प्रवक्ता न्यूज़ नरेंद्र मोदी के समर्थन में संजय पासवान ने की ‘भाजपा मित्र मंडल’ का गठन July 12, 2012 / July 12, 2012 | 1 Comment on नरेंद्र मोदी के समर्थन में संजय पासवान ने की ‘भाजपा मित्र मंडल’ का गठन नई दिल्ली, एनडीए सरकार में कभी केन्द्रीय मंत्री रहे संजय पासवान, आजकल नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाने के अभियान में लगे हैं। इसी दिशा में इनहोंने ‘भाजपा मित्र मंडल’ का गठन किया है। ‘भाजपा मित्र मंडल’ के गठन पर बोलते हुए उन्होंने कहा की यह एक ऐसा सामाजिक संगठन है जो देश […] Read more » Bhajpa Mitra Mandal BJP Friends Circle Narendra Modi Sanjay Paswan नरेंद्र मोदी भाजपा मित्र मंडल संजय पासवान
राजनीति कश्मीर के वार्ताकार बनवाएंगे एक और पाकिस्तान / नरेंद्र सहगल June 15, 2012 / June 28, 2012 | 4 Comments on कश्मीर के वार्ताकार बनवाएंगे एक और पाकिस्तान / नरेंद्र सहगल नरेन्द्र सहगल जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे से बाहर करने (1952) तुष्टीकरण की प्रतीक और अलगाववाद की जनक अस्थाई धारा 370 को विशेष कहने, भारतीय सुरक्षा बलों की वफादारी पर प्रश्नचिन्ह लगाने, पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर एक पक्ष बनाने, पाक अधिकृत कश्मीर को पाक प्रशासित मानने और प्रदेश के 80 प्रतिशत देशभक्त नागरिकों […] Read more » जम्मू-कश्मीर वार्ताकार
राजनीति न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव May 29, 2012 / June 28, 2012 | 1 Comment on न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव के विक्रम राव वैचारिक आवाजाही निर्मल-प्रवाह जैसी हो तो बौद्धिक विकास ही कहलाएगी। वरना सोच में कोई भी बदलाव अमूमन मौकापरस्ती का पर्याय बन जाता है। आज के कथित प्रगतिवादी इसी दोयम दर्जे में आते हैं। वे सब आत्ममुग्ध होकर भूल जाते हैं कि हर परिवर्तन प्रगति नहीं होता, हालांकि हर प्रगति परिवर्तन होती है। […] Read more » ओम थानवी के. विक्रम राव जनसत्ता भारत नीति प्रतिष्ठान वैचारिक अश्पृश्यता
विविधा आखिर कहां जा रहे हैं हम May 22, 2012 | Leave a Comment नरेश शांडिल्य ‘चार रईसजादों ने चलती कार में एक लड़की से रात भर किया बलात्कार’, ‘पॉश कालोनी की तीन लड़कियां वेश्यावृत्ति का धंधा करती गिरफ्तार’, ‘नशे में धुत्त अमीरजादों ने पटरी पर सो रहे चार लोगों पर अपनी कार चढ़ाई’, ‘नेताजी के बिगड़ैल शहजादे ने पुलिस वाले को पीटा’, …ऐसी खबरें अक्सर हम अखबारों में […] Read more » युवा
विविधा ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार May 17, 2012 | Leave a Comment चौधरी मोहम्मद अयूब कटारिया धरती पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सीमावर्ती जिला कुपवाड़ा अपने अतीत और वर्तमान कारणों से परिचय का मोहताज नहीं है। इसी जिले में स्थित ब्लॉक करालपूरा जिसके बारे में किदवंती है कि यहां कई सदी पूर्व शलुरा से करालपूरा तक एक बहुत बड़ा बाजार हुआ करता था मगर किसी […] Read more » करालपूरा कश्मीर
साहित्य विचार देखें, विचारधारा नहीं May 6, 2012 | 1 Comment on विचार देखें, विचारधारा नहीं तेजेंद्र शर्मा हिंदी साहित्य की त्रासदी है कि लंबे अरसे तक इस पर साम्यवादियों का कब्जा रहा। उनका मानना है कि उनकी विचारधारा के बाहर जो कुछ लिखा जा रहा है, साहित्य ही नहीं है। जबकि मेरा मानना है कि साहित्य के लिए विचार आवश्यक है, जो लेखक के भीतर से जन्म लेता है। विचारधारा […] Read more » विचार विचारधारा
महिला-जगत ग्रामीण विकास में अधिक कारगर साबित होंगी महिला जनप्रतिनिधि April 28, 2012 / April 28, 2012 | Leave a Comment अशोक सिंह एक बार फिर संसद का सत्र खत्म हुआ और हमेशा की तरह महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में ही रहा। दूसरी ओर सरकार भी आम सहमति बनाने के मूड में नजर नहीं आई। हालांकि सभी राजनीतिक दल एक सुर में महिला अधिकारों की बात करते हैं परंतु बिल […] Read more »
खेत-खलिहान सतपुड़ा की अनूठी खेती पद्धति है उतेरा April 28, 2012 | Leave a Comment बाबा मायाराम इन दिनों खेती-किसानी का संकट गहरा रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि किसान अपनी जान दे रहे हैं। पिछले 16 सालों में ढाई लाख आत्महत्या कर चुके हैं। होशंगाबाद जिले में भी आत्महत्या होने लगी हैं। अब सवाल है कि क्या आज की भारी पूंजी वाली आधुनिक खेती का कोई […] Read more » उतेरा खेती किसानी
विविधा गोलियों के बीच फंसे हैं आदिवासी April 12, 2012 / September 8, 2012 | Leave a Comment राजगोपाल पीवी प्राकृतिक संसाधन और आदिवासी संस्कृति से समृद्ध छत्तीसगढ़ को इस रूप में जानने की बजाए उसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में कहीं अधिक याद किया जाता है। विशेषकर बस्तर और उसके आसपास के क्षेत्रों से आपको नक्सलवाद से जुड़ी खबरों के अतिरिक्त कुछ और सुनने अथवा पढ़ने को नहीं मिलेगा। विकास की […] Read more » आदिवासी नक्सलवाद हिंसा
स्वास्थ्य-योग छत्तीसगढ़ के लिए वरदान बन गया ‘‘संजीवनी‘‘ March 28, 2012 | 1 Comment on छत्तीसगढ़ के लिए वरदान बन गया ‘‘संजीवनी‘‘ सूर्यकांत देवागंन छत्तीसगढ़ का नाम आते ही एक ऐसे क्षेत्र की छवि उभरकर सामने आती है जो पिछले तीन दशकों से हिंसा, संघर्ष और रक्तपात से जूझता आ रहा है। विकास की गति यहां अन्य राज्यों की अपेक्षा अब भी काफी कम है। प्रति व्यक्ति आय का मामला हो या फिर रोजगार सृजन का प्रश्ना, […] Read more »
व्यंग्य हमारे उंगल पर आपका अंगूठा February 28, 2012 | 1 Comment on हमारे उंगल पर आपका अंगूठा उंगलबाज.काम मुझे नहीं पता, आपने उंगलबाज का नाम पहले कभी सुना है या नहीं सुना। यह भारतीय मीडिया उद्योग का सबसे अविश्वनीय नाम है। इंडिया टीवी से भी अधिक अविश्वनीय। पंजाब केसरी से भी अधिक अविश्वनीय। डर्टी पिक्चर की सिल्क की तरह, जिसका नाम बदनाम होकर हुआ। हमारी विश्वसनीयता इतनी संदिग्ध है कि हमने दुनिया […] Read more »
शख्सियत भरोसा नहीं हो रहा, नहीं रहे रविन्द्र सर February 23, 2012 / February 23, 2012 | Leave a Comment दिव्यांशु कुमार रवींद्र शाह के निधन की खबर सुनकर पहले तो यकीन नहीं हुआ। मेरी उनसे आखिरी बात अगस्त 2010 में हुई थी। दिल्ली से टीवी की नौकरी छोड़कर दैनिक भास्कर में काम करने रांची आ रहा था। उन्हें फोन किया, सर दिल्ली को बाय कह रहा हूं। सारी बात सुनकर बोले, जाओ पर दिल्ली […] Read more » रवींद्र शाह