि दयानन्द सरस्वती महात्मा आनन्द स्वामी महाशय राजपाल रामप्रसाद बिस्मिल लाला लाजपतराय स्वामी अमर स्वामी स्वामी विद्यानन्द सरस्वती
धर्म-अध्यात्म ‘नित्य पठनीय एवं आचरणीय सर्वतोमहान धर्मग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश’ November 28, 2018 / November 28, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, परमात्मा ने इस सृष्टि और मनुष्य आदि प्राणियों को बनाया है। परमात्मा, जीवात्मा और प्रकृति का अखिल विश्व में स्वतन्त्र अस्तित्व है। यह तीनों सत्तायें मौलिक, अनादि, नित्य, अनुत्पन्न, अविनाशी गुणों वाली हैं। परमात्मा ने यह सृष्टि जीवों के कर्मों के सुख व दुःख रूपी फल प्रदान करने के लिये बनाई है। […] Read more » ‘नित्य पठनीय एवं आचरणीय सर्वतोमहान धर्मग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश’ अध्ययन-अध्यापन अर्थ उपाय काम बन्धन भक्ष्य व अभक्ष्य मनुष्य धर्म मोक्ष शिक्षा
धर्म-अध्यात्म “पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय संग्रहीत बंगला सामग्री के आधार पर ऋषि जीवन का अनुवाद व सम्पादन करने वाले विद्वान पं. घासीराम” November 26, 2018 / November 26, 2018 | 2 Comments on “पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय संग्रहीत बंगला सामग्री के आधार पर ऋषि जीवन का अनुवाद व सम्पादन करने वाले विद्वान पं. घासीराम” मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द के जीवन विषयक इतिहास सामग्री के संग्रह में पं. लेखराम एवं पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय का स्थान सर्वोपरि है। इन दोनों ऋषि भक्तों ने ऋषि दयानन्द के जीवन विषयक सामग्री का संग्रह कर उनके जो जीवन चरित्र लिखे हैं वह आर्यसमाज साहित्य में उच्च स्थान रखते हैं। यह […] Read more » ऋग्वेदादिभाष्य ऋषि दयानन्द घासीराम जी देवेन्द्र बाबू पं. उर्दू पद्यानुवाद
धर्म-अध्यात्म “महनीय विस्मृत जीवन अथर्ववेद भाष्यकार पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी” November 23, 2018 / November 23, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, वेद ईश्वर प्रदत्त ज्ञान है जो सृष्टि के अनुकूल व ज्ञान-विज्ञान पर भी सत्य सिद्ध है। महाभारतकाल तक देश में ऋषियों की परम्परा विद्यमान रही जिससे सर्वत्र वेदों व उनके सत्य अर्थों का प्रचार था। महाभारत युद्ध के बाद देश व संसार में अज्ञान का अन्धकार फैल गया। लोगों में वेदों के […] Read more » “महनीय विस्मृत जीवन अथर्ववेद भाष्यकार पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी” अवतारवाद ऊंच-नीच छुआछूत पाषाण मूर्तिपूजा फलित ज्योतिष मृतक श्राद्ध
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” November 22, 2018 / November 22, 2018 | 1 Comment on “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) की अनुसंधानपूर्ण मौलिक जीवनी लेखकों में बंगाल निवासी बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय का नाम सम्मिलित है। आपने 10 वर्षों तक देश भर में घूम कर ऋषि जीवन की सामग्री का संग्रह किया था। उन्होंने ही ऋषि दयानन्द के जन्म स्थान टंकारा की खोज की और ऋषि दयानन्द के बाल्यकाल […] Read more » ‘आर्य लेखक कोश “ऋषि दयानन्द के एक जीवनीकार बाबू देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय” आर्यसमाजी महर्षि दयानन्द सरस्वती मैसर्स विजयकुमार गोविन्दराम हासानन्द
धर्म-अध्यात्म ‘भारत में उत्पन्न सब लोगों को देश की उन्नति तन, मन व धन से करनी चाहिये’ November 21, 2018 / November 21, 2018 | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, हम बहुधा देखते कि कुछ स्वदेशवासियों व संस्थाओं में स्वदेश भक्ति कम है अथवा नहीं है। देश और मातृभूमि को सबसे ऊंचा व बड़ा नहीं माना जाता। ऐसे भी लोग हैं जो विदेशी मत-मतान्तरों व उनके अनुसार जीवन जीने में ही अपने को गौरवान्वित अनुभव करते हैं। ऐसे लोगों का आचार, विचार […] Read more » आर्याभिविनय उपनिषद ऋग्वेदादिभाष्य दर्शन प्रक्षेपरहित वेद सत्यार्थप्रकाश
धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द लिखित राजा भोज के जीवन की कुछ विशेष बातें” November 20, 2018 / November 20, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) जी ने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश के ग्यारहवें समुल्लास में राजा भोज (1010-1055) के समय पुराणों की रचना एवं महाभारत व इसके प्रक्षेपों की चर्चा की है। उन्होंने राजा भोज के समय में विद्यमान कुछ वैज्ञानिक आविष्कारों व उपकरणों का भी उल्लेख किया है। ऋषि दयानन्द वेद, […] Read more » अन्धविश्वासों ऋषि दयानन्द वेद भेदभाव महर्षि दयानन्द सरस्वती मिथ्यापूजा वैदिक विज्ञान वैदिक साहित्य सामाजिक
समाज “हमारे निमित्त से होने वाला वायु प्रदुषण हमारे परजन्म के सुखों में बाधक होंगे” November 19, 2018 / November 19, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जीवन में यदि किसी भौतिक वस्तु का सबसे अधिक महत्व है तो वह वायु है। वायु हमारे जीवन का प्रमुख आधार है। हम श्वास-प्रश्वास में वायु का ही सेवन करते हैं। हमें श्वास लेने में शुद्ध वायु की आवश्यकता होती है और जब हम श्वास छोड़ते हैं तो अशुद्ध वायु या […] Read more » “हमारे निमित्त से होने वाला वायु प्रदुषण हमारे परजन्म के सुखों में बाधक होंगे” अण्डों अर्जुन आकृति कृष्ण जी दांतों की बनावट धूम्रपान भीष्म पितामह मधुमेह मानवीय बुद्धि मांसाहार हृदय
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि की उत्पत्ति और इसकी व्यवस्था ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है” November 19, 2018 / November 19, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, हम जिन पदार्थों व वस्तुओं को आंखों से प्रत्यक्ष देखते हैं उनके अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। जो पदार्थ हमें दीखते नहीं हैं उन्हें हम प्रायः स्वीकार नहीं करते। ईश्वर है या नहीं, इसका उत्तर सामान्य बुद्धि के लोग यही कहते हैं कि दिखाई न देने के कारण ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार […] Read more » “सृष्टि की उत्पत्ति और इसकी व्यवस्था ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है” ईश्वर ऋषि दयानन्द जिह्वा ज्ञानेन्द्रियों नाक सृष्ट्यित्पत्ति
धर्म-अध्यात्म “ऋषि बोधोत्सव कैसे मनाओगे? : स्वामी श्रद्धानन्द” November 17, 2018 / November 17, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आगामी ऋषि बोधोत्सव का पर्व मार्च 2019 में पड़ रहा है। इस अवसर के लिये मन और मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला उपर्युक्त शीर्षक से लिखा व प्रकाशित स्वामी श्रद्धानन्द जी महाराज का एक लेख हम प्रस्तुत कर रहे हैं।क्या इस बार व्याख्यान सुन और चार आने भेंट चढ़ा कर पल्ला छुड़ाओगे। […] Read more » ऋषि दयानन्द स्वामी श्रद्धानन्द स्वामी श्रद्धानन्द जी
धर्म-अध्यात्म “सृष्टि रचना का उद्देश्य जीवों को भोग व अपवर्ग प्रदान कराना” November 16, 2018 | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य चेतन प्राणी है। मनुष्य का शरीर पंच भौतिक तत्वों से बना है। पृथिवी (सूर्य, चन्द्र, सभी ग्रह व उपग्रह), अग्नि, वायु, जल, आकाश पंच भौतिक पदार्थ हैं। यह सभी पदार्थ जड़ हैं। इनका उपादान कारण त्रिगुणात्मक प्रकृति है जो कि जड़ है। यह प्रकृति अनादि? नित्य व अविनाशी तत्व है।सृष्टि में […] Read more » अजर अमर अल्पज्ञ आनन्द रहित आनन्द व सुखाभिलाषी ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप एकदेशी चेतन निराकार न्यायकारी परिमाण पवित्र सर्वज्ञ सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी