धर्म-अध्यात्म पादरियों के सेक्स-कारनामों से थर्राया यूरोप, वेटिकन ने की क्षमायाचना March 22, 2010 / December 24, 2011 | 3 Comments on पादरियों के सेक्स-कारनामों से थर्राया यूरोप, वेटिकन ने की क्षमायाचना समाचार पोर्टल सीएनएन व अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के हवाले से मिल रही खबरों से पता चला है कि वेटिकन कैथोलिक पादरियों के बारे में दुनियाभर और खासतौर से यूरोप के विभिन्न देशों से एक के बाद एक सेक्स-कारनामों के खुलासे से बुरी तरह हिल गया है। और तो और शुक्रवार को म्युनिख, जर्मनी […] Read more » Sex ईसाई पादरी
खेत-खलिहान जैव विविधता पर टूटता कहर March 20, 2010 / December 24, 2011 | 1 Comment on जैव विविधता पर टूटता कहर धरती में पाई जाने वाली ”जैव विविधता” अनमोल सम्पदा है। इस सम्पदा के बारे में अधिकांश लोग परिचित नहीं हैं। जैव विविधता में प्रकृति का अनुपम सौंदर्य समाया हुआ है। वहीं जैव विविधता को संरक्षित कर हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाए हुए हैं। जैव विविधता का आर्थिक महत्व भी है, जो आज हो रहे […] Read more » Bio-diversity जैव विविधता
खेत-खलिहान खेतों से थाली तक पहुंचा ‘स्लो पॉयज़न’ March 18, 2010 / December 24, 2011 | Leave a Comment कीटनाशकों और रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जहां कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं कृषि उत्पाद भी जहरीले हो गए हैं। अनाज ही नहीं, दलहन, फल और सब्जियों में भी रसायनों के विषैले तत्व पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। इसके बावजूद अधिक उत्पादन की […] Read more » Slow poison कीटनाशक
कविता वंदना शर्मा की कविता March 16, 2010 / December 24, 2011 | 1 Comment on वंदना शर्मा की कविता याद आता है मुझे वो बीता हुआ कल हमारा, जब कहना चाहते थे तुम कुछ मुझसे, तब मै बनी रही अनजान तुमसे, जाना चाहती थी मैं दूर, पर पास आती गई तुम्हारे, लेकिन धीरे-धीरे होती रही दूर खुदसे, फिर तो जैसे आदत बन गई मेरी हर जगह टकराना जाके यूँ ही तुमसे, जब तक नहीं […] Read more » poem कविता
महिला-जगत पुरूषवादी चेहरे पर महिलावादी मुखौटा – डॉ. रमेश यादव March 16, 2010 / December 24, 2011 | Leave a Comment आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के 100 वें साल के अवसर पर यूपीए सरकार ने महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण का तोहफा देने में असफल रही। यह दिन भारत के इतिहास में दर्ज होते-होते रह गया। लेकिन दूसरे दिन ताकत के बल राज्यसभा में उक्त बिल को पास कराने में सरकार सफल रही। जदयू, […] Read more » Woman Reservation महिला आरक्षण
साहित्य ‘शाश्वती’ ने किया अज्ञेय स्मारक व्याख्यान का आयोजन March 15, 2010 / December 24, 2011 | Leave a Comment जम्मू के अज्ञेय प्रेमी हिन्दी साहित्यकारों की संस्था ‘शाश्वती’’ ने पहला अज्ञेय स्मारक व्याख्यान 7 मार्च 1998 को आयाजित किया था। उसी सिलसिले को आगे बढ़ाजे हुए शाश्वती ने 7 मार्च 2010 को के.एल. सहगल हॉल जम्मू में अज्ञेय स्मारक व्याख्यान 2010 का आयोजन किया जिसमें हिन्दी के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार और व्यंग्य-यात्रा के सम्पादक प्रेम […] Read more » Agyey smarak vyakhyan अज्ञेय स्मारक व्याख्यान
राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान/कांग्रेस के चाणक्य का राजनैतिक सूर्य अस्ताचल की ओर! March 15, 2010 / December 24, 2011 | Leave a Comment बीसवीं सदी में देश प्रदेश की राजनीति में धूमकेतु की तरह उभरे कांग्रेस के चाणक्य कुंवर अर्जुन सिंह की स्थिति उनके ही चेलों ने बहुत जर्जर करके रख दी है। कल तक जिस राजनैतिक बियावन में अर्जुन सिंह ने गुरू द्रोणाचार्य की भूमिका में आकर अपने अर्जुन रूपी शिष्यों को तलवार चलाना सिखाया उन्ही अर्जुनों […] Read more » Chanakya चाणक्य
मीडिया ”जब अखबार मुकाबिल हो तो बन्दूक निकालो” March 15, 2010 / December 24, 2011 | 1 Comment on ”जब अखबार मुकाबिल हो तो बन्दूक निकालो” राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर पत्रकारों के अनेक संगठन हैं। एनयूजे यानी नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इसे नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट भी कहा जा सकता है। यह संगठन पत्रकार संगठनों को फेडेरेशन है। अर्थात् पत्रकारों के अनेक संगठन इस यूनियन से संबंद्ध हैं। अनेक संगठनों में से एक – जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश यानी जम्प […] Read more » Journalism अखबार
राजनीति बिहार का बदलता परिवेश – संतोष सारंग March 13, 2010 / December 24, 2011 | 1 Comment on बिहार का बदलता परिवेश – संतोष सारंग बिहार के बंटवारे के बाद प्रचुर प्राकृतिक संसाधन झारखंड के हिस्से में चला गया। यहां के लोगों को बाढ़ व सुखाड़ की त्रासदी मिली। ऊपर से राजनीतिक पार्टियों का जाति व धर्म के नाम पर झूठी दिलासा। ऐसे में, यहां के गरीब-गुरबों के सामने पलायन के सिवा कोई चारा नहीं था। गांधीजी श्रम करनेवालों को […] Read more » bihar बिहार
राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका और लोकतंत्र – राजीव तिवारी March 13, 2010 / December 24, 2011 | Leave a Comment न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका का समन्वित स्वरूप ही लोकतंत्र होता है। लोकतंत्र में न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका एक दूसरे के पूरक भी होते हैं तथा नियंत्रक भी। इसका अर्थ यह हुआ कि इन तीनों में से कोई अंग कमजोर पड़ रहा हो तो शेष दो उसे शक्ति दें और यदि कोई अंग अधिक मजबूत हो […] Read more » Democracy न्यायपालिका लोकतंत्र
कला-संस्कृति दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता March 12, 2010 / December 24, 2011 | 6 Comments on दफन हो जाये ऐसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मकबूल फिदा हुसैन को लेकर फिर चर्चा है। कतर की नागरिकता लेने के बाद उनके पक्ष में तकरीरें की जा रही है। प्रगतिशील और भारतीय आस्थाओं के विरोधी एक बार फिर लामबंद, सक्रिय और आक्रामक हैं। हुसैन की करतूतों के कारण भारत में उनका काफी विरोध हुआ। भारत में कानून की हालत यह है कि […] Read more » Fida Hussain अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मकबूल फिदा हुसैन
पुस्तक समीक्षा पुस्तक समीक्षा/‘बुद्धिजीवियों’ की मुश्किल March 12, 2010 / December 24, 2011 | 1 Comment on पुस्तक समीक्षा/‘बुद्धिजीवियों’ की मुश्किल पूरन चंद जोशी की नयी किताब ‘यादों से रची यात्रा’ किसी उपन्यास की तरह एक सांस में पढ़ गया। सभ्यता के भविष्य को लेकर गहरे सात्विक आवेग से भरी यह एक बेहद विचारोत्तेजक किताब है। मनुष्यता का भविष्य समाजवाद में है, इसमें उन्हें कोई शक नहीं है। पूंजीवाद उन्हें कत्तई काम्य नहीं है। ‘समाजवाद या […] Read more » Book Review पुस्तक समीक्षा