संजय द्विवेदी

लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। संपर्कः अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, प्रेस काम्पलेक्स, एमपी नगर, भोपाल (मप्र) मोबाइलः 098935-98888

यादवी युद्ध में उत्तर प्रदेश

मुलायम सिंह यादव उप्र के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश का मन, मिजाज और तेवर पता हैं। वे हर विधानसभा क्षेत्र के चरित्र और उसके स्वभाव को जानते हैं। कल्याण सिंह भी लगभग ऐसी ही जानकारियों से लैस राजनेता हैं, किंतु वे राजस्थान के राजभवन में बिठा दिए गए हैं। ऐसे में मुलायम सिंह इस घटनाचक्र के अगर प्रायोजक न भी हों तो भी उनकी इच्छा के विरूद्ध यह हो रहा है, कहना कठिन है। मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह अपने ‘बेचारे’ कहे जा रहे बेटे को यह कहकर ताकत दी है कि “शिवपाल को मंत्री बनाने का मामला अखिलेश पर छोड़ता हूं” उसके बहुत बड़े संदेश हैं।

कैसे बढ़ेंगी पुलिस-पब्लिक की नजदीकियां

दिल्ली और मुंबई पुलिस ने कुछ बहुत अच्छे प्रयोग किए हैं। जाहिर तौर पर महानगरों की पुलिस ज्यादा संसाधनों से लैस है लेकिन राज्यों में वे प्रयोग दुहराए जा सकते हैं। यह बात निश्चित है कि धटनाएं रोकी नहीं जा सकतीं किंतु एक बेहतर पुलिसिंग समाज में संवाद और भरोसे का निर्माण करती है। यह भरोसा बचाना और उसे बढ़ाना आज के पुलिस तंत्र की जिम्मेदारी है। यहां यह भी जोड़ना जरूरी है कि मीडिया के तमाम अवतारों और प्रयोगों के बाद भी व्यक्तिगत संपर्कों और व्यक्तित्व का महत्व कम नहीं होगा।

गुरू ज्ञान पर भारी है गूगल ज्ञान

सच कहें तो इस कठिन समय का सबसे संकट है एकाग्रता। आधुनिक संचार साधनों ने सुविधाओं के साथ-साथ जो संकट खड़ा किया है वह है एकाग्रता और एकांत का संकट। आप अकेले कहां हो पाते हैं? यह मोबाइल आपको अकेला कहां छोड़ता है? यहां संवाद निरंतर है और कुछ न कुछ स्क्रीन पर चमक जाता है कि फिर आप वहीं चले जाते हैं, जिससे बचने के उपाय आप करना चाहते हैं।

भारतीय मूल्यों पर आधारित हो शिक्षा

वैसे भी जो समाज व्यापार के बजाए शिक्षा से मुनाफा कमाने लगे उसका तो राम ही मालिक है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने जिस तरह की जिजीविषा से शिक्षा को सेवा और स्वाध्याय से जोड़ा था वह तत्व बहुलतः शिक्षा व्यवस्था और तंत्र से गायब होता जा रहा है। इस ऐतिहासिक फेरबदल ने हमारे शिक्षा जगत से चिंतन, शोध और अनुसंधान बंद कर दिया है। पश्चिम के दर्शन और तौर-तरीकों को स्वीकार करते हुए अपनी जड़ें खोद डालीं। आज हम न तो पश्चिम की तरह बन पाए, न पूरब का सत्व और तेज बचा पाए।

अरसे बाद मुस्कराया देश

पाकिस्तान का एक देश के नाते अनेक क्षेत्रीय अस्मिताओं और राष्ट्रीयताओं से मुकाबला है। बलूचिस्तान और सिंध उनमें से चर्चित हैं। ‘धर्म’ भी पाक को जोड़ने वाली शक्ति साबित नहीं हो पा रहा है, क्योंकि क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति को पाकिस्तान ठीक से संबोधित नहीं कर पाया। पाक अधिकृत कश्मीर के हालात और भी खराब हैं। भारत के साथ कश्मीर का जो हिस्सा है, उससे तो पीओके की तुलना ही नहीं का जा सकती।

‘लक्ष्यनिष्ठ लखीराम’ का डा. रमन सिंह ने किया विमोचन

भोपाल,22 सितंबर। पूर्व सांसद और अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल…