प्रणय कुमार

शिक्षक, लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। जीविकोपार्जन हेतु अध्यापन। आईआईटी, कानपुर में 'शिक्षा सोपान' नामक सामाजिक संस्था की संकल्पना एवं स्थापना। हाशिए पर जी रहे वंचित समाज के लिए शिक्षा, संस्कार एवं स्वावलंबन के प्रकल्प का संचालन। विभिन्न विश्वविद्यालयों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं में राष्ट्रीय, सनातन एवं समसामयिक विषयों पर अधिकारी वक्ता के रूप में उद्बोधन। जन-सरोकारों से जुड़े सामाजिक-साहित्यिक विमर्श में सक्रिय सहभाग।

ध्रुवीकरण के कारण पश्चिम बंगाल में हिंसा हो रही है, लोग मारे जा रहे हैं, महिलाएँ बलात्कार की शिकार हो रही हैं

ऐसा विश्लेषण करने वालों से मेरा सीधा सवाल है कि यदि आपकी बहन-बेटी-पत्नी को सामूहिक बलात्कार जैसी नारकीय यातनाओं से...

आंबेडकर के विचारों को सही मायने और संदर्भों में आत्मसात करना ज़रूरी

भारतरत्न बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर अपने अधिकांश समकालीन राजनीतिज्ञों की तुलना में राजनीति के खुरदुरे यथार्थ की ठोस एवं...

प्रधानमंत्री की बांग्लादेश-यात्रा को चुनाव से जोड़ना अनुचित परिपाटी

कोविड महामारी के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला विदेश दौरा है। बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस पर मुख्य अतिथि के...

विद्या-भारती जैसी शिक्षण-संस्था की साख़ एवं विश्वसनीयता असंदिग्ध रही है

भारतीय संस्कृति में सेवा, शिक्षा, चिकित्सा क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों-संस्थाओं के प्रति विशेष सम्मान रहा है।  योग्य, समर्पित एवं निष्ठावान...

संघ को समझने के लिए भारत की चिरंतन सांस्कृतिक धारा की समझ आवश्यक

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्ता के लिए पूर्व में असदुद्दीन ओवैसी (2012 तक), असम में मौलाना बदरुद्दीन अजमल और हाल...

माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरूजी और संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धुर-से-धुर विरोधी एवं आलोचक भी कदाचित इस बात को स्वीकार करेंगें कि संघ विचार-परिवार जिस सुदृढ़...

छत्रपति शिवाजी और राष्ट्रीय-जीवन में उनका अप्रतिम योगदान

राष्ट्रीय जीवन एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में छत्रपति शिवाजी महाराज की महत्ता एवं योगदान को रेखांकित-मूल्यांकित करने के लिए तत्कालीन परिस्थितियों...

बिदाई-बेला पर उपस्थित भावुक प्रसंगों से मिली सीख

नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद की राज्यसभा से विदाई-बेला पर उपस्थित भावुक दृश्यों एवं प्रसंगों के आलोक में भारतीय मन-मिज़ाज...

सितारा हस्तियों को चेहरा बनाए जाने से किसान-आंदोलन की साख़ पर सवाल

ग्यारह दौर की वार्त्ता, निरंतर किसानों से संपर्क और संवाद साधे रखने के प्रयास, उनकी हर उचित-अनुचित माँगों को मानने...

बादल हटेगा, अँधेरा छँटेगा हम सूरज बन फिर दमकेंगें

आप जितना रोकेंगेंहम उतना बढेंगेंसनद रहे, हम उतना बढेंगें षड्यंत्रों से कभी संकल्प डिगे हैंबाधाओं से कभी इरादे झुके हैंसत्य...

अपनी संस्थाओं की उपलब्धियों पर गर्व कर ही हम उन्नत राष्ट्र की नींव रख सकते हैं।

लोकतांत्रिक मूल्यों एवं मानवाधिकारों की रक्षा का दंभ भरने वाले अमेरिका और पश्चिमी जगत के यथार्थ से हम अनभिज्ञ नहीं।...

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