विनोद बंसल

लेखक इंद्रप्रस्‍थ विश्‍व हिंदू परिषद् के प्रांत मीडिया प्रमुख हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन।

मुस्लिम ला बोर्ड ही है सभी मुस्लिम समस्याओं की जड़ : डा सुरेन्द्र जैन

बोर्ड के राम मन्दिर संबंधी बयान पर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए डा जैन ने कहा कि इस मामले में भी बोर्ड ने अपनी हठ-धर्मिता को ही दोहराया है. वे राम जन्म भूमि के मामले में तो न्यायालय का निर्णय चाहते हैं किन्तु, तीन तलाक में न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं. उनकी इस दोहरी मानसिकता से ही स्पष्ट हो जाता है कि वे न्यायपालिका का कितना सम्मान करते हैं. इसलिए उनके बहकावे में आने की बजाए केंद्र सरकार को आगे बढ़कर तीन तलाक, हलाला व बहु विवाह जैसी बर्बर परम्पराओं को समाप्त करने हेतु अतिशीघ्र कानून लाना चाहिए. मुस्लिम महिलाओं तथा जागृत मुस्लिम समाज की मांग के साथ मानवता का भी यही तकाजा है.

राजौरी गार्डन उप-चुनाव में किसकी हार

दिल्ली की जागरूक जनता ने किसी को जिताया या नहीं यह तो नहीं पता किन्तु, हाँ, हराया अवश्य है। जनता ने हराया है विचार को जो अलागावावाद को हवा देने, जनता को धोखा देने, संवैधानिक पदों का दुरुपयोग करने, अराजक तत्वों का साथ देने, गरीवों का मजाक उड़ा उन्हें आत्महत्या तक को उकसाने के साथ भ्रष्टाचार, नशाखोरी, महिला उत्पीडन जैसी मूलभूत समस्याओं को कम करने के स्थान पर उन्हें बढ़ावा देने लगा था। लिहाजा, ऐसे लोगों को अब जनता से माफी मांग कर उसकी सेवा में जुट जाना चाहिए।

बयान पर विवाद या कटु सत्य पर प्रहार

भाजपा सांसद साक्षी महाराज द्वारा यह कहा जाना कि ”चाहे नाम कब्रिस्‍तान हो, चाहे नाम श्‍मशान हो, दाह होना चाहिए। किसी को गाड़ने की आवश्‍यकता नहीं है।” गाड़ने से देश में जगह की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्‍होंने कहा कि ”2-2.5 करोड़ साधु हैं सबकी समाधि लगे, कितनी जमीन जाएगी। 20 करोड़ मुस्लिम हैं सबको कब्र चाहिए हिंदुस्‍तान में जगह कहां मिलेगी।” अगर सबको दफनाते रहे तो देश में खेती के लिए जगह कहां से आएगी, सत्य ही तो है.

#नोटबंदी से भ्रष्टाचार मुक्त डिजिटल भारत की ओर

आठ नवम्बर 2016 के आठ बजे की वह घडी भारतीय अर्थ व्यवस्था के शुद्धिकरण के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में जानी जाएगी। 500 व 1000 रूपए के नोटों को चलन से बंद करने की अचानक घोषणा ने समस्त देश वासियों को हिला कर रख दिया. गत एक माह के अनुभव ने एक बात तो सिखा दि कि हम समस्त भरत वंशियों को अब नकदी के मोह से उबर कर ‘नकदी रहित व्यवहार(कैश लैस ट्रान्जेक्शन)’ का अभ्यास तुरंत प्रभाव से करना पडेगा, जो दुनियाभर के विकसित तथा विकासशील देश पहले से ही सफ़लता पूर्वक कर रहे हैं।