bihar

बड़ी अदालत में बड़ा अन्याय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आप किसी भी भारतीय भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। हिंदी का भी नहीं। हिंदी राजभाषा है। यह हिंदी और राज दोनों का मजाक है। यदि आप संसद में भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर सकते हैं तो सबसे बड़ी अदालत में क्यों नहीं? सबसे बड़ी अदालत में सबसे बड़ा अन्याय है, यह ! देश के सिर्फ चार उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग हो सकता है- राजस्थान, उप्र, मप्र और बिहार! छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी स्वभाषा के प्रयोग की मांग कर रखी है।

बढ़ते अपराध एक बार फिर से बिहार को बदनामी की किसी नयी टैगिंग से नवाज देंगे …..

वर्तमान मुख्यमंत्री जी का पहला कार्यकाल अपराध नियंत्रण के लिए ही जाना जाता है और इसको लेकर मुख्यमंत्री जी ने काफी सुर्खियां भी बटोरी थीं , लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल से मुख्यमंत्री जी का सर्वोपरि एजेंडा राष्ट्रीय फलक पर छाने और खुद की छवि को खुद ही चमकाने का हो गया और यहीं से अपराध नियंत्रण की कमान ढीली होनी शुरू हुई … मैं मानता हूँ कि आंकड़ों के हिसाब से कई अन्य प्रदेशों से बिहार में अपराध अभी भी कम है और अराजक स्थिति जैसी नौबत

नकारात्मक संघर्ष पर टिकी बिहार की डर्टी पॉलिटिक्स का यही असली रूप रंग है

  अभीअभी निवृत्त हुए याने भूतपूर्व हुए बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम माझी का पटना में