प्रणय कुमार

शिक्षक, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन। आईआईटी, कानपुर में 'शिक्षा सोपान' नामक सामाजिक संस्था की संकल्पना एवं स्थापना। हाशिए पर जी रहे वंचित समाज के लिए शिक्षा, संस्कार एवं स्वावलंबन के प्रकल्प का संचालन। विभिन्न विश्वविद्यालयों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं में राष्ट्रीय, सनातन एवं समसामयिक विषयों पर अधिकारी वक्ता के रूप में उद्बोधन। जन-सरोकारों से जुड़े सामाजिक-साहित्यिक विमर्श में सक्रिय सहभाग।

साहस, स्वाभिमान एवं स्वानुशासन के जीवंत प्रतीक थे- नेताजी सुभाष चंद्र बोस

महापुरुष या स्वतंत्रता सेनानी किसी जाति, प्रांत या मज़हब के नहीं होते। वे सबके होते हैं और सब उनके। उन...

त्याग, बलिदान, परमार्थ और पराक्रम की अनूठी परंपरा और खालसा-पंथ

जब राष्ट्राकाश गहन अंधकार से आच्छादित था, विदेशी आक्रांताओं एवं आतताइयों द्वारा निरंतर पदाक्रांत किए जाने के कारण संस्कृति-सूर्य का...

भारत का भारत से साक्षात्कार कराने वाले अद्भुत संत- स्वामी विवेकानंद

यह कहना अनुचित नहीं होगा कि जहाँ आदि शंकराचार्य ने संपूर्ण भारतवर्ष को सांस्कृतिक एकता के मज़बूत सूत्र में पिरोया,...

भारत और भारतवासियों की अपराजेय दृढ़ता, जीवटता एवं संघर्षशीलता का वर्ष- 2020

प्रणय कुमारप्रकृति अपने ढंग से संतुलन साधती है और निरंकुश, स्वेच्छाचारी, भौतिकवादी सभ्यता को समय-समय पर सचेत करती हुई अविस्मरणीय...

वर्ष 2020 या कोविड-काल के सशक्त सारथी एवं जागरूक प्रहरी: योद्धा संन्यासी योगी आदित्यनाथ

सच ही कहा गया है कि एक संन्यासी ही अच्छा राजा हो सकता है। प्राचीन भारत में तो ऐसे अनेक...

लोकतंत्र में हिंसा एवं अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं!

लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहन आस्था, विकास एवं सुधार को राजनीति की केंद्रीय धुरी बनाने, आम नागरिकों के साथ प्रत्यक्ष...

लव-ज़िहाद : एक वैश्विक समस्या

उत्तरप्रदेश सरकार 'विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020' लेकर आई है। स्वाभाविक है कि इसका आकलन-विश्लेषण सरकार के समर्थक...

गृहस्थ-परंपरा के परिव्राजक/संत थे- माधव गोविंद वैद्य उपाख्य बाबूराव वैद्य

प्रणय निःसंदेह संघ कार्य को विस्तार एवं व्यापकता देने में परिव्राजक परंपरा के  प्रचारकों का अभूतपूर्व योगदान रहा है। आज...

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