राकेश कुमार आर्य

राकेश कुमार आर्य

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उगता भारत’ साप्ताहिक / दैनिक समाचारपत्र के संपादक; बी.ए. ,एलएल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता। राकेश आर्य जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक चालीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में ' 'राष्ट्रीय प्रेस महासंघ ' के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं । उत्कृष्ट लेखन के लिए राजस्थान के राज्यपाल श्री कल्याण सिंह जी सहित कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं । सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। ग्रेटर नोएडा , जनपद गौतमबुध नगर दादरी, उ.प्र. के निवासी हैं।

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लेखक - राकेश कुमार आर्य - के पोस्ट :

राजनीति

कश्मीर का दर्द, देश का मर्ज और मोदी

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इधर भारत के नेतृत्व ने कश्मीर में 'नागों' को दूध पिलाना आरंभ कर दिया। गांधी की अहिंसा और भाईचारे की बातों के संदेश के साथ कश्मीर को आज तक अरबों रूपये के कितने ही पैकेज दिये गये पर वे सारे के सारे पैकेज इस बात को सत्य सिद्घ नहीं कर पाये कि 'मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।' वहां मजहब ही आपस में बैर रखना सिखाता रहा और हमारे ही लोगों को अपनी ही भूमि से अपने ही घरबार छोडक़र भागने के लिए विवश करता रहा। इधर कांग्रेस आतंकवादियों के साथ ऐसा व्यवहार करती रही जैसे कि वे बहुत बड़े देशभक्त हैं और उनकी सुरक्षा पर या उनकी सुख-सुविधा पर धन व्यय करना हमारा राष्ट्रीय कत्र्तव्य है।

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राजनीति

भज ‘कोविन्दम्’ हरे-हरे

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उधर संघ के लाखों कार्यकर्ता या स्वयंसेवक भी इस बार एक अपेक्षा लगाये बैठे थे कि जैसे भी हो इस बार देश का राष्ट्रपति संघ की पृष्ठभूमि का राजनीतिज्ञ बने। श्री कोविन्द संघ की पृष्ठभूमि के राजनीतिज्ञ हैं, जिनके नाम के आने से आरएसएस को भी राहत मिली है और उसके वे स्वयंसेवक भी प्रसन्न है- जिनसे कुछ समयोपरांत प्रधानमंत्री को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए काम लेना है। मोहन भागवत नहीं तो कोविन्द ही सही, अर्थात मोहन='गोविन्द' के स्थान पर कोविन्द भी चलेगा, बात तो कुल मिलाकर एक ही हुई। अब संघ भी कहने लगा है-'भज कोविन्दम् हरे हरे।'

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